मजदूरों की मानें तो उनके साथ हर स्तर पर अमानवीय व्यवहार होता है. उन्हें न बीमारी की छुट्टी मिलती है और न ही कैजुअल लीव. जब भी वे कोई छुट्टी लेते हैं तो उनके छोटे से वेतन में से पैसा काट लिया जाता है ऐसे में परिवार का खर्च कैसे चलांए?
मजदूरों की मानें तो उनके साथ हर स्तर पर अमानवीय व्यवहार होता है. उन्हें न बीमारी की छुट्टी मिलती है और न ही कैजुअल लीव. जब भी वे कोई छुट्टी लेते हैं तो उनके छोटे से वेतन में से पैसा काट लिया जाता है ऐसे में परिवार का खर्च कैसे चलांए?













