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‘ज्यादा खुश रहने से’, एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला की समस्या पर श्री श्री रवि शंकर ने दोहराया गाना

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Published On: May 28, 2026

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नई दिल्ली: टीवी के सुपरस्टार गौरव खन्ना की पत्नी और एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला श्री श्री रवि शंकर के पास अपनी एक अनूठी समस्या लेकर पहुंचीं. एक्ट्रेस अपनी समस्या के बारे में बताते वक्त लगातार मुस्कुरा रही थीं. उन्होंने अपने गुरु से पूछा, ‘मैं मुंबई से एक एक्ट्रेस हूं. हम जो कुछ भी करते हैं, पब्लिक बहुत जज करती है. मैं बहुत ज्यादा खुश रहने की वजह से अपराधबोध में हूं. आप हमेशा कहते हैं कि हमेशा खुश रहो. मगर मैं ऐसा करती हूं, तो लगता है कि लोगों को इससे ठेस पहुंची है. वह इतनी खुश क्यों है? नाचती क्यों रहती है? मुझे समझ नहीं आता कि दुखी रहना क्या ट्रेंड बन गया है. कहीं जाकर थोड़ा गंभीर या परिपक्व बर्ताव करना चाहिए, ताकि लोग मुझे स्वीकार करें?’ श्री श्री रवि शंकर समझाते हुए कहते हैं, ‘वे स्वीकार करें या न करें, तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा? फर्क पड़ रहा है न. मस्ती में रहो न फिर. वो गाना है न- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना. मैं एक और बात बताता हूं. कई बार लोग हमारी खुशी समझ नहीं पाते हैं, इसलिए थोड़ा कंट्रोल तरीके से उन्हें दिखाना चाहिए. पूरा दिखाने की जरूरत नहीं है. गंगा ज्ञान है. अगर वह सीधा धरती पर उतरती, तो लोग उसे संभाल नहीं पाते. इसलिए, शिव भगवान ने उसे अपनी जटा में बांधकर थोड़ी सी एक धारा छोड़ी है. बाकी तो अंदर रख ली. जहां पर जितने लोग जिस हिसाब से समझते हैं, उस हिसाब से दिखाओ.’नई दिल्ली: टीवी के सुपरस्टार गौरव खन्ना की पत्नी और एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला श्री श्री रवि शंकर के पास अपनी एक अनूठी समस्या लेकर पहुंचीं. एक्ट्रेस अपनी समस्या के बारे में बताते वक्त लगातार मुस्कुरा रही थीं. उन्होंने अपने गुरु से पूछा, ‘मैं मुंबई से एक एक्ट्रेस हूं. हम जो कुछ भी करते हैं, पब्लिक बहुत जज करती है. मैं बहुत ज्यादा खुश रहने की वजह से अपराधबोध में हूं. आप हमेशा कहते हैं कि हमेशा खुश रहो. मगर मैं ऐसा करती हूं, तो लगता है कि लोगों को इससे ठेस पहुंची है. वह इतनी खुश क्यों है? नाचती क्यों रहती है? मुझे समझ नहीं आता कि दुखी रहना क्या ट्रेंड बन गया है. कहीं जाकर थोड़ा गंभीर या परिपक्व बर्ताव करना चाहिए, ताकि लोग मुझे स्वीकार करें?’ श्री श्री रवि शंकर समझाते हुए कहते हैं, ‘वे स्वीकार करें या न करें, तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा? फर्क पड़ रहा है न. मस्ती में रहो न फिर. वो गाना है न- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना. मैं एक और बात बताता हूं. कई बार लोग हमारी खुशी समझ नहीं पाते हैं, इसलिए थोड़ा कंट्रोल तरीके से उन्हें दिखाना चाहिए. पूरा दिखाने की जरूरत नहीं है. गंगा ज्ञान है. अगर वह सीधा धरती पर उतरती, तो लोग उसे संभाल नहीं पाते. इसलिए, शिव भगवान ने उसे अपनी जटा में बांधकर थोड़ी सी एक धारा छोड़ी है. बाकी तो अंदर रख ली. जहां पर जितने लोग जिस हिसाब से समझते हैं, उस हिसाब से दिखाओ.’  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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