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झारखंड: आदिवासी परिवार का बहिष्कार और 2 लाख जुर्माना, 15 सगे संबंधियों पर भी गाज, जानिए पूरा मामला

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Published On: May 20, 2026

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Tribal Family Social Boycott: सामुदायिक व्यवस्था किसी समाज की पहचान हो सकती है, लेकिन जब वही व्यवस्था किसी परिवार के जीवन, सम्मान और आजीविका पर संकट बन जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है. मामला पाकुड़ का है जहां बेटे की शादी में व्यस्त रहने के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए एक आदिवासी परिवार और उससे जुड़े 15 परिवारों का पंचायत ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया. गांव में हुक्का-पानी, रोजगार और सामाजिक संबंधों तक पर रोक लगाने के आरोप ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है.

​Tribal Family Social Boycott: सामुदायिक व्यवस्था किसी समाज की पहचान हो सकती है, लेकिन जब वही व्यवस्था किसी परिवार के जीवन, सम्मान और आजीविका पर संकट बन जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है. मामला पाकुड़ का है जहां बेटे की शादी में व्यस्त रहने के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए एक आदिवासी परिवार और उससे जुड़े 15 परिवारों का पंचायत ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया. गांव में हुक्का-पानी, रोजगार और सामाजिक संबंधों तक पर रोक लगाने के आरोप ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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