बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एयरफोर्स वन की हो, या फिर रूसी राष्ट्राध्यक्ष ब्लामिदन पुतिन के फ्लाइंग क्रेमलिन और पीएम नरेंद्र मोदी के इंडिया वन की हो. दुनिया के ऐसे बड़े नेताओं के विमान सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि ये आसमान में उड़ते सुपर सिक्योर कमांड सेंटर की तरह काम करते हैं. इन एयरक्राफ्ट्स में ऐसी तकनीक मौजूद है, जो मिसाइल को भी चकमा दे सकते हैं. अमेरिका का एयर फोर्स वन अपनी एडवांस सिक्योरिटी के साथ न्यूक्लियर अटैक से बचाव की क्षमता रखता है. वहीं, भारत का इंडिया वन भी किसी से कम नहीं है. लंबी दूरी की उड़ान के साथ अत्याधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और मजबूत सुरक्षा कवच के लिए इसकी गिनती दुनिया के दूसरे सबसे मजबूत एयरक्राफ्ट के तौर पर होती है.
बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एयरफोर्स वन की हो, या फिर रूसी राष्ट्राध्यक्ष ब्लामिदन पुतिन के फ्लाइंग क्रेमलिन और पीएम नरेंद्र मोदी के इंडिया वन की हो. दुनिया के ऐसे बड़े नेताओं के विमान सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि ये आसमान में उड़ते सुपर सिक्योर कमांड सेंटर की तरह काम करते हैं. इन एयरक्राफ्ट्स में ऐसी तकनीक मौजूद है, जो मिसाइल को भी चकमा दे सकते हैं. अमेरिका का एयर फोर्स वन अपनी एडवांस सिक्योरिटी के साथ न्यूक्लियर अटैक से बचाव की क्षमता रखता है. वहीं, भारत का इंडिया वन भी किसी से कम नहीं है. लंबी दूरी की उड़ान के साथ अत्याधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और मजबूत सुरक्षा कवच के लिए इसकी गिनती दुनिया के दूसरे सबसे मजबूत एयरक्राफ्ट के तौर पर होती है.











