जमशेदपुर के जोंद्रघोड़ा गांव में सोहराय पेंटिंग की परंपरा आज भी जीवंत है. आधुनिकता के बावजूद ग्रामीण अपनी दीवारों को मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से सजाते हैं. यह कला जल, जंगल और जमीन से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है. पशुधन और प्रकृति को समर्पित यह पारंपरिक चित्रकारी आदिवासी समाज की असली पहचान बनी हुई है.
जमशेदपुर के जोंद्रघोड़ा गांव में सोहराय पेंटिंग की परंपरा आज भी जीवंत है. आधुनिकता के बावजूद ग्रामीण अपनी दीवारों को मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से सजाते हैं. यह कला जल, जंगल और जमीन से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है. पशुधन और प्रकृति को समर्पित यह पारंपरिक चित्रकारी आदिवासी समाज की असली पहचान बनी हुई है.












