हजारों परिवार आज भी यह नहीं जानते कि उनके बेटे, भाई या पिता जिंदा हैं या नहीं. बलूचिस्तान की 77 साल की लंबी कहानी: दर्द, संघर्ष और इंतजार से भरी है. मौत, विस्थापन, कथित अपहरण और संसाधनों पर नियंत्रण, आज भी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कहानी बनी हुई है.
हजारों परिवार आज भी यह नहीं जानते कि उनके बेटे, भाई या पिता जिंदा हैं या नहीं. बलूचिस्तान की 77 साल की लंबी कहानी: दर्द, संघर्ष और इंतजार से भरी है. मौत, विस्थापन, कथित अपहरण और संसाधनों पर नियंत्रण, आज भी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कहानी बनी हुई है.









