झारखंड के देवघर प्रखंड के घोरलास गांव में आज भी एक ऐसी अनोखी ‘बैठकी’ मौजूद है, जो भीषण गर्मी में लोगों को प्राकृतिक ठंडक का एहसास कराती है. जहां शहरों में लोग गर्मी से बचने के लिए एसी और कूलर का सहारा लेते हैं, वहीं इस गांव के लोग दोपहर के समय पक्के मकानों की बजाय मिट्टी से बने पुराने ‘कोठा घर’ में बैठना ज्यादा पसंद करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बाहर का तापमान 40 से 45 डिग्री तक पहुंचने के बावजूद इस कमरे के अंदर घुसते ही ठंडक महसूस होने लगती है. यही कारण है कि गर्मी के दिनों में गांव के लोग यहां बैठकर समय बिताते हैं.
झारखंड के देवघर प्रखंड के घोरलास गांव में आज भी एक ऐसी अनोखी ‘बैठकी’ मौजूद है, जो भीषण गर्मी में लोगों को प्राकृतिक ठंडक का एहसास कराती है. जहां शहरों में लोग गर्मी से बचने के लिए एसी और कूलर का सहारा लेते हैं, वहीं इस गांव के लोग दोपहर के समय पक्के मकानों की बजाय मिट्टी से बने पुराने ‘कोठा घर’ में बैठना ज्यादा पसंद करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बाहर का तापमान 40 से 45 डिग्री तक पहुंचने के बावजूद इस कमरे के अंदर घुसते ही ठंडक महसूस होने लगती है. यही कारण है कि गर्मी के दिनों में गांव के लोग यहां बैठकर समय बिताते हैं.









