Korantadih Dak Bunglow Ballia: वक्त के थपेड़ों और गंगा की लहरों के बीच आज भी एक ऐसी इमारत सीना ताने खड़ी है, जो कभी फिरंगियों की सत्ता का सबसे मजबूत केंद्र हुआ करती थी. हम बात कर रहे हैं बलिया के ऐतिहासिक ‘कोरंटाडीह डाक बंगले’ की. करीब 207 साल पुराना यह बंगला सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि अंग्रेजों की ऐयाशी, लगान वसूली के जुल्म और बलिया के सिद्ध संतों के आध्यात्मिक चमत्कार का मूक गवाह है. आइए, इतिहास की परतों को उधेड़ते हैं और जानते हैं कि कैसे इस बंगले में कैद हुए एक संत ने पूरी ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला दी थीं.
Korantadih Dak Bunglow Ballia: वक्त के थपेड़ों और गंगा की लहरों के बीच आज भी एक ऐसी इमारत सीना ताने खड़ी है, जो कभी फिरंगियों की सत्ता का सबसे मजबूत केंद्र हुआ करती थी. हम बात कर रहे हैं बलिया के ऐतिहासिक ‘कोरंटाडीह डाक बंगले’ की. करीब 207 साल पुराना यह बंगला सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि अंग्रेजों की ऐयाशी, लगान वसूली के जुल्म और बलिया के सिद्ध संतों के आध्यात्मिक चमत्कार का मूक गवाह है. आइए, इतिहास की परतों को उधेड़ते हैं और जानते हैं कि कैसे इस बंगले में कैद हुए एक संत ने पूरी ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला दी थीं.













