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Petrol Rate : पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग होती हैं. शहरों, गांवों और हाईवे पर बने पंपों के कमीशन में भी फर्क होता है.
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने हाल ही में भारत में भी हलचल पैदा कर दी. सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह अफवाह फैलने लगी कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण देश में पेट्रोल-डीजल की कमी हो सकती है. कई लोगों ने इसे सच मान लिया और पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ने लगी. खासतौर पर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पंपों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाने लगे. इससे कुछ जगहों पर ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति भी बन गई.

दरअसल, जब इस तरह की अफवाहें फैलती हैं तो लोग घबराकर ज्यादा मात्रा में फ्यूल खरीदने लगते हैं. इससे वास्तविक कमी न होते हुए भी आर्टिफिशियल कमी का माहौल बन सकता है. यही वजह है कि कई जगह पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई. हालांकि तेल कंपनियों या सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति में किसी तरह की कमी की पुष्टि नहीं की गई थी.

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोल-डीजल की मांग अचानक कम हो गई है. आज भी देश की बड़ी आबादी पेट्रोल और डीजल पर ही निर्भर है. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें समय-समय पर ऊपर-नीचे होती रहती हैं. इन उतार-चढ़ाव का असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दिखाई देता है.
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भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि उस पर लगने वाले टैक्स भी अहम भूमिका निभाते हैं. पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग टैक्स लगाती हैं. इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में फर्क दिखाई देता है. कहीं यह कीमत लगभग 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास होती है तो कहीं 108 रुपये या उससे भी ज्यादा हो जाती है.

पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता. जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ता है. इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आम आदमी की जेब से सीधे जुड़ा हुआ माना जाता है. लेकिन इसी चर्चा के बीच एक सवाल अक्सर उठता है कि आखिर पेट्रोल पंप मालिकों को एक लीटर पेट्रोल बेचने पर कितना फायदा मिलता है?

सरकारी एजेंसी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार 1 दिसंबर 2024 से पेट्रोल पंप डीलरों का कमीशन तय किया गया है. इसके तहत पेट्रोल पर लगभग ₹3,144.03 प्रति किलोलीटर और डीजल पर ₹2,332.51 प्रति किलोलीटर का बेस कमीशन मिलता है, साथ ही उत्पाद की कीमत का एक छोटा प्रतिशत हिस्सा भी जोड़ा जाता है. अगर इसे प्रति लीटर में समझें तो पेट्रोल पर करीब ₹3.14 और डीजल पर लगभग ₹2.33 का बेस कमीशन बनता है, जिसके ऊपर प्रतिशत हिस्सा अलग से जुड़ता है.

पेट्रोल पंप डीलरों का यह कमीशन समय-समय पर बढ़ता रहा है. शुरुआती दौर में यह राशि काफी कम थी, लेकिन वर्षों में धीरे-धीरे इसमें वृद्धि हुई. अक्टूबर 2024 में लगभग आठ साल बाद कमीशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई थी. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की थी. दिलचस्प बात यह रही कि इस बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया और खुदरा कीमतों में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं की गई.

कमीशन के अलावा पेट्रोल पंप डीलरों को कुछ अन्य मदों से भी आय होती है. इनमें लाइसेंस फीस रिकवरी (LFR) और कुछ प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं, जो बिक्री के स्तर और पंप के प्रकार पर निर्भर करती हैं. शहर, गांव या हाईवे पर स्थित पंपों की बिक्री अलग-अलग होती है, इसलिए वास्तविक कमाई भी उसी हिसाब से बदलती है. आम तौर पर किसी पेट्रोल पंप पर फ्यूल बिक्री से प्रतिदिन लगभग 15,000 से 60,000 रुपये तक का कमीशन हो सकता है, हालांकि यह पूरी तरह बिक्री की मात्रा और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है.


