नई दिल्ली. छोटे शहरों में बिजनेस करना अब बड़े शहरों की तुलना में अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है. कम निवेश, कम प्रतिस्पर्धा और स्थानीय लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति (Purchasing Power) ने छोटे शहरों के बाजार को बदल दिया है. लेकिन किसी भी बिजनेस की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह दुकान किस जगह पर है, क्योंकि गलत लोकेशन अच्छे से अच्छे बिजनेस को डूबा सकती है.
आज के समय में छोटे शहरों के ग्राहक भी प्रीमियम अनुभव और सुविधा चाहते हैं. टियर-2 और टियर-3 शहरों में अब केवल पुरानी मार्केट ही नहीं, बल्कि नए कमर्शियल हब भी विकसित हो रहे हैं. ऐसे में एक व्यापारी के लिए यह समझना जरूरी है कि वह अपनी दुकान के लिए सही जगह का चुनाव कैसे करे ताकि उसे कम किराए में सबसे ज्यादा ग्राहक मिल सकें.
छोटे शहर में दुकान के लिए बेस्ट लोकेशन
शहर का मुख्य चौक (Main Square) या टाउन सेंटर: किसी भी छोटे शहर की जान वहां का मुख्य चौक होता है. यहां फुटफॉल (ग्राहकों की आवाजाही) सबसे ज्यादा होती है क्योंकि शहर के हर कोने से लोग यहां किसी न किसी काम से आते हैं.
मुनाफा क्यों: यहां विज्ञापन पर कम खर्च करना पड़ता है क्योंकि दुकान खुद अपनी ब्रांडिंग करती है.
किनके लिए बेस्ट: कपड़ों के शोरूम, मोबाइल शॉप और ज्वेलरी स्टोर के लिए यह जगह सोने की खदान जैसी है.
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास वाली सड़क: छोटे शहरों में ट्रांसपोर्ट हब के पास हमेशा भीड़ बनी रहती है. न केवल शहर के लोग, बल्कि आसपास के गांवों से आने वाले लोग भी यहीं सबसे पहले उतरते हैं.
मुनाफा क्यों: यहां ग्राहकों की संख्या चौबीसों घंटे बनी रहती है.
किनके लिए बेस्ट: खान-पान के जॉइंट्स, होटल, फार्मेसी और डेली नीड्स स्टोर के लिए यह सबसे अच्छी जगह है.
कचहरी, कलेक्ट्रेट या सरकारी दफ्तरों का इलाका: छोटे शहरों में सरकारी दफ्तरों के पास काफी भीड़ जुटती है. यहां लोग काम के सिलसिले में दूर-दूर से आते हैं और उनके पास रुकने और खरीदारी करने का समय होता है.
मुनाफा क्यों: यहां आने वाले लोग एक तय बजट और काम के उद्देश्य से आते हैं, जिससे सेल कन्वर्जन (बिक्री होने की संभावना) ज्यादा होती है.
किनके लिए बेस्ट: स्टेशनरी, फोटोकॉपी की दुकानें, सीए/वकील के दफ्तर और चाय-नाश्ते के आउटलेट्स.
शहर का नया विकसित होता इलाका (Upcoming Residential Area): पुराने शहर की गलियां अक्सर तंग हो जाती हैं, इसलिए अब बड़े घर और कॉलोनियां शहर के बाहरी इलाकों में बन रही हैं. समझदार बिजनेसमैन वहीं दुकान लेता है जहां नई बसावट हो रही हो.
मुनाफा क्यों: यहां किराया शुरुआती दौर में बहुत कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ती है, दुकान की वैल्यू और सेल दोनों तेजी से बढ़ती हैं.
किनके लिए बेस्ट: ग्रोसरी स्टोर (किराना), जिम, हार्डवेयर की दुकान और सैलून.
दुकान फाइनल करने से पहले चेक करें ये 3 चीजें
- पार्किंग की सुविधा: छोटे शहरों में अब लोग बाइक और कार से शॉपिंग करना पसंद करते हैं. अगर दुकान के सामने पार्किंग नहीं है, तो ग्राहक आने से कतराएगा. डेटा कहता है कि अच्छी पार्किंग वाली दुकानों की सेल पार्किंग रहित दुकानों से 20% ज्यादा होती है.
- कॉम्पटीशन का विश्लेषण: जिस जगह आप दुकान ले रहे हैं, वहां पहले से उसी बिजनेस की कितनी दुकानें हैं? अगर वहां पहले से 10 कपड़े की दुकानें हैं, तो आपको कुछ बहुत अलग करना होगा, वरना बिजनेस शुरू होते ही संघर्ष में फंस जाएगा.
- विजिबिलिटी (दिखावट): दुकान ऐसी होनी चाहिए जो दूर से नजर आए. कॉर्नर की दुकानें (Corner Shops) हमेशा प्रीमियम होती हैं क्योंकि उन पर दो तरफ से ग्राहकों की नजर पड़ती है.


