वक्ताओं ने कहा— कांशीराम साहब ने समाज को अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया, सामाजिक न्याय की लड़ाई को दी नई दिशा
Kanshi Ram के जन्मदिवस के अवसर पर Keval, Sonbhadra तथा Mednikhad, Sonbhadra में बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और सामाजिक एकजुटता के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, युवाओं, महिलाओं तथा ग्रामीणों ने भाग लेकर मान्यवर कांशीराम जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह सामाजिक जागरूकता, सम्मान और प्रेरणा से भरा रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत मान्यवर कांशीराम जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि कांशीराम साहब केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन के महानायक थे, जिन्होंने देश के दलित, पिछड़े, शोषित एवं वंचित वर्ग को राजनीतिक चेतना प्रदान की। वक्ताओं ने कहा कि जिस समय समाज का एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं था, उस समय कांशीराम जी ने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना सिखाया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज यदि समाज का दबा-कुचला वर्ग लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर पा रहा है, तो उसमें कांशीराम जी के संघर्ष और दूरदर्शिता की बड़ी भूमिका है। उन्होंने सामाजिक न्याय को केवल नारा नहीं बनाया, बल्कि उसे जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। उनके संघर्षों का परिणाम है कि आज समाज के अनेक वर्ग शिक्षा, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व में आगे बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि कांशीराम साहब ने समाज को यह समझाया कि अधिकार मांगने से नहीं, बल्कि संगठित होकर संघर्ष करने से मिलते हैं। उन्होंने बहुजन समाज को आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा दी। उनके विचार आज भी नई पीढ़ी को ऊर्जा देते हैं। युवाओं ने विशेष रूप से कहा कि कांशीराम जी की सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके जीवनकाल में थी।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने लोगों को जाति, भेदभाव और सामाजिक असमानता के विरुद्ध जागरूक किया। इसी का परिणाम है कि आज समाज का हर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग दिखाई देता है।
Keval, Sonbhadra में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब सभी लोग मिलकर शिक्षा, संगठन और संघर्ष के रास्ते पर चलेंगे। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी करते हुए कांशीराम जी के विचारों को सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला बताया।
इसी क्रम में Mednikhad, Sonbhadra में भी जन्मदिवस समारोह बड़े धूमधाम से मनाया गया। यहां भी लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि कांशीराम साहब ने समाज को यह बताया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल होगा। उनके संघर्षों से प्रेरित होकर आज भी लाखों लोग सामाजिक न्याय के लिए कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम में युवाओं ने उनके विचारों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज की नई पीढ़ी को केवल इतिहास जानना ही नहीं, बल्कि उन महापुरुषों के संघर्षों को समझना भी जरूरी है जिन्होंने समाज को दिशा दी। कांशीराम जी का जीवन संघर्ष, त्याग और सामाजिक समर्पण का प्रतीक है। उनके विचार समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
उपस्थित लोगों ने कहा कि “धन्य हो कांशीराम साहब, राजनीति में आपने ही हमें उबारा है और हक के लिए लड़ना सिखाया है” केवल एक भावना नहीं बल्कि उस सामाजिक परिवर्तन की सच्ची अभिव्यक्ति है, जिसे उन्होंने अपने जीवन में स्थापित किया। उनके आदर्शों पर चलकर ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि वे शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठन को मजबूत करेंगे तथा मान्यवर कांशीराम जी के बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता, न्याय और भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाएंगे। समारोह शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण में सम्पन्न हुआ।


