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Iran War | What Trump wants from Iran | Donald Trump stand on Hormuz |  जंग खत्म करने के लिए आखिर ट्रंप को ईरान से क्या चाहिए?

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Published On: April 3, 2026

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आखिर डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से क्या चाहिए? 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ईरान को अमेरिका के लिए खतरा बता रहे थे, फिर ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को भी दुनिया के लिए खतरा बताया. जब जंग अपने चरम पर था, तब उन्होंने होर्मुज को खोलने का दबाव दिया. फिर बात आई ईरान में सत्ता बदलने की. जंग को शुरू हुए महीने भर से अधिक हो गए हैं, अब ट्रंप कह रहे हैं कि दो से तीन हफ्तों में अमेरिका का वहां काम पूरा हो जाएगा. उनकी सेना जल्दी से वहां से घर वापसी करेगी. आखिर ट्रंप को इस जंग से क्या हासिल हुआ और इस एक से दो हफ्तों में उनको क्या चाहिए?

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ईरान से डोनाल्ड ट्रंप क्या चाहते हैं? दो से तीन हफ्तों में क्या करने वाले हैं?

Iran War : अमेरिका और इजरायल ने जब 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा था कि यह युद्ध कितने समय तक चलेगा? फिर जंग के दिन, हफ्ते और महीने गुजर गए, पर इसका अंत तो दिख नहीं रहा. जंग की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के लोगों से सड़कों पर आकर सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की, फिर परमाणु प्रोग्राम को लेकर हो-हल्ला मचाया, फिर जब जंग के चरम पर पहुंचा तब होर्मुज खोलने को लेकर ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट और डिस्टिलेशन सेंटर को उड़ाने की बात कही. लेकिन, उन्होंने बातचीत का रास्ता अख्तियार कर लिया और दावा करने लगे की ईरान हार मानकर उनसे बातचीत करने के लिए राजी हो गया है.

बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकलने के बाद ट्रंप अब फिर से सैन्य कार्रवाई का बात कह रहे हैं. उनका कहना है कि ईरान से उनको जो कुछ चाहिए था सब मिल गया. दो से तीन हफ्तों की बात है, फिर अमेरिकी सेना वहां अपना काम करके निकल आएगी. तो ट्रंप अगले दो से तीन हफ्तों में क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं? क्योंकि ट्रंप ने होर्मुज को लेकर भी अपना एजेंडा क्लियर कर दिया है कि होर्मोज खुलवाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है.

दो से तीन हफ्तों में क्या मिलेगा?

ट्रंप ने मीडिया को संबोधित करते हुए ईरान में सैन्य कार्रवाई का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनकी सेना ईरान में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है. अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर भीषण हमले किए जाएंगे. उन्होंने ईरान को पाषाण युग में वापस धकेलने की धमकी भी दी. हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि उनको जंग से क्या चाहिए? वे जंग से क्या चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने पूरी दुनिया में बढ़ते तेल की कीमतों की बात की. उन्होंने बताया कि जैसे ही अमेरिका ईरान से लौटेगा, पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती हैं. इस बयान के बाद पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई. जंग जारी रहने के आसार देखते हुए अमेरिका सहित एशियाई बाजार भी गिर गए.

ईरान इस जंग में कहां?

एक महीने से जारी इस जंग में ईरान, अमेरिका और इजरायल को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है. अमेरिका के तमाम दावों कि ईरान की परमाणु क्षमता, नौसेना और मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं फिर भी ईरान लगातार पलटवार कर रहा है. ईरान के नेता अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे अमेरिका को आखिरी हद तक पूरी दुनिया के सामने जलील करेंगे. वहीं, ट्रंप के वर्तमान भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नाटो में पूर्व अमेरिकी राजदूत इवो डाल्डर ने कहा कि ट्रंप के उद्देश्यों पर सवाल खड़ा किया है. उनका कहना है कि ट्रंप ने अभी भी कई महत्वपूर्ण सवालों को अनुत्तरित छोड़ दिया है. कुल मिलाकर ट्रंप के भाषण से एक बात तो साफ पता चल रहा है कि युद्ध जारी रहेगा.

ट्रंप का ईगो सेटिस्फाई कर रहे हैं?

इस एक महीने की जंग में ऐसी कई घटनाएं घटी हैं जिनकी डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की होगी. जैसे कि:

  1. ईरान अभी भी जोरदार तरीके से लड़ रहा है और जवाबी कार्रवाई करने की अपनी ताकत बनाए हुए है.
  2. जारी जंग को लेकर अमेरिका और नाटो के बीच मतभेद अब साफ दिख रहे हैं. ट्रंप ने न केवल नाटो गठबंधन को कागजी शेर बता दिया, बल्कि इससे छोड़ने की धमकी भी दी.
  3. ईरान में जनता की प्रतिक्रिया ट्रंप और नेतन्याहू की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही है. दोनों नेताओं ने ईरानी लोगों से सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की थी.
  4. खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करके ईरान ने न केवल उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि इन देशों की सुरक्षित होने की छवि को भी बुरी तरह प्रभावित किया है.
  5. ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से विश्व भर में गंभीर तेल संकट पैदा हो गया है. इसलिए अब कई देश अमेरिका और इजरायल पर युद्ध को जल्द समाप्त करने के लिए दबाव डाल रहे हैं. कुछ देशों ने अमेरिका को अपने ठिकाने देने से इनकार कर दिया है.
  6. अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, स्पेन और कनाडा को मदद ना करने को लेकर जमकर लताड़ा है.
  7. अमेरिका और इज़रायल को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका में भी भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें

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