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गोविंदा और संजय दत्त की जोड़ी हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा जोड़ियों में से है, जिन्होंने अलग-अलग जॉनर में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन दिया. एक्शन से लेकर कॉमेडी तक गोविंदा और संजय दत्त की जोड़ी की जुगलबंदी देखने को मिली और हर तरह के रोल्स में उन्हें काफी सराहा गया.
नई दिल्ली. 80 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक तक, इन दोनों सितारों ने साथ मिलकर कई यादगार फिल्में दीं. जहां गोविंदा अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और एनर्जी के लिए जाने जाते हैं. वहीं संजय दत्त अपने रफ-टफ अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस से हर किरदार में जान डाल देते हैं. आज दोनों की उन फिल्मों पर नजर डालते हैं जिनमें दोनों ने दर्शकों को खूब एंटरटेन किया था.

जीते हैं शान से (1988): इस फिल्म में गोविंदा और संजय दत्त ने भाइयों का किरदार निभाया, जो अपने परिवार और सम्मान के लिए हर मुश्किल का सामना करते हैं. फिल्म की कहानी इमोशन, एक्शन और पारिवारिक मूल्यों के इर्द-गिर्द घूमती है. संजय दत्त का गंभीर और मजबूत व्यक्तित्व जहां कहानी को स्थिरता देता है, वहीं गोविंदा अपने चुलबुले अंदाज से फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगाते हैं.

‘जीते हैं शान से’ में गोविंदा और संजय दत्त के बीच भाईचारा काफी प्रभावशाली लगता है. उस दौर में यह फिल्म दर्शकों के बीच अच्छी तरह कनेक्ट हुई और इसकी कहानी ने पारिवारिक दर्शकों को खासा आकर्षित किया था.
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हसीना मान जाएगी (1999)- संजय दत्त और गोविंदा की फिल्म ‘हसीना मान जाएगी’ में करिश्मा कपूर और पूजा बत्रा ने अहम किरदार निभाया था. इस फिल्म को अगर आप देखने बैठेंगे तो हंसते-हंसते आपके पेट में दर्द होना तय है. यह फिल्म गोविंदा और संजय दत्त की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है.

संजय दत्त और गोविंदा ने शरारती भाइयों का रोल निभाया, जो अपने अमीर पिता को सबक सिखाने के लिए अलग-अलग चालें चलते हैं. फिल्म में गलतफहमियों, मजेदार सिचुएशंस और शानदार डायलॉग्स की भरमार है. गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग और संजय दत्त का मासूम लेकिन मजेदार अंदाज दर्शकों को खूब हंसाता है.

ताकतवार(1989): ‘ताकतवर’ एक एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जिसमें गोविंदा और संजय दत्त ने न्याय के लिए लड़ने वाले किरदार निभाए. फिल्म की कहानी अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को दिखाती है. संजय दत्त का दमदार एक्शन और गोविंदा का एनर्जेटिक अंदाज फिल्म को संतुलित बनाता है. दोनों की जोड़ी यहां गंभीर और एक्शन से भरपूर नजर आती है, जो उस दौर के मसाला सिनेमा की पहचान थी.

दो कैदी(1989) : इस फिल्म में दोनों कलाकारों ने ऐसे दो लोगों का किरदार निभाया, जो हालात के चलते जेल पहुंच जाते हैं और फिर अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश करते हैं. फिल्म में दोस्ती, संघर्ष और न्याय की तलाश को दिखाया गया है. संजय दत्त का इंटेंस अभिनय और गोविंदा का भावनात्मक पक्ष कहानी को गहराई देता है. यह फिल्म दर्शाती है कि दोनों सितारे सिर्फ कॉमेडी ही नहीं, बल्कि गंभीर किरदारों में भी उतने ही प्रभावी हैं.

जोड़ी नंबर 1 (2000): यह एक मजेदार कॉमेडी फिल्म है, जिसमें गोविंदा और संजय दत्त दो ठगों के रोल में नजर आते हैं. दोनों एक अमीर परिवार को बेवकूफ बनाकर फायदा उठाने की योजना बनाते हैं, लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि उनकी ही मुश्किलें बढ़ जाती हैं. फिल्म में कॉमिक टाइमिंग, डांस और मस्ती का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है. दोनों की केमिस्ट्री इतनी शानदार है कि हर सीन में हंसी आना तय है.

एक और एक ग्यारह: इस फिल्म में दोनों चोरों के किरदार में नजर आते हैं, जो एक मिशन के दौरान कई मुश्किलों का सामना करते हैं. एक्शन और कॉमेडी का यह मिश्रण दर्शकों को बांधे रखता है. गोविंदा की फुर्ती और संजय दत्त की ठहराव भरी एक्टिंग फिल्म को खास बनाती है. दोनों की जुगलबंदी फिल्म की जान है.

आंदोलन (1995) ‘अंदोलन’ एक गंभीर सामाजिक और राजनीतिक ड्रामा है, जिसमें दोनों कलाकारों ने सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाले किरदार निभाए. फिल्म समाज में फैले भ्रष्टाचार और अन्याय को उजागर करती है. गोविंदा और संजय दत्त ने यहां अपने किरदारों में गंभीरता और गहराई दिखाई, जो उनकी एक्टिंग रेंज को दर्शाता है. यह फिल्म उनकी बाकी कॉमिक फिल्मों से अलग एक मजबूत संदेश देती है.


