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Iran US War | Iran Attack on US | Iran Missile Attack-ईरान पर ताबड़तोड़ हमला करके क्या फंस गया अमेरिका? खाली हो रहे हथियार भंडार, रक्षा कवच में भी छेद

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Published On: March 19, 2026

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अमेरिका की तरफ एक बेकाबू परमाणु मिसाइल तेजी से बढ़ी आ रही है. उसे रोकने में ग्राउंड-बेस्ड इंटरसेप्टर फेल हो जाते हैं और फिर अमेरिका के पास तबाही से बचने का कोई ‘प्लान-B’ नहीं बचता. वैसे तो यह दृश्य नेटफ्लिक्स मूवी ए हाउस ऑफ डायनामाइट (A House of Dynamite) में दिखाया गया है, लेकिन यह कहानी महज कल्पना नहीं लगती. पश्चिम एशिया में उड़ती मिसाइलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात तेजी से उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद यह स्वीकार कर चुके हैं कि ईरान के खिलाफ इस युद्ध में आगे और अमेरिकी सैनिक मारे जा सकते हैं. ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़े, तो इसका असर अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंच सकता है.

अमेरिका के खाली होते हथियार भंडार

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना के शीर्ष जनरल ने ईरान पर बड़े और लंबे सैन्य हमले से पहले राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी थी कि इससे अमेरिका के हथियार भंडार पर भारी दबाव पड़ेगा. सबसे बड़ी चिंता एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों को लेकर थी, जिनका इस्तेमाल दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है.

जैसे-जैसे अमेरिका ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को खत्म करने की कोशिश कर रहा है, वैसे-वैसे उसे अपने ठिकानों और सहयोगी देशों की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर भी दागने पड़ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ये मिसाइलें जितनी तेजी से खर्च हो रही हैं, उतनी तेजी से बन नहीं पा रही हैं.

अमेरिका के पास कितने इंटरसेप्टर हैं?

अमेरिकी रक्षा विभाग इस जानकारी को ‘मैगजीन डेप्थ’ कहता है और इसे गोपनीय रखता है. लेकिन अखबार के मुताबिक, ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार टकराव में मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी एयर-डिफेंस सिस्टम पहले ही काफी हद तक इस्तेमाल हो चुके हैं. इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि अगर यह युद्ध लंबा चला, तो अमेरिका कितने समय तक इसे झेल पाएगा.

अमेरिका और इजरायल के हमलों का मकसद क्या है?

शनिवार तड़के तेहरान से शुरू हुए अमेरिकी और इजरायल के हमलों में ईरान के मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन बेस, एयरफील्ड और शीर्ष सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि पहले हमला करने का मकसद ईरान की जवाबी हमले की क्षमता को कमजोर करना था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ‘भारी और सटीक बमबारी’ तब तक जारी रहेगी, जब तक क्षेत्रीय सुरक्षा के लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते.

ईरान की जवाबी कार्रवाई कितनी गंभीर रही?

अब तक ईरान की प्रतिक्रिया 12 दिन चली पिछली लड़ाई की तुलना में सीमित रही है. उस संघर्ष में ईरान ने 500 से ज्यादा मिसाइलें और बड़ी संख्या में ड्रोन दागे थे. यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, ज्यादातर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया गया है, हालांकि कुछ हमले ईरान के पास मौजूद खाड़ी देशों में गिरे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में टकराव और तेज हो सकता है.

कौन से अमेरिकी हथियार सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं?

न्यू अमेरिका सुरक्षा केंद्र की रक्षा विशेषज्ञ बेका वासर के मुताबिक, अमेरिका ने टॉमहॉक लैंड-अटैक मिसाइल (TLAM) का इस्तेमाल बेहद तेज़ी से किया है. ये मिसाइलें दुश्मन के बुनियादी ढांचे को तबाह करने में अहम भूमिका निभाती हैं.

वासर ने चेतावनी दी कि अमेरिका-चीन युद्ध के सिमुलेशन में टॉमहॉक मिसाइलें पहले ही हफ्ते में खत्म हो जाती हैं, जिससे इनके उत्पादन और उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

क्या अमेरिका अपनी सभी हाईटेक मिसाइल सिस्टम इस्तेमाल कर रहा है?

रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में अमेरिका अपने लंबी दूरी के एंटी-शिप मिसाइलों का सीमित इस्तेमाल कर रहा है. ये वही हथियार हैं जो प्रशांत महासागर में चीन के खिलाफ किसी संभावित युद्ध में बेहद जरूरी होंगे. इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन कुछ क्षमताओं को भविष्य के लिए बचाकर रख रहा है.

इजरायल का भी एयर डिफेंस सिस्टम हो रहा खत्म

इजरायल ने ईरान के सैन्य नेतृत्व पर हमले कर अमेरिका का बोझ कुछ हद तक कम किया है. लेकिन जर्नल के मुताबिक, इजरायल खुद भी हथियारों की कमी से जूझ रहा है.
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल के पास Arrow-3 एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर और एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है.

क्या अमेरिका दूसरे इलाकों से हथियार ला सकता है?

अमेरिका पहले ही मध्य-पूर्व में बड़ी मात्रा में मिसाइल और इंटरसेप्टर तैनात कर चुका है, जिनमें कुछ सहयोगी देशों से आए हथियार भी शामिल हैं. अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो पेंटागन को प्रशांत क्षेत्र के भंडार से हथियार हटाने पर विचार करना पड़ सकता है, जो रणनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है.

असली रणनीतिक चुनौती क्या है?

स्टिमसन सेंटर की केली ग्रिको के अनुसार, इंटरसेप्टर सिस्टम बहुत तेजी से खत्म हो सकते हैं. उनका कहना है, ‘हम इन्हें जितनी तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं, उतनी तेजी से बना नहीं सकते.’

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध को संभालते हुए चीन जैसे भविष्य के बड़े खतरों के लिए भी खुद को तैयार रखे.

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