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Artemis II Photos: 28000 KM की रफ्तार और लाखों टुकड़े, अंतरिक्ष में छिपे ‘साइलेंट किलर’, जो NASA की तस्वीरों में कभी नजर नहीं आते

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Published On: April 8, 2026

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Artemis II Mission Photos: NASA के Artemis II ने हाल ही में चांद के पास से ऐतिहासिक फ्लाईबाय पूरा किया और शानदार तस्वीरें भेजीं. इन तस्वीरों में पृथ्वी और चांद का नजारा साफ दिखता है, लेकिन एक सवाल तेजी से वायरल हो रहा है कि जब पृथ्वी के आसपास इतना स्पेस जंक घूम रहा है, तो वह तस्वीरों में क्यों नहीं दिखता. असल में यह सवाल जितना आसान लगता है, जवाब उतना ही वैज्ञानिक है. स्पेस जंक बहुत छोटा, बहुत तेज और बहुत दूर फैला हुआ होता है, इसलिए उसे कैमरे में कैद करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. रिसर्चर्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि पृथ्वी की कक्षा में कचरा तेजी से बढ़ रहा है. बिना किसी समाधान के यह स्थिति ‘केसलर सिंड्रोम’ की ओर बढ़ रही है. (Photos : NASA)

अंतरिक्ष में मौजूद ज्यादातर कचरा बेहद छोटे आकार का होता है. वैज्ञानिकों के अनुसार करोड़ों टुकड़े ऐसे हैं जो सेंटीमीटर से भी छोटे हैं. इतने छोटे ऑब्जेक्ट्स को आंख से देख पाना संभव नहीं है. कैमरा भी इन्हें कैप्चर नहीं कर पाता, क्योंकि ये रोशनी को ठीक से रिफ्लेक्ट नहीं करते.

स्पेस जंक और अंतरिक्ष यान दोनों ही बेहद तेज गति से चलते हैं. कई टुकड़े लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमते हैं. ऐसे में किसी छोटे टुकड़े की फोटो लेना ऐसा ही है जैसे दूर हाईवे पर उड़ते कंकड़ की तस्वीर लेना. यह तकनीकी रूप से बेहद मुश्किल काम है.

स्पेस जंक पृथ्वी के चारों ओर अलग-अलग ऊंचाई पर फैला है. इसकी सबसे ज्यादा संख्या लो अर्थ ऑर्बिट में होती है, जो सैकड़ों किलोमीटर ऊपर है. वहीं Artemis II मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री अलग दिशा और दूरी में थे. सही एंगल और सही समय मिलना बहुत कम संभावना वाला मामला है.

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लॉन्च के शुरुआती मिनटों में अंतरिक्ष यात्रियों का पूरा ध्यान मिशन कंट्रोल और सुरक्षा पर होता है. उस समय बाहर की तस्वीरें लेना प्राथमिकता नहीं होती. बाद में भी कैमरा खास टारगेट पर फोकस करता है, जैसे पृथ्वी या चांद, न कि छोटे कचरे पर.

स्पेस जंक को लेकर वैज्ञानिक लगातार चेतावनी देते रहे हैं. खासकर Kessler Syndrome जैसी स्थिति का खतरा बताया जाता है, जिसमें टकराव बढ़ते जाते हैं. हालांकि अभी तक अंतरिक्ष एजेंसियां एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम और मजबूत डिजाइन के जरिए इस खतरे को कंट्रोल कर रही हैं.

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