Success Story: रांची की पूनम देवी ने अपने हुनर और मेहनत से नमकीन और पापड़ के कारोबार में एक नई इबारत लिख दी है. पिछले 20 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय पूनम आज ‘पापड़ वाली दीदी’ के नाम से मशहूर हैं. उनका ‘ईगल ब्रांड’ अब ‘पापड़ों का बाप’ टैगलाइन के साथ झारखंड के कई जिलों में अपनी पहचान बना चुका है. पूनम के पास पापड़ की 20 और नमकीन की 150 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं. उनकी खासियत जैन समाज और व्रत रखने वालों के लिए बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक से तैयार खास उत्पाद हैं. आज उनका सालाना टर्नओवर लाखों में है और वे अपने साथ 10 से 12 अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं. शुरुआती दौर में तानों का सामना करने वाली पूनम के लिए आज उनका परिवार और बच्चे सबसे बड़ी प्रेरणा हैं. त्योहारों के सीजन में उनके उत्पादों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि दूसरे जिलों से भी थोक ऑर्डर मिलते हैं. पूनम की यह कहानी साबित करती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी ब्रांड बन सकता है.
Success Story: रांची की पूनम देवी ने अपने हुनर और मेहनत से नमकीन और पापड़ के कारोबार में एक नई इबारत लिख दी है. पिछले 20 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय पूनम आज ‘पापड़ वाली दीदी’ के नाम से मशहूर हैं. उनका ‘ईगल ब्रांड’ अब ‘पापड़ों का बाप’ टैगलाइन के साथ झारखंड के कई जिलों में अपनी पहचान बना चुका है. पूनम के पास पापड़ की 20 और नमकीन की 150 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं. उनकी खासियत जैन समाज और व्रत रखने वालों के लिए बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक से तैयार खास उत्पाद हैं. आज उनका सालाना टर्नओवर लाखों में है और वे अपने साथ 10 से 12 अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं. शुरुआती दौर में तानों का सामना करने वाली पूनम के लिए आज उनका परिवार और बच्चे सबसे बड़ी प्रेरणा हैं. त्योहारों के सीजन में उनके उत्पादों की मांग इतनी बढ़ जाती है कि दूसरे जिलों से भी थोक ऑर्डर मिलते हैं. पूनम की यह कहानी साबित करती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी ब्रांड बन सकता है.


