लखनऊ। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के निदेशक Vishal Singh इन दिनों प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। विभागीय कार्यशैली, संपत्ति विवरण और विभागीय समन्वय को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) में दर्ज चल-अचल संपत्ति के विवरण के अनुसार उनके नाम पर कई मूल्यवान संपत्तियाँ दर्ज हैं।






सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2015 बैच के प्रमोटी आईएएस अधिकारी विशाल सिंह पहले पीसीएस सेवा में रहते हुए कई महत्वपूर्ण जिलों में जिम्मेदार पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2021 में आईएएस कैडर में प्रोन्नति मिलने के बाद उन्हें अयोध्या में नगर आयुक्त एवं विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ मिलीं। इसके बाद 21 अप्रैल 2024 को उन्हें सूचना विभाग के निदेशक पद पर नियुक्त किया गया।
संपत्ति विवरण में नोएडा और वाराणसी में फ्लैट, वाराणसी तथा जौनपुर में पैतृक भूमि सहित कई अचल संपत्तियों का उल्लेख दर्ज है। वर्ष 2025 के अभिलेखों में वाराणसी क्षेत्र में परिवार की ओर से प्राप्त उपहार स्वरूप भूमि का भी उल्लेख किया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार उनकी माता Vidya Singh तथा भाई Rahul Singh द्वारा भूमि हस्तांतरण किया गया।
इसके अतिरिक्त Sant Atulanand Residential Academy से उनके जुड़ाव को लेकर भी चर्चा है, जहाँ उन्हें मेंटर के रूप में देखा जाता है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि सूचना विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान सरकार और मीडिया के बीच अपेक्षित समन्वय मजबूत नहीं हो सका। कुछ पत्रकारों का आरोप है कि संवाद व्यवस्था सीमित रही और विभागीय पहुंच चुनिंदा संस्थानों तक केंद्रित दिखाई दी।
इसी बीच एक निजी व्यक्ति Vineet Pathak की सक्रिय भूमिका भी चर्चा में रही है। सूत्रों के अनुसार विभागीय गतिविधियों में उनकी उपस्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं, हालांकि इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया एवं पीआर एजेंसियों के चयन में कई बार टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने और पुनः शुरू होने को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा बनी रही।
समाचार में उल्लेखित तथ्यों पर प्रतिक्रिया के लिए सूचना निदेशक तथा अपर मुख्य सचिव सूचना Sanjay Prasad से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उत्तर प्राप्त नहीं हो सका।
(नोट: यह खबर सोशल मीडिया स्रोतों के आधार पर है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।)

