IAS Success Story: जोधपुर के दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की कहानी सपने बदलने नहीं, उन्हें नया दिशा देने की मिसाल है. बचपन में इंडिया टीम के लिए खेलने का सपना देखने वाले दिलीप को 12वीं के बाद परिवार के दबाव में क्रिकेट छोड़ना पड़ा. तानों और मजाक के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय खुद से एक वादा किया अगर बैट नहीं उठा पाए, तो कलम से देश की सेवा करेंगे. केमिकल इंजीनियरिंग के दौरान समाजसेवा से जुड़कर उनके भीतर प्रशासनिक सेवा का सपना जन्मा और दिल्ली में संघर्ष शुरू हुआ. 2 बार की असफलताओं, प्रीलिम्स और इंटरव्यू में चूके मौके के बाद भी वे डटे रहे. तीसरे प्रयास में UPSC 2018 में ऑल इंडिया रैंक 72 लाकर वे IAS बन गए. आज पलामू के 106वें DC के रूप में वे जल संकट से निपटने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग और आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. दिलीप का संदेश साफ है असफलता मोड़ है, मंजिल नहीं। मजबूत इरादे हर सपने को नया मैदान दे सकते हैं.
IAS Success Story: जोधपुर के दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की कहानी सपने बदलने नहीं, उन्हें नया दिशा देने की मिसाल है. बचपन में इंडिया टीम के लिए खेलने का सपना देखने वाले दिलीप को 12वीं के बाद परिवार के दबाव में क्रिकेट छोड़ना पड़ा. तानों और मजाक के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय खुद से एक वादा किया अगर बैट नहीं उठा पाए, तो कलम से देश की सेवा करेंगे. केमिकल इंजीनियरिंग के दौरान समाजसेवा से जुड़कर उनके भीतर प्रशासनिक सेवा का सपना जन्मा और दिल्ली में संघर्ष शुरू हुआ. 2 बार की असफलताओं, प्रीलिम्स और इंटरव्यू में चूके मौके के बाद भी वे डटे रहे. तीसरे प्रयास में UPSC 2018 में ऑल इंडिया रैंक 72 लाकर वे IAS बन गए. आज पलामू के 106वें DC के रूप में वे जल संकट से निपटने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग और आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. दिलीप का संदेश साफ है असफलता मोड़ है, मंजिल नहीं। मजबूत इरादे हर सपने को नया मैदान दे सकते हैं.












