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नई दिल्ली.ऑस्कर 2026 में ‘सिनर्स’ और ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ जैसी फिल्मों का दबदबा रहा. ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ को इस साल बेस्ट पिक्चर कैटेगरी में ऑस्कर मिला. भारत की तरफ से इस साल होमबाउंड की ऑफिशियल एंट्री थी, लेकिन ईशान खट्टर और विशाल जेठवा स्टारर फिल्म शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाई.
नीरज घेवान के निर्देशन में बनी होमबाउंड इस साल के लिए भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए ऑफिशियल एंट्री थी. फिल्म टॉप 15 तक पहुंची थी, लेकिन टॉप 5 नॉमिनेशन्स की लिस्ट में अपनी जगह नहीं बना पाई. होमबाउंड का ऑस्कर का सफर 22 जनवरी को खत्म हो गया था.

पिछले साल किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज’ भारत की तरफ से एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए ऑफिशियल एंट्री थी, लेकिन पिछले साल भी भारत का ऑस्कर जीतने का सपना अधूरा रह गया था. ये दोनों ही फिल्म नॉमिनेशन्स तक भी नहीं पहुंच पाई थीं, लेकिन अगर आप इससे निराश हैं, तो चलिए उन फिल्मों के बारे में बताते हैं जो ऑस्कर जीतने से बस एक कदम दूर थीं. इन भारतीय फिल्मों ने ऑस्कर अवॉर्ड्स के नॉमिनेशन में अपनी जगह बना ली थी, लेकिन जीत हासिल करने से चूक गईं.

सबसे पहले बात करते हैं भारतीय सिनेमा में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज क्लासिक कल्ट फिल्म ‘मदर इंडिया’ की. निर्देशक महबूब खान की फिल्म 1958 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट हुई थी. ये ऑस्कर के नॉमिनेशन तक पहुंचने वाली पहली भारतीय फिल्म थी, लेकिन मदर इंडिया सिर्फ 1 वोट से गोल्डन ट्रॉफी जीतने से चूक गई थी.
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नरगिस, सुनीत दत्त और राजेंद्र कुमार की फिल्म 1958 में भारत की तरफ से ऑफिशियल एंट्री थी. महबूब खान द्वारा निर्देशित फिल्म को दुनियाभर के क्रिटिक्स ने खूब सराहा था. भारत में फिल्म ने कई अवॉर्ड जीते थे. हालांकि ऑस्कर के करीब पहुंचकर भी फिल्म जीत नहीं पाई थी.

भारत का ऑस्कर जीतने का सपना एक बार फिर हकीकत बनने के करीब पहुंचा था, लेकिन टॉप 5 नॉमिनेशन में जगह हासिल करने के बावजूद ट्रॉफी हमारे हाथ नहीं आई. इस बार मीरा नायर इतिहास रचने के करीब थीं. साल 1988 में उनकी फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ ने ऑस्कर नॉमिनेशन में जगह बनाई थी.’सलाम बॉम्बे’ बेस्ट फीचर फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेट हुई थी.

अब बात करते हैं आशुतोष गोवारिकर की लगान की. 25 साल पहले साल 2001 में आई आशुतोष की ‘लगान’ ने भारत में क्रिटिक्स और दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी थी. फिल्म को कमर्शियल सक्सेस और क्रिटिकल अक्लेमेशन दोनों मिली थी. इस फिल्म को 2002 में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. आमिर खान और ग्रेसी सिंह स्टारर फिल्म भारत और अंग्रेजों के बीच की लड़ाई पर आधारित था.

1982 में आई फिल्म ‘गांधी’ को एक नई बल्कि कई कैटेगरी में ऑस्कर मिला था. ये फिल्म पूरी तरह से भारतीय नहीं थी. ‘गांधी’ का निर्देशन रिचर्ड एटनबोरग ने किया था जो इंग्लैंड के रहने वाले हैं. इस फिल्म में बेन किंग्सले ने गांधी का लीड रोल अदा किया था. फिल्म को 1983 में बेस्ट पिक्चर कैटेगरी में ऑस्कर मिला था. इस फिल्म में महात्मा गांधी का रोल अदा करने वाली लीड एक्टर बेन किंग्सले को बेस्ट एक्टर कैटेगरी में ऑस्कर मिला था.

गांधी में भारतीय कलाकार अमरीश पुरी और रोहिणी हट्टांगडी ने भी अहम किरदार अदा किए थे. फिल्म के लिए भारतीय डिजाइनर भानु अथाइया को कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए ऑस्कर मिला था. वो ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.

निर्देशक कार्तिकि गोंसाल्वेस की ‘द एलीफेंट विस्परर’ (The Elephant Whisperer) को साल 2023 में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में अवॉर्ड मिला था. भारतीय सिनेमा सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है.


