नई दिल्ली। किसी भी व्यक्ति की बिना अनुमति कॉल हिस्ट्री (CDR) निकलवाना या उसकी निजी कॉल डिटेल हासिल करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कानून के जानकारों के अनुसार यह न केवल व्यक्ति की निजता का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध भी है। Information Technology Act, 2000 की धारा 72 के अंतर्गत बिना अधिकार इलेक्ट्रॉनिक डाटा साझा करने या उजागर करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की कॉल डिटेल, लोकेशन या निजी मोबाइल रिकॉर्ड उसकी व्यक्तिगत जानकारी का हिस्सा है, जिसे बिना कानूनी अनुमति प्राप्त करना सीधे तौर पर निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाता है। Justice K. S. Puttaswamy v. Union of India में Supreme Court of India ने स्पष्ट किया था कि निजता प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
पुलिस भी नहीं निकाल सकती मनमाने ढंग से CDR –
कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को भी किसी व्यक्ति की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त करने के लिए सक्षम अधिकारी अथवा न्यायालय से अनुमति लेनी होती है। सामान्य नागरिक किसी की कॉल हिस्ट्री सीधे प्राप्त नहीं कर सकता। इसके लिए न्यायालय का आदेश आवश्यक माना जाता है, जो Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 के प्रावधानों के अनुसार ही संभव है।
अवैध तरीके से कॉल रिकॉर्ड निकलवाने वालों पर कड़ी कार्रवाई –
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति निजी संपर्कों, पैसे या प्रभाव का उपयोग कर किसी की कॉल डिटेल निकलवाता है, तो संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ जानकारी उपलब्ध कराने वाला भी अपराध का भागीदार माना जा सकता है। ऐसे मामलों में साइबर अपराध, गोपनीयता उल्लंघन और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं भी जुड़ सकती हैं।
जनता के लिए संदेश –
बिना कानूनी प्रक्रिया किसी की कॉल हिस्ट्री निकलवाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि इससे गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नागरिकों को चाहिए कि अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को दें।


