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आज कल खेल मैदानों में बच्चे कम ही नजर आते हैं. इसकी वजह कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप पर खेले जा रहे वीडियो गेम हैं. ऐसे में उनका मानसिक विकास भले संभव हो, लेकिन सामाजिक और शारीरिक विकास से वे दूर होते जा रहे हैं.
अर्पित बड़कुल/दमोह: आजकल के बच्चे भी मानसिक तनाव, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायराइड, एसिडिटी जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है प्लेग्राउंड यानी खेलने के मैदान से उनकी दूरी. शरीर को फुर्तीला और लचीला बनाने के लिए प्रतिदिन सुबह दौड़ना और व्यायाम करना जरूरी है.
फुटबॉल एक ऐसा खेल है, जिसमें दौड़ने से हाथ और पैर की मांसपेशियों मजबूत होती हैं. जब एक खिलाड़ी मैदान में फुटबॉल के पीछे भागता है तो ताकत, लंबाई, संतुलन, सहनशीलता जैसी चीजें पैदा होती हैं. शरीर को काफी मेहनत करनी होती है. फुटबॉल खेलने से दिमाग भी तेजी से काम करता है. इससे हाइपरटेंशन, डिप्रेशन से बचा जा सकता है. एकाग्रता बढ़ाने के साथ साथ शरीर स्वस्थ रहता है.
मैदानों से दूर मोबाइल-टीवी से चिपके बच्चे
आज कल खेल मैदानों में बच्चे कम ही नजर आते हैं. इसकी वजह कंप्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप पर खेले जा रहे वीडियो गेम हैं. इन उपकरणों पर खेलों के खेलने से बच्चों का मानसिक विकास भले संभव हो, लेकिन सामाजिक और शारीरिक विकास से वे दूर होते जा रहे हैं. अधिक समय तक आधुनिक उपकरणों से घिरे होने के कारण उनकी आंखें भी कमजोर हो रही हैं. कम उम्र में बच्चों को चश्मा लग जा रहा है. इसलिए बच्चों को मैदान में खेलने के लिए जरूर भेजें.
जानिए स्पोर्ट्स टीचर की राय
फुटबॉल खेलने वाले 12 वर्षीय शिवांश शर्मा ने बताया कि मैं सुबह 6 से 8 बजे तक प्रतिदिन दो घंटे फुटबॉल खेलता हूं. फुटबॉल खेलने से मानसिक तनाव एवं शारीरिक बीमारियां दूर हो जाती हैं. खेल मैदान में नए दोस्त और सीनियर्स के साथ खेलने से अनुभव मिलता है. स्पोर्ट्स टीचर रियाजुद्दीन खान ने बताया कि वर्तमान समय में काफी लंबे समय तक पढ़ाई करते रहने से बच्चों में स्ट्रेस होने लग जाता है. जिसे कम करने के लिए खेल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. मैदान में आने से बच्चों को खुले वातावरण में मस्ती के साथ-साथ मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है.


