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Pearl Harbor Ka Hamla Kya Tha: Pearl Harbor Attack History News | Pearl Harbor Latest News- पर्ल हार्बर का हमला क्या था साने तकाइची की खबर

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Published On: March 20, 2026

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होमदुनियाअमेरिका

पर्ल हार्बर हमला क्या था? ट्रंप ने जापानी PM के सामने किया जिक्र, छा गई खामोशी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों को गुप्त रखने का बचाव करते हुए पर्ल हार्बर का जिक्र किया, जिससे जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची असहज हो गईं. इस बयान ने माहौल बदल दिया. इसके बाद पर्ल हार्बर हमले की चर्चा फिर तेज हो गई, जिसमें जापान ने 1941 में अमेरिका पर अचानक हमला कर भारी नुकसान पहुंचाया था.

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पर्ल हार्बर पर हमला (फाइल फोटो).

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों को गुप्त रखने के फैसले का बचाव किया, लेकिन इस दौरान उनका एक बयान माहौल असहज कर गया. व्हाइट हाउस में जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे पूछा गया कि सहयोगी देशों को ईरान पर हमले की पहले जानकारी क्यों नहीं दी गई. ट्रंप ने कहा कि ज्यादा संकेत देना सही नहीं होता और अमेरिका ने दुश्मन को चौंकाने के लिए यह फैसला लिया. इसी दौरान उन्होंने 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है.’ रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुनते ही ताकाइची असहज हो गईं. उनकी मुस्कान गायब हो गई और वह पीछे की ओर झुक गईं. अब सवाल उठता है कि आखिर पर्ल हार्बर क्या था, जिसका जिक्र ट्रंप कर रहे थे?

अमेरिका का पर्ल हार्बर क्या था?

दूसरे विश्वयुद्ध (1939-1945) के दौरान जापान एशिया में अपना विस्तार कर रहा था. 1940-41 तक वह वियतनाम तक पहुंच गया. अमेरिका ने जापान को रोकने के लिए तेल का निर्यात बंद कर दिया. जापान को 70-80 फीसदी तेल अमेरिका से मिलता था. इस ऑयल इंबार्गो के कारण उसकी सेना और अर्थव्यवस्था ठप होने लगी. जापान ने तब सोचा कि अगर वह अमेरिका के हवाई में मौजूद उसकी पैसिफिक फ्लीट को नष्ट कर दे तो अमेरिका छह महीने से लगभग 1 साल तक कुछ नहीं कर सकेगा. यही पर्ल हार्बर बंदरगाह था. जापान का प्लान था कि हमला होने के बाद तक वह एशिया में तेल, रबर, टिन पर कब्जा कर लेगा. यही वह हमला था, जिसके बाद अमेरिका ने जापान पर न्यूक्लियर अटैक किया था.

जापान ने पर्ल हार्बर हमले का प्लान कैसे रचा?

पर्ल हार्बर सच में अमेरिका के लिए एक सरप्राइज अटैक था. यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं था, बल्कि बेहद सोच-समझकर रचा गया ‘हाई रिस्क, हाई इम्पैक्ट’ मिशन था, जिसमें जापान ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. इस हमले का लक्ष्य था कि एक ही झटके में अमेरिका की पैसिफिक नेवी को खत्म कर दिया जाए. जापान इसमें कामयाब भी हुआ, जिस कारण उसका दर्द आज भी अमेरिका को है.

जापान ने कई महीनों तक इसकी सीक्रेट प्लानिंग की. 6 बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को एक साथ ले आया और उसनें 350 से ज्यादा लड़ाकू विमान उड़ान भरने को तैयार किए. सबसे खास बात कि इन विमानों को लंबी दूरी तय करनी थी, जितनी आम तौर पर उनकी क्षमता नहीं थी. यही कारण है कि मिशन बेहद खतरनाक हो गया. जापानी जानते थे कि यह मिशन बेहद घातक होगा और यहां से जाने वाले कई विमान वापसी नहीं कर पाएंगे. इसलिए इसे आत्मघाती मिशन में बदला गया.

पर्ल हार्बर पर हमला कैसे अंजाम दिया गया?

  • अटैक की पहली लहर: हमले का सबसे बड़ा हथियार था सरप्राइज अटैक. 7 दिसंबर 1941 को जापान के छह एयरक्राफ्ट कैरियर हाजारों किमी का सफर तय करके हवाई द्वीप के उत्तर में 440 किमी की दूरी पर थे. हमले के लिए जापान के विमान दो खेप में उड़े. पहले 183 विमान उड़े. सुबह 7:48 बजे पहला हमला किया गया. ये विमान कई तरह के टॉरपीडो से लैस थे. ये विमान 30-50 फीट ऊंचाई पर उड़ रहे थे. इन्होंने टॉरपीडो पानी में गिराना शुरू किया. इस हमले के बाद USS एरिजोना, ओक्लाहोमा, वेस्ट वर्जीनिया, कैलिफोर्निया जहाज हिट हुए. ओक्लाहोमा पर 4-5 टॉरपीडो लगे और वह पलट गया. इसमें सैकड़ों नाविक फंस गए. वहीं वेस्ट वर्जीनिया पर 7 टॉरपीडो लगे और वह डूबने लगा. 13 टॉरपीडो सिर्फ बैटलशिप्स को लगे. रनवे को नीचे उड़कर गोलियों से तबाह किया गया. USS एरिजोना पर 800 किग्रा का बम गिराया गया, जिससे जहाज डूब गया और 1177 मौतें हुईं.
  • अटैक की दूसरी लहर: जापान ने दूसरा हमला सुबह 8:55 पर हुआ. 171 विमानों से यह हमला हुआ. बचे हुए जहाजों और ड्राई डॉक पर अटैक को अंजाम दिया गया. वहीं 188 अमेरिकी प्लेन को नष्ट कर दिया. 159 को क्षतिग्रस्त किया.

जापान को कितना नुकसान हुआ

एक दावा किया जाता है कि जापान ने जिन विमानों को भेजा उसमें इतना ही ईंधन भरा गया, जिससे वह हमला कर सकें और खुद आत्मघाती बनकर अटैक करें. लेकिन ऐसा नहीं है. जापानी विमानों में भरपूर तेल था. थोड़ा ज्यादा ही रखा गया. हालांकि कामिकाजे विमान जो आत्मघाती मिशन के लिए इस्तेमाल होते थे, उनमें कम तेल भरा जाता था, क्योंकि वे जान-बूझकर दुश्मनों के जहाज से टकरा जाते थे. जहाज के साथ वह खुद को भी ख्त्म करते थे. यह 1944-45 के बीच शुरू हुआ. हालांकि जापान को तेल की कमी थी, इसलिए उसके कैरियर नागुमो ने तीसरी लहर का हमला रद्द कर दिया. इस हमले के बाद जापान के 353 विमानों में 324 विमान वापस सुरक्षित लौट आए. जापान के 29 विमान गोलीबारी में क्रैश हुए.

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें

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