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Iran US War | Iran Attack on US | नौसेना बेड़ा तबाह, डूब गए USS एरिजोना-ओक्लाहोमा, 188 फाइटर जेट राख… अमेरिका पर सबसे बड़े अटैक की कहानी

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Published On: March 17, 2026

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ईरान और अमेरिका के बीच जंग चरम पर पहुंच चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा नहीं होगा कि ईरान इस जंग में अमेरिका पर इस तरह भारी पड़ेगा. ईरान अमेरिकी नौसेना के ठिकानों पर लगातार बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बरसा रहा है. फारस की खाड़ी में मौजूद यूएस कैरियर ग्रुप्स पर ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं. तेहरान का दावा है कि ‘अमेरिकी बेड़ा कमजोर हो चुका है’. ईरान के इस जवाब हमले के बीच अमेरिका को एक बार फिर वह काला रविवार याद आ रहा है, जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 7 दिसंबर 1941 का पर्ल हार्बर पर हमला हुआ था. ठीक उसी तरह जैसे आज ईरान की ‘सप्राइज स्ट्राइक’ ने अमेरिकी नौसेना को झकझोर दिया, 85 साल पहले जापान ने बिना चेतावनी दिए अमेरिका के सबसे बड़े नौसैनिक अड्डे को तबाह कर दिया था. उस हमले ने अमेरिका को द्वितीय विश्वयुद्ध में घसीट लिया. आज फिर वही सवाल… क्या ईरान का हमला पर्ल हार्बर की तरह ‘डे ऑफ इन्फेमी’ यानी बदनामी का दिन बन जाएगा?

7 दिसंबर की वह तबाही

7 दिसंबर 1941 की सुबह भी किसी आम रविवार की तरह अलसाई हुई थी. हवाई द्वीप के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर शांति पसरी थी. सैकड़ों अमेरिकी सैनिक अभी नींद से उठे ही थे. युद्धपोतों की कतारें ‘बैटलशिप रो’ पर लहरा रही थीं. अचानक आसमान में गड़गड़ाहट हुई. सुबह 7:48 बजे अचानक से आसमान में विमानों की गड़गड़ाहट गूंज उठी. ये सभी जापानी लड़ाकू विमान थे, जो मानो पर्ल हार्बर के ऊपर आसमान पर छा गए थे.

प्रशांत महासागर में मौजूद छह जापानी एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़कर पहुंचे 183 फाइटर जेट ने पर्ल हार्बर पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी है. जापानी टॉरपीडो बमवर्षक, डाइव बमवर्षक और फाइटर जेट ने पहले ही कुछ मिनटों में हेल्दी फील्ड, व्हीलर फील्ड और फोर्ड आइलैंड पर पार्क 188 अमेरिकी फाइटर और बॉम्बर जेट को राख कर दिया.

दुनिया ने पहली बार देखा कामाकाजी विमान

ये कामाकाजी विमान थे, जो अमेरिकी सैनिकों को मारने के बाद खुद मरने के मक्सद से वहां तक आए थे. दुनिया तब पहली इस कामाकाजी शब्द से रूबरू हुई थी. दरअसल जापान से उड़े उन फाइटर जेट्स के पास इतना ईंधन ही नहीं था कि वे वापस सुरक्षित लौट सके. इसलिए उन्होंने आखिर में विमानों को ही हथियार की तरह इस्तेमाल किया और सीधा जाकर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर से टकरा दिया.

इन एयरक्राफ्ट कैरियर पर विमान एक-दूसरे से चिपके हुए थे, कोई उड़ नहीं सका. महज 90 मिनट में अमेरिकी सेना की कमर टूट गई. लेकिन असली तबाही नौसेना पर हुई. ‘बैटलशिप रो’ पर आठ बड़े युद्धपोत खड़े थे. जापानी टॉरपीडो विमानों ने उन्हें निशाना बनाया. सबसे पहले USS ओक्लाहोमा पर चार टॉरपीडो लगे. इस हमले से विशाल युद्धपोत पलट गया. पानी में फंस गए 429 नाविकों की चीखें आसमान छू रही थीं. कई घंटों तक बचाव अभियान चला, लेकिन 429 जवान वहीं दम तोड़ गए.

अमेरिकी इतिहास में यह सबसे बड़ा हमला है.

फिर आया सबसे भयानक क्षण… सुबह 8:10 बजे 1,800 पाउंड का एक बम USS एरिज़ोना के गोला-बारूद भंडार में जा घुसा. पूरा एयरक्राफ्ट कैरियर धमाके से फट गया. आग की लपटें सैकड़ों फीट ऊपर उठीं. 1,177 नाविक और अफसर एक ही पल में शहीद हो गए.

कुल मिलाकर आठ युद्धपोतों में से चार डूब गए, बाकी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. 21 जहाज़ों को नुकसान पहुंचा. अमेरिकी नौसेना बेड़ा क्षणभर में तबाह हो गया. जापान ने कुछ ही वक्त के अंतराल पर लगातार दो बड़े हमले किए. हमले की दूसरी लहर में 170 विमान 8:50 बजे पहुंचे. उन्होंने बचे-खुचे ठिकानों को निशाना बनाया. कुल 2,403 अमेरिकी मारे गए, 1,178 घायल हुए, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे.

जापान ने क्यों किया अमेरिका पर हमला?

जापान एशिया में विस्तार चाहता था, जबकि अमेरिका ने धुरी राष्ट्रों यानी जर्मनी, इटली और जापान को तेल और स्टील की सप्लाई रोक दी थी. जापानी कमांडरों ने सोचा कि अगर पर्ल हार्बर का बेड़ा नष्ट कर दिया जाए तो अमेरिका महीनों तक जवाब नहीं दे पाएगा. लेकिन वे गलत साबित हुए. अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर समुद्र में थे, इसलिए बच गए. पर्ल हार्बर ने अमेरिका को जगा दिया. युद्ध के अंत में जापान को हिरोशिमा-नागासाकी का सामना करना पड़ा.

क्या दोहाराय जाएगा 2026 का इतिहास?

अमेरिकी हमले में ईरानी सुप्रीम लीड आयतुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद जब IRGC कमांडर कह रहे हैं कि ‘हम 6 महीने की जंग के लिए तैयार हैं, नई मिसाइलें अभी इस्तेमाल नहीं हुईं’, और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल बरस रहे हैं, तो पर्ल हार्बर की याद ताजा हो रही है. फारस की खाड़ी में USS जेराल्ड आर. फोर्ड जैसे कैरियर ग्रुप पर हमले हो रहे हैं. ठीक वैसे ही जैसे 1941 में जापान ने बिना चेतावनी हमला किया, आज ईरान की ‘सप्राइज स्ट्राइक्स’ अमेरिका को चौंका रही हैं.

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