Real estate property Affordable houses in Budget: बजट 2026-27 ने रियल एस्टेट सेक्टर को एक बार फिर स्थिरता और विकास का भरोसा दिया है. खास बात यह है कि इस बार बजट में सरकार का फोकस सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों को विकास की मुख्यधारा में लाने की स्पष्ट कोशिश दिखाई दी है. इंफ्रास्ट्रक्चर, किफायती आवास, शहरी विस्तार और रोजगार पैदा करने से जुड़े प्रावधानों ने इन उभरते शहरों में रियल एस्टेट की संभावनाओं को और मजबूत किया है. हालांकि सबसे बेहतर छोटे शहरों को पुणे, बेंगलुरु, मैसूर, चंडीगढ़ आदि शहरों की तरह जलवायु अनुकूल शहरों के रूप में विकसित करने की पहल है.
विशेषज्ञों की मानें तो इस बार सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स पार्क, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और शहरी कनेक्टिविटी पर बढ़े हुए आवंटन का सीधा फायदा टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलने जा रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी से इन शहरों में न केवल औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि आवासीय और कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग भी तेज होगी.अब निवेशक और होमबायर्स बड़े शहरों के विकल्प के तौर पर इन उभरते शहरों की ओर रुख करेंगे.
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के फेलो डॉ. विश्वास चितले कहते हैं कि 12.2 लाख करोड़ रुपये के बढ़े हुए आवंटन के साथ, यह बजट टियर-2 और टियर-3 शहरों के बुनियादी ढांचे के विकास को बहुत अधिक मजबूती देता है. इससे ऐसे जलवायु-अनुकूल (climate resilient) शहरों को बनाने में मदद मिलेगी, जो आर्थिक विकास के केंद्र भी होंगे.’
चितले आगे कहते हैं कि 16वें वित्त आयोग के अनुसार, 2026-31 के लिए ‘आपदा जोखिम प्रबंधन कोष’ (DRMF) के लिए 2.04 लाख करोड़ रुपये की सिफारिश की गई है, जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 28 प्रतिशत ज्यादा है. सीईईडब्ल्यू का शोध बताता है कि भारत के 60 प्रतिशत जिलों में रहने वाली लगभग दो-तिहाई आबादी अत्यधिक गर्मी (extreme heat) के जोखिम का सामना करती है. 16वें वित्त आयोग में ‘हीटवेव’ (लू) और ‘आकाशीय बिजली’ (lightning) को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं में शामिल करना, गर्मी से बचाव की क्षमता (हीट-रेजिलिएंस) की दिशा में भारत के प्रयासों की एक बड़ी जीत है.
किफायती आवास को मिलेगी नई रफ्तार
बजट में सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़ी योजनाओं को जारी रखने और आसान फाइनेंसिंग पर जोर दिया है इससे छोटे शहरों में घर खरीदना और आसान होगा. टियर-2 और टियर-3 शहरों में जमीन की लागत अपेक्षाकृत कम होने के कारण डेवलपर्स को भी किफायती प्रोजेक्ट लॉन्च करने में मदद मिलेगी. इससे मिडिल क्लास और पहली बार घर खरीदने वालों के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे.
रोजगार के अवसर बढ़ने से हाउसिंग डिमांड में उछाल
बजट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के ऐलान से छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. जब रोजगार स्थानीय स्तर पर बढ़ेगा तो लोगों का पलायन मेट्रो शहरों की ओर कम होगा और स्थानीय हाउसिंग डिमांड मजबूत होगी. इसका सीधा असर रेजिडेंशियल और रेंटल हाउसिंग सेगमेंट पर पड़ेगा.
शहरी विकास योजनाओं से बदलेगा शहरों का स्वरूप
स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार से टियर-2 और टियर-3 शहरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. बेहतर सीवरेज, पानी, सड़क, स्ट्रीट लाइट और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं रियल एस्टेट के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही हैं. बजट के जरिए इन योजनाओं को निरंतरता मिलने से रियल एस्टेट सेक्टर को दीर्घकालिक फायदा मिलने की उम्मीद है.
डेवलपर्स और निवेशकों का बढ़ता भरोसा
बजट के बाद डेवलपर्स और निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना है. स्थिर नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और छोटे शहरों को विकास की धुरी बनाने की सोच ने रियल एस्टेट सेक्टर में नया भरोसा पैदा किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में टियर-2 और टियर-3 शहर रियल एस्टेट ग्रोथ के नए इंजन साबित होंगे.
क्या कहते हैं रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स
भूमिका ग्रुप के सीएमडी, उद्धव पोद्दार का कहना है कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार ध्यान देना, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, रियल एस्टेट के लिए अच्छा संकेत है. सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से बड़े शहरों और उभरते शहरों के बीच आना-जाना आसान होगा. इससे इन रास्तों के आसपास नए घर और कमर्शियल प्रोजेक्ट विकसित होने के मौके बढ़ेंगे. कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उपकरणों को बेहतर बनाने की योजना से काम तेजी से होगा, प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे और डिलीवरी ज्यादा भरोसेमंद बनेगी. FY27 के लिए सरकार ने पब्लिक खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जिसका असर सड़कों, बिजली-पानी और शहरी सुविधाओं पर दिखेगा.
गुलशन ग्रुप के डायरेक्टर, दीपक कपूर कहते हैं कि यह बजट रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा और भरोसेमंद माहौल बनाता है. सरकार का पूरा ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर है, जिससे रियल एस्टेट को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने और शहरों के विकास पर जोर देने से घर और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स दोनों के लिए नए मौके बनेंगे. साथ ही, शहरी सुविधाओं के लिए ज्यादा पैसा और राज्यों को अधिक संसाधन मिलने से टियर-2 और टियर-3 शहरों में तेजी आएगी.
प्रखर अग्रवाल, निदेशक, रामा ग्रुप कहते हैं कि वित्त मंत्री का टियर-1 और टियर-2 शहरों में विकास को प्राथमिकता देना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्वागतयोग्य है. सड़कों, रेलवे और शहरी सुविधाओं जैसी बुनियादी ढांचा निवेश से उभरते शहरों में संगठित आवासीय और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स के लिए नए अवसर खुलेंगे.
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि यूनियन बजट 2026 टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को लेकर मजबूत कदम है, क्योंकि यही शहर आगे चलकर शहरी और कमर्शियल ग्रोथ की अगली लहर बनेंगे. बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स से ये बाजार संगठित कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा मजबूत बनेंगे.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल कहते हैं कि केंद्रीय बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट मॉनेटाइजेशन पर दिया गया जोर रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) को बढ़ावा मिलने से डेवलपर्स को तैयार और आय-उत्पादक परिसंपत्तियों से पूंजी जुटाने का अवसर मिलेगा, जिससे नई आवासीय और कमर्शियल परियोजनाओं को गति मिलेगी.


