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वेस्‍ट एशिया का जेम्‍स बॉन्‍ड, जिसके नाम से ही कांप उठती थी अमेरिका की रूह – How General Qasem Soleimani Iran Quds Force Chief Killed MQ9 Reaper drone

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Published On: April 2, 2026

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General Qasem Soleimani: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में एक ऐसे शख्‍स के नाम का उल्‍लेख किया, जिससे पूरी दुनिया का ध्‍यान बरबस ही 6 साल पीछे चला गया. ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके आदेश पर इराक में इस व्‍यक्ति को मार गिराया गया था. सवाल है कि वह शख्‍स कौन था जो इतना अभी भी इतना महत्‍वपूर्ण है, जिसका उल्‍लेख अमेरिकी राष्‍ट्रपति को उनके निधन के 6 साल बाद भी करना पड़ा है.

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ईरान के खतरनाक कुद्स फोर्स के चीफ मेजर कासिम सुलेमानी जनवरी 2020 को अमेरिकी ड्रोन अटैक में मारा गया था. (फाइल फोटो/Reuters)

General Qasem Soleimani: ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से लगातार बयान जारी किए जा रहे हैं. ट्रंप ने पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा को भी नहीं बख्‍शा. राष्‍ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने एक ऐसे शख्‍स का नाम लिया है, जिसकी चर्चा फिर से होने लगी है. ट्रंप का कहना है कि यदि वह शख्स आज जिंदा होता तो ईरान युद्ध की तस्‍वीर कुछ और हो सकती थी. इस शख्‍स का नाम है कासिम सुलेमानी. यह ईरानी सेना IRGC के कमांडर थे. बाद में उन्‍हें सेना के एक्‍सटर्नल विंग कुद्स फोर्स का चीफ भी बनाया गया था. कासिम सुलेमानी ने पश्चिम एशिया में अमेरिका की अगुआई वाले गुट के खिलाफ एक मुकम्‍मल गठजोड़ बनाया था. सुलेमानी द्वारा तैयार मोर्चे की जड़ें इराक से लेकर सीरिया, लीबिया, यमन जैसे देशों तक फैली थी. माना जाता है कि इसके सूत्रधार ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी ही थे. ऐसे में कासिम सुलेमानी अमेरिका के प्राइम टार्गेट भी थे. कासिम सुलेमानी को स्‍पाई-मास्‍टर भी कहा जाता था. CIA के एजेंट ने अपनी किताब में उन्‍हें वेस्‍ट एशिया का जेम्‍स बॉन्‍ड तक कहा था.

3 जनवरी 2020 की तड़के इराक की राजधानी बगदाद में हुए एक अमेरिकी ड्रोन हमले ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को भी चरम पर पहुंचा दिया. इस हमले में ईरान के सबसे प्रभावशाली सैन्य कमांडरों में से एक कासिम सुलेमानी (Qasem Soleimani) की मौत हो गई. यह कार्रवाई तब अमेरिका के राष्ट्रपति की कमान संभाल रहे डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर की गई थी. यह हमला स्थानीय समयानुसार रात 12:32 बजे Baghdad International Airport के पास हुआ. अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन ने दो वाहनों के काफिले को निशाना बनाया, जिसमें एक टोयोटा एवलॉन और एक हुंडई स्टारेक्स शामिल थी. यह काफिला एयरपोर्ट से निकल रहा था, जहां सुलेमानी दमिश्क से पहुंचे थे. हमले में सुलेमानी के अलावा इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के उप प्रमुख अबू महदी अल-मुहंदिस और अन्य सहयोगी भी मारे गए.

कौन थे कासिम सुलेमानी?

कासिम सुलेमानी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के प्रमुख थे. उन्हें ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति का मुख्य वास्तुकार माना जाता था. वे सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को रिपोर्ट करते थे और उनके बेहद करीबी माने जाते थे. 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में अपनी बहादुरी के कारण सुलेमानी तेजी से उभरे और बाद में कुद्स फोर्स की कमान संभाली. उनके नेतृत्व में ईरान ने इराक, सीरिया, लेबनान और अन्य क्षेत्रों में अपने प्रभाव को मजबूत किया. सुलेमानी को ईरान की फॉरवर्ड डिफेंस स्‍ट्रैटजी का प्रमुख चेहरा माना जाता था. उन्होंने लेबनान के हिज़्बुल्लाह और इराक व सीरिया के शिया मिलिशिया समूहों के साथ मजबूत संबंध बनाए. सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति बशर अल असद (Bashar al-Assad) की सरकार को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा उन्होंने इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ लड़ाई में भी अहम योगदान दिया. इराक और सीरिया में IS के खिलाफ अभियानों में उनकी रणनीति और समन्वय निर्णायक साबित हुआ.

अली अकबर अ‍हमदियान के साथ जनरल कासिम सुलेमानी. कासिम सुलेमानी सीधे अयातुल्‍ला अली खामेनेई को रिपोर्ट करते थे. (फाइल फोटो/Reuters)

लोकप्रियता और विवाद

ईरान में सुलेमानी को एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता था. एक सर्वे के अनुसार उनकी लोकप्रियता 80% से अधिक थी, जो तत्कालीन राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से भी ज्यादा थी. वे सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय थे और उनकी छवि एक फील्ड कमांडर की थी जो खुद मोर्चे पर मौजूद रहते थे. हालांकि, पश्चिमी देशों की नजर में वे एक विवादास्पद व्यक्ति थे. अमेरिका और उसके सहयोगी उन्हें क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने, आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और ईरान के प्रभाव को बढ़ाने का जिम्मेदार मानते थे. इस हमले के बाद ईरान में भारी आक्रोश देखने को मिला. सुलेमानी को शहीद घोषित किया गया और लाखों लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका बढ़ गई. विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला अमेरिका-ईरान संबंधों में एक निर्णायक मोड़ था. इससे न केवल दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए.

एविल जीनियस

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर Qasem Soleimani की 2020 में हुई हत्या को याद करते हुए बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर सुलेमानी आज जीवित होते, तो तेहरान की स्थिति अलग होती. ट्रंप ने सुलेमानी को एविल जीनियस और प्रतिभाशाली व्यक्ति बताया, लेकिन साथ ही उन्हें भयानक इंसान भी कहा. उन्होंने एक बार फिर सुलेमानी को रोडसाइड बम का जनक तक करार दिया. राष्ट्रपति ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ईरान की परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों को रोकने के लिए कई कदम उठाए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण सुलेमानी को खत्म करना था. ट्रंप के मुताबिक, सुलेमानी के जीवित रहने पर हालात अलग हो सकते थे, लेकिन अमेरिका की जीत तय थी.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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