सोशल मीडिया पर गूंज रही माँ तारा की महिमा – भक्त बिष्णु मलिक कर रहे तारापीठ धाम का व्यापक प्रचार, कौशिकी अमावस्या को लेकर बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था
तारापीठ/रामपुरहाट (पश्चिम बंगाल):
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। रामपुरहाट शहर से लगभग 9–10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पवित्र धाम माँ तारा की दिव्य शक्ति, तांत्रिक साधनाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। कोलकाता से लगभग 220–230 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।


इसी क्रम में आसनसोल और कल्याणेश्वरी क्षेत्र के निवासी बिष्णु मलिक सोशल मीडिया के माध्यम से माँ तारा के इस पावन धाम की महिमा को देश-विदेश तक पहुँचा रहे हैं। वे अपने वीडियो, भक्ति संदेश और धार्मिक जानकारी के जरिए तारापीठ मंदिर के दर्शन तथा यहाँ की आध्यात्मिक परंपराओं को लोगों तक पहुँचा रहे हैं।

बिष्णु मलिक का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि लोगों के मन में माँ तारा के प्रति श्रद्धा और भक्ति को बढ़ाना है। वे नियमित रूप से तारापीठ धाम से जुड़े वीडियो, दर्शन और आध्यात्मिक संदेश साझा करते हैं, ताकि जो श्रद्धालु दूर-दराज में रहते हैं, वे भी माँ तारा की महिमा से जुड़ सकें और इस पवित्र धाम के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।
कौशिकी अमावस्या का विशेष महत्व
भाद्रपद माह (अगस्त-सितंबर) में आने वाली कौशिकी अमावस्या तारापीठ धाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अमावस्या देवी काली के कौशिकी रूप की पूजा के लिए समर्पित होती है। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों के अंत के लिए देवी पार्वती ने अपने देह कोष से एक उग्र और शक्तिशाली रूप धारण किया, जिसे देवी कौशिकी कहा गया।
यह रात तांत्रिक साधकों, अघोरियों और साधना करने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि इस रात माँ तारा की आराधना करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है, शत्रुओं से रक्षा मिलती है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
तारापीठ में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

कौशिकी अमावस्या के अवसर पर तारापीठ मंदिर में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं। पूरी रात विशेष पूजा-अर्चना, तांत्रिक साधना और माँ तारा की आराधना का आयोजन होता है। भक्त मानते हैं कि इस पावन रात में सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की परेशानियों को दूर कर सकती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
आस्था और भक्ति का संदेश
तारापीठ धाम केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। माँ तारा के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और श्रद्धा से माँ की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
संदेश: “जहाँ भक्ति है, वहीं शक्ति है —


