मुख्यमंत्री की सौगात का उद्देश्य क्या धरातल पर उतर पाएगा
– मुख्य मार्ग पर गुणवत्ता बनी सबसे बड़ी चिंता
सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)–डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
सोनभद्र/डाला–ओबरा।संपर्क मुख्य मार्ग वर्षों से जनमानस के लिए परेशानी और पीड़ा का कारण बना रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति के चलते बरसात में कीचड़ और जलभराव, गर्मी में भारी धूल और प्रदूषण तथा टूटे गड्ढों के कारण पैदल यात्रियों, दोपहिया चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को रोज़ जोखिम उठाना पड़ता था। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुकी थी।इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री द्वारा जिले को दी गई विकास सौगातों के क्रम में इस मार्ग की विशेष मरम्मत के लिए ₹4 करोड़ 93 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई। इस स्वीकृति का स्पष्ट उद्देश्य था—जनजीवन को बेहतर बनाना, सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना और वर्षों से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान करना। इसके उपरांत लोक निर्माण विभाग द्वारा नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया।डाला–ओबरा मार्ग कोई साधारण सड़क नहीं है। यह शक्तिनगर–वाराणसी स्टेट हाईवे से जुड़ा प्रमुख संपर्क मार्ग है और साथ ही खनन व क्रशर बेल्ट से होकर गुजरता है, जहाँ ट्रक, डम्पर और भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही रहती है।




ऐसे मार्ग पर किया गया निर्माण तभी सार्थक माना जाएगा, जब वह मानकों के अनुरूप, मजबूत और टिकाऊ हो।लेकिन वर्तमान में धरातल पर दिखाई दे रही स्थिति को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या निर्माण कार्य मुख्यमंत्री की मंशा और स्वीकृत धनराशि के उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है? स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि गुणवत्ता और मानकों पर सख़्त निगरानी नहीं हुई, तो वर्षों से चली आ रही समस्या दोबारा लौट सकती है—और तब जनमानस को फिर उसी धूल, प्रदूषण और जोखिम भरे आवागमन का सामना करना पड़ेगा।यह लेख किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की सौगात को वास्तविक अर्थों में जनहितकारी बनाने की अपेक्षा के साथ लिखा गया है। अब ज़रूरत है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस कार्य को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे जनजीवन सुधारने का अवसर समझकर पूरी गंभीरता से अमल में लाएँ।


