Vrindavan-Ayodhya Property News: यूपी के धार्मिक शहर अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और वाराणसी में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी हैं. जो कीमतें एक टू बीएचके फ्लैट की गुड़गांव-नोएडा में हैं लगभग उसी कीमत पर और उससे ज्यादा कीमत पर इन धार्मिक शहरों में खरीदे-बेचे जा रहे हैं. इन शहरों तक पहुंच के लिए बने एक्सप्रेसवे, बेहतर सड़क, एयरपोर्ट, होटल और यात्री सुविधाओं के विस्तार ने इन शहरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ा दिया है, लेकिन आपको जानकर अचंभा होगा कि इन शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भले ही आग लग गई है लेकिन यहां लोग सिर्फ घर खरीदने के लिए उतावले नहीं हो रहे हैं, बल्कि उनकी नजर कुछ और चीजों पर भी है.
अयोध्या में बदली रियल एस्टेट की तस्वीर
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 के पहले छह महीनों में करीब 23 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक अयोध्या पहुंचे, जो पहले के मुकाबले कई गुना अधिक है. हर दिन बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. बजट में भी अयोध्या के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वहीं श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये अलग से दिए जाएंगे.
देखा जा रहा है कि अयोध्या में पर्यटन बढ़ने के साथ होटल, गेस्ट हाउस, रिटेल और आवासीय परियोजनाओं की मांग तेजी से बढ़ी है. ऐसे में रियल एस्टेट में सबसे ज्यादा डिमांड यहां कॉमर्शियल स्पेस की देखी गई है. लोग घर और फ्लैट खरीदने के बजाय दुकान, होटल-रेस्टोरेंट-गैस्टहाउस, सर्विस अपार्टमेंट और कमर्शियल स्पेस के लिए प्लॉट खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इन्हीं वजहों से मंदिर के आसपास संपत्ति की कीमतों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि शहर के बाहरी इलाकों में भी जमीन के दाम तेजी से बढ़े हैं.
धार्मिक शहरों के विकास पर सरकार का भी फोकस
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर ध्यान दे रही है. हाल ही में पेश किए गए बजट में भी धार्मिक शहरों के विकास को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई थीं, जिनमें अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और वाराणसी जैसे शहरों में पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कही गई थी. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी धार्मिक शहर में सड़क, एयरपोर्ट, होटल और शहरी सुविधाएं बेहतर होती हैं, तो वहां पर्यटन के साथ-साथ रियल एस्टेट बाजार को कई मुहानों पर मजबूती मिलती है. यह मांग उसी का एक चेहरा है.
ओमैक्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल कहते हैं कि अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक शहरों में तेजी से बढ़ रहा धार्मिक पर्यटन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नए अवसर की तरह है. पिछले दो साल से राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होने के बाद खुद ओमैक्स ने देखा है कि होटल, रिटेल, कमर्शियल स्पेस और आवासीय परियोजनाओं की मांग तेजी से बढ़ गई है. इसमें कॉमर्शियल की मांग और भी ज्यादा है. इसके अलावा यहां स्थायी पर्यटन की संभावनाएं निवेशकों और डेवलपर्स दोनों की दिलचस्पी भी बढ़ा रही हैं.
एसोटेक रियल्टी के एमडी नीरज गुलाटी का कहना है कि देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक शहर अब केवल तीर्थ यात्रा तक सीमित नहीं रह गए हैं. बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन सुविधाओं और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के कारण इन शहरों में निवेश का माहौल मजबूत हो रहा है. जब किसी शहर में पर्यटन लगातार बढ़ता है और सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देती है, तो वहां हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट तीनों क्षेत्रों में नई संभावनाएं बनती हैं.
मथुरा-वृंदावन ब्रज क्षेत्र में दोनों चीजों की मांग
श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा और आसपास के ब्रज क्षेत्र में भी धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ रियल एस्टेट गतिविधियां तेज हुई हैं. वृंदावन, बरसाना, गोवर्धन और छटीकरा-राल रोड जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नई आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं विकसित हो रही हैं. हालांकि यहां क्लस्टर्स बन गए हैं. जैसे कहीं कॉमर्शियल क्लस्टर तो कहीं रेजिडेंशियल.
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में यहां जमीन या घर खरीदने की इच्छा भी बढ़ रही है. वहीं यहां के फुटफॉल को भुनाने के लिए लोग दुकानें, कॉमर्शियल स्पेस में निवेश के लिए आगे बढ़ रहे हैं.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में आस्था के साथ-साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास निवेशकों को आकर्षित कर रहा है.यहां मिड-सेगमेंट हाउसिंग, विला और सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकती है, वहीं अभी यहां पर्यटकों की संख्या को भुनाने के लिए प्लॉट और कॉमर्शियल जगह की मांग काफी ऊंची है.
जमीन की कीमतों में तेज उछाल
बढ़ती मांग का असर जमीन की कीमतों पर भी साफ दिख रहा है. खासकर वृंदावन और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में भूमि के दाम कई गुना तक बढ़ गए हैं. धार्मिक परियोजनाओं और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के कारण पूरे ब्रज क्षेत्र में रियल एस्टेट गतिविधियां तेज हो गई हैं.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि धार्मिक शहरों में विकास और पर्यटन का संयोजन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा कर रहा है. जब किसी शहर में पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर साथ-साथ बढ़ते हैं, तो वहां आवासीय और कमर्शियल दोनों तरह की संपत्तियों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है.
वाराणसी और विंध्य क्षेत्र में भी बढ़ रहा पर्यटन
अयोध्या और मथुरा-वृंदावन के साथ-साथ वाराणसी और विंध्य क्षेत्र में भी धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. घाटों के विकास, बेहतर यात्री सुविधाओं और कनेक्टिविटी में सुधार के कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वाराणसी में पर्यटक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वहीं मिर्जापुर के त्रिकोणीय क्षेत्र, मां विध्यवासिनी, अष्टभुजा और काली खोह मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये और विंध्यवासिनी धाम में सुविधाओं के विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का यह मेल इन शहरों को नए आर्थिक केंद्रों में बदल रहा है. पर्यटन, रोजगार और निवेश के बढ़ते अवसरों के साथ अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और वाराणसी आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं.


