तहसील मुख्यालय के रामलीला मंच पर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन ||
विभिन्न बैंकों ने लगाए स्टॉल, ऋण खाताधारकों को मिला वन टाइम सेटलमेंट का लाभ ||
दुद्धी (सोनभद्र)। तहसील मुख्यालय स्थित रामलीला प्रांगण मंच पर शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस विशेष आयोजन में क्षेत्र के कई बैंक शाखाओं ने भागीदारी निभाई और बड़ी संख्या में ऋण खाताधारकों को कर्ज समाधान का अवसर दिया।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य ऐसे खाताधारकों को राहत पहुंचाना था, जिनके ऋण खाते वर्षों से लंबित थे या फिर नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) में बदल चुके थे। इस दौरान बैंकों द्वारा ऋण खातों का वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) कराते हुए खातों को बंद किया गया।
16 ऋण खातों का निपटारा, ₹16.62 हजार की वसूली-
भारतीय स्टेट बैंक दुद्धी शाखा समेत विंढमगंज, अमवार, चपकी, अनपरा और रेनूकुट शाखाओं द्वारा कुल 16 ऋण खातों को ओटीएस के तहत बंद कराया गया। इस प्रक्रिया में बैंकों ने कुल 16.62 हजार रुपये की वसूली की और कई लोन खातों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। यह कदम न केवल बैंकों के लिए राहतदायक रहा बल्कि खाताधारकों को भी वित्तीय बोझ से मुक्ति दिलाने वाला साबित हुआ।
ग्रामीण बैंक ने वसूले 6 लाख, 50 खाते हुए बंद-
उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने लोक अदालत के अवसर पर विशेष स्टॉल लगाया। इस स्टॉल पर विभिन्न शाखाओं के ऋण खाताधारकों ने अपने लंबित लोन का निपटारा कराया। बैंक अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान लगभग ₹6 लाख की राशि जमा हुई और करीब 50 ऋण खातों को समझौते के तहत बंद कर दिया गया।
ग्रामीण बैंक की झारो कला, महुली, लीलासी, बभनी, जरहा, किरबिल, मुर्धवा, कुलडोमरी, सागोबांध और ओडी मोड़ शाखाओं से आए प्रबंधकों व कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि लोक अदालत जैसे अवसर न केवल बैंकों की वसूली बढ़ाते हैं बल्कि आम नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया से बचाकर राहत भी प्रदान करते हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य बैंकों की सहभागिता-
इस मौके पर बैंक ऑफ बड़ौदा की दुद्धी और म्योरपुर शाखाओं के प्रबंधकों ने भी उपस्थित होकर एनपीए खातों को बंद कराया। वहीं, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों ने भी अपने खाताधारकों को सेटलमेंट की सुविधा दी।
आयोजन में शामिल अधिकारी-
राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन में कई बैंक प्रबंधकों और अधिकारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसमें इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक जितेंद्र चौरसिया, अमवार शाखा से विकास कुमार गोस्वामी, विंढमगंज शाखा से अभिषेक शर्मा, ग्रामीण बैंक के असिस्टेंट मैनेजर अनंत वर्मा, झारो कला से हरि मोहन आनंद, मुर्धवा से विजयसिंह, कुलडुमरी से मिंज, किरबिल से सर्वेश चौबे, जरहा से विनसेंट टिग्गा, पीएलबी से रंज्जू देवी, अमर जीत केसियार, अमित कुमार, संजय, प्रमोद, बैंक ऑफ इंडिया से दीपक कुमार, और बैंक ऑफ बड़ौदा दुद्धी शाखा प्रबंधक सहित कई अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत का महत्व –
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन केवल ऋण खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न विवादों और कानूनी मामलों को सुलझाने का भी मंच है। इससे न केवल आम लोगों को न्याय सस्ता और सुलभ मिलता है बल्कि बैंकों और अन्य संस्थानों का कामकाज भी सुचारु रूप से चलता है।
निष्कर्ष- दुद्धी तहसील मुख्यालय पर आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत ने दर्जनों ऋण खाताधारकों को बड़ी राहत दी। एक ही दिन में लाखों रुपये की वसूली और कई खातों का निपटारा होने से बैंक और ग्राहक दोनों ही संतुष्ट नजर आए। भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों से आम जनता को न्याय और आर्थिक राहत मिलती रहेगी।


