नई दिल्ली: लीजेंड गायिका आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत जगत में जो खालीपन आ गया है, उसे भरना शायद मुमकिन न हो, मगर उनके गाने दुनिया के वजूद तक कानों में मिश्री घोलते रहेंगे. दिग्गज गीतकार प्रसून जोशी ने आशा भोसले के निधन पर कहा, ‘आशा जी जैसी प्रतिभाएं धरती पर रोज-रोज नहीं आतीं. मेरा यह सौभाग्य रहा कि मुझे उनके साथ समय बिताने का समय मिला. काम करने का मौका मिला. मुझे याद है कि मैंने एक कविता उनके लिए लिखी थी, उन्हें बहुत पसंद थी. मैं पढ़ना चाहूंगा आप सबके लिए, ‘अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. मन को छूकर जाने कब हम सबके अंदर उतर गई. अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. हरे-हरे पत्तों की नोंक पे थर्राई सी ओस की बूंद, सुनती सारी सृष्टि बैठकर खामोशी से आंखें मूंद. अभी-अभी एक नदी सुरों की सामने आकर बैठ गई, अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. गुमसुम-गुमसुम बैठी बंदिश उसका रास्ता देख रही. कब हम संग खेलेगी आशा. बंदिश-बंदिश पूछ रही. किस्मतवाला है, जिसने उस सुर उड़ान को देखा है, और उसके संग एक सुरीले आसमान को देखा है. जागी ऋतुएं बोले मौसम जब-जब भी वह जिधर गई, अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई.’नई दिल्ली: लीजेंड गायिका आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत जगत में जो खालीपन आ गया है, उसे भरना शायद मुमकिन न हो, मगर उनके गाने दुनिया के वजूद तक कानों में मिश्री घोलते रहेंगे. दिग्गज गीतकार प्रसून जोशी ने आशा भोसले के निधन पर कहा, ‘आशा जी जैसी प्रतिभाएं धरती पर रोज-रोज नहीं आतीं. मेरा यह सौभाग्य रहा कि मुझे उनके साथ समय बिताने का समय मिला. काम करने का मौका मिला. मुझे याद है कि मैंने एक कविता उनके लिए लिखी थी, उन्हें बहुत पसंद थी. मैं पढ़ना चाहूंगा आप सबके लिए, ‘अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. मन को छूकर जाने कब हम सबके अंदर उतर गई. अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. हरे-हरे पत्तों की नोंक पे थर्राई सी ओस की बूंद, सुनती सारी सृष्टि बैठकर खामोशी से आंखें मूंद. अभी-अभी एक नदी सुरों की सामने आकर बैठ गई, अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई. गुमसुम-गुमसुम बैठी बंदिश उसका रास्ता देख रही. कब हम संग खेलेगी आशा. बंदिश-बंदिश पूछ रही. किस्मतवाला है, जिसने उस सुर उड़ान को देखा है, और उसके संग एक सुरीले आसमान को देखा है. जागी ऋतुएं बोले मौसम जब-जब भी वह जिधर गई, अभी-अभी एक चंचल लड़की हवा के जैसे गुजर गई.’
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आशा भोसले पर कविता सुनाते हुए इमोशनल हुए गीतकार प्रसून जोशी! मानो आंखों में छलक आया हो यादगार मंजर


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विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More










