

सोनभद्र।13 मई की शाम अचानक बदले मौसम और तेज आंधी-तूफान ने केवल जनपद सोनभद्र ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक प्रभाव छोड़ा। मौसम विभाग द्वारा पूर्व में जारी चेतावनियों के बीच शाम होते-होते तेज हवाओं, धूलभरी आंधी और खराब मौसम ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया। पूर्वांचल क्षेत्र में भी मौसम का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जहां कई स्थानों पर बिजली व्यवस्था बाधित हुई, पेड़ और पोल गिरने की घटनाएं सामने आईं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय क्षति की सूचनाएं प्राप्त हुईं।जनपद सोनभद्र में भी आंधी-तूफान का प्रभाव कई तहसील क्षेत्रों में देखने को मिला। जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में उपलब्ध प्रारंभिक विवरण के अनुसार खराब मौसम के कारण जनपद में अब तक 3 व्यक्तियों की मृत्यु,1 पशुहानि, 1 कच्चे मकान की पूर्ण क्षति तथा 81 कच्चे मकानों की आंशिक क्षति दर्ज की गई है। राबर्ट्सगंज, दुद्धी एवं ओबरा तहसील क्षेत्रों से जनहानि एवं आवासीय नुकसान की सूचनाएं प्रशासन को प्राप्त हुई हैं।प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत एवं सहायता प्रक्रिया को लेकर जनपद सोनभद्र स्थित जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में जिला आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ अरुण यादव द्वारा विस्तृत जानकारी साझा की गई। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दैवीय आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए विभिन्न सहायता प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने की स्थिति में प्रभावित परिवार को लगभग ₹5 लाख तक सहायता राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है। पूर्ण आवासीय क्षति होने पर लगभग ₹1.20 लाख तक तथा आंशिक आवासीय क्षति होने पर लगभग ₹4 हजार तक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वहीं दुधारू पशुओं की मृत्यु होने पर भी सहायता राशि दिए जाने की व्यवस्था निर्धारित है।उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की आपदा की घटना के बाद संबंधित क्षेत्र के लेखपाल को तत्काल सूचना देना आवश्यक होता है। लेखपाल द्वारा स्थलीय निरीक्षण एवं क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसके आधार पर राहत प्रक्रिया संचालित होती है।प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण होने के उपरांत सहायता राशि प्रभावित व्यक्तियों के खातों में हस्तांतरित की जाती है।प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा खराब मौसम और दैवीय आपदाओं से प्रभावित लोगों तक राहत सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया लगातार संचालित की जा रही है। ऐसे में प्रशासनिक जानकारी एवं राहत प्रक्रिया को आमजन तक पहुंचाना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवार समय पर शासन की निर्धारित सहायता व्यवस्था का लाभ प्राप्त कर सकें।










