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न्यूयॉर्क के लागार्डिया एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक हादसे में एयर कनाडा का CRJ-900LR प्लेन एक फायर ट्रक से टकरा गया. इस टक्कर में जहां प्लेन का कॉकपिट पूरी तरह तबाह हो गया, वहीं फायर ट्रक कबाड़ में बदल गया. ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी ऊंचाई पर होने के बावजूद प्लेन का कॉकपिट कैसे तबाह हो गया.
न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एयर कनाडा के प्लेन की टक्कर रोल आउट के दौरान फायर ट्रक से हो गई है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार रात करीब 8 बजे मॉन्ट्रियल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली एयर कनाडा एक्सप्रेस की फ्लाइट AC8646 न्यूयॉर्क पहुंची थी. लगभग 11:37 बजे इस फ्लाइट ने लागार्डिया एयरपोर्ट के रनवे 4 पर सुरक्षित लैंडिंग की. यहां तक सब कुछ ठीक था. प्लेन रनवे पर 39 किमी/घंटा की रफ्तार से रोलआउट कर रहा था, तभी एयरपोर्ट का एक एयरक्राफ्ट रेस्क्यू फायर फाइटिंग ट्रक एक अन्य इमरजेंसी के लिए रनवे पार कर रहा था. रनवे पर प्लेन होने के बावजूद इस फायर ट्रक को एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरफ से क्लियरेंस दी गई थी. अचानक दोनों आमने सामने आ गए. अंतिम पलों में एटीसी ने स्टॉप! स्टॉप! स्टॉप! की चेतावनी दी, बावजूद इसके हादसा टाला नहीं जा सका. प्लेन का अगला हिस्सा सीधे फायर ट्रक से टकरा गया.
कैसे पूरी तरह से खत्म हो गया प्लेन का कॉकपिट
- एयर इंडिया एमआरओ से जुड़े रहे सीनियर इंजीनियर के अनुसार, हादसे का शिकार हुआ प्लेन CRJ-900LR मेक का था. इसकी कुल ऊंचाई लगभग 7.5 मीटर है, जबकि एक एयरपोर्ट फायर ट्रक की ऊंचाई करीब 3 से 3.5 मीटर होती है. पहली नजर में यह अंतर इतना बड़ा लगता है कि दोनों के बीच सीधी टक्कर में कॉकपिट को नुकसान नहीं होना चाहिए.
- लेकिन यहां सबसे बड़ा कंफ्यूजन कुल ऊंचाई को लेकर है. प्लेन की ऊंचाई का बड़ा हिस्सा उसकी टेल में होता है, न कि उसके आगे के हिस्से में. सीआरजे-900 के कॉकपिट की बात करें तो यह जमीन से लगभग 3.5 से 4 मीटर की ऊंचाई पर होता है, जो फायर ट्रक की ऊंचाई के लगभग बराबर है.
- यानी, टक्कर दो असमान ऊंचाई वाले ऑब्जेक्ट्स के बीच नहीं, बल्कि लगभग एक ही स्तर पर हुई. यही वजह है कि फायर ट्रक सीधे कॉकपिट से टकराया और सबसे ज्यादा नुकसान उसी हिस्से में हुआ.
- कॉकपिट के पूरी तरह से खत्म होने की एक वजह उसकी डिजाइन भी है. दरअसल, प्लेन का कॉकपिट तकनीकी रूप से बेहद जटिल होता है, लेकिन इसका स्ट्रक्चर कई वजहों से बहुत भारी नहीं बनाया जाता है. अहम वजहों में वजन कम रखना, फ्यूल एफिशिएंसी और एरोडायनामिक्स शामिल हैं.
- वहीं, इसके विपरीत, एयरपोर्ट फायर ट्रक एक अत्यंत भारी और मजबूत वाहन होता है. इसका फ्रेम मोटे स्टील से बना होता है और इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यह मुश्किल हालात में भी टिका रह सके. इसका वजन 30 से 40 टन तक हो सकता है.
- जब ऐसा भारी और ठोस वाहन एक अपेक्षाकृत हल्के और नाजुक हिस्से से टकराता है, तो परिणाम लगभग तय है. कुछ ऐसा ही न्यूयॉर्क के लागार्डिया एयरपोर्ट पर हुआ. इस हादसे में अभी तक फायर ट्रक की स्पीड का खुलासा नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि इमरजेंसी के चलते फायर ट्रक की स्पीड अधिक हो सकती है.
स्पीड कम होने के बावजूद नुकसान इतना ज्यादा क्यों हुआ?
एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स के अनुसार, 39 किमी/घंटा की गति सुनने में बहुत ज्यादा नहीं लगती, खासकर जब हम एयरक्राफ्ट की बात करते हैं. लेकिन ग्राउंड कोलिजन में सिर्फ स्पीड नहीं, बल्कि मोमेंटम और मास ज्यादा अहम होते हैं. यहां दो भारी ऑब्जेक्ट्स प्लेन और फायर ट्रक आपस में टकराए हैं. दोनों का ज्वाइंट मास इतना ज्यादा था कि कम स्पीड के बावजूद टक्कर का प्रभाव अत्यधिक हो गया.
क्या टक्कर का एंगल बन गया बड़े हादसे की वजह?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस हादसे में टक्कर सीधी हेड-ऑन नहीं थी, बल्कि थोड़ा तिरछे एंगल पर हुई. यह सुनने में मामूली बात लग सकती है, लेकिन फिजिक्स के लिहाज से इसका बड़ा असर होता है. तिरछी टक्कर में फोर्स एक छोटे क्षेत्र पर केंद्रित हो जाता है, जिससे उस हिस्से पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. यदि टक्कर सीधी होती, तो एनर्जी थोड़े बड़े क्षेत्र में फैल सकती थी. लेकिन यहां फोर्स कॉकपिट के एक सीमित हिस्से पर केंद्रित हुई, जिससे वह पूरी तरह नष्ट हो गया.
यदि यही टक्कर बोइंग के 787 और एयरबस के ए320 से होती तो क्या होता?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर यही टक्कर एयरबस ए320 या बोइंग 787 जैसे बड़े प्लेन्स के साथ होती, तो नतीजे कुछ अलग हो सकते थे. इसका कारण उनकी अधिक ऊंचाई और अलग डिजाइन है. ए320 की ऊंचाई लगभग 11.8 मीटर और बोइंग 787 की करीब 17 मीटर होती है. इन प्लेन्स में कॉकपिट जमीन से काफी ऊंचाई पर होता है. ऐसे में फायर ट्रक जैसी गाड़ी सीधे कॉकपिट से टकराने की स्थिति में नहीं आती. इसके उलट, CRJ-900LR एक रीजनल जेट है, जिसे छोटे एयरपोर्ट्स और कम दूरी की उड़ानों के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी संरचना कॉम्पैक्ट होती है और कॉकपिट जमीन के अपेक्षाकृत करीब होता है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें


