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Video: खीरे की खेती का आदिवासी फॉर्मूला! 45 दिनों में 20 बार टूटेगा फल, मिसाल बना यह किसान

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Published On: April 12, 2026

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Cucumber Cultivation Profit Tips: बोकारो के जरीडीह प्रखंड के बालीडीह टांड़ गांव में एक प्रगतिशील किसान ने युवाओं को स्वरोजगार की नई राह दिखाई है. सरकारी नौकरी की पारंपरिक दौड़ को छोड़ शंकर सोरेन ने खेती को व्यवसाय बनाया. आज वे 3 एकड़ में खीरे की उन्नत खेती से लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं. शंकर सोरेन के मुताबिक खीरा एक शॉर्ट टर्म फसल है जो बुवाई के महज 45 दिनों में कमाई देना शुरू कर देती है. 3 एकड़ की खेती में करीब 2 लाख रुपये की लागत आती है. जबकि इससे लगभग 500 क्विंटल तक की उपज प्राप्त होती है. 10 रुपये प्रति किलो के औसत भाव पर भी वे एक सीजन में 4 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. जिससे लागत काटकर 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल रहा है. शंकर खेती में कीटों से बचाव के लिए ट्रैप तकनीक का सहारा लेते हैं. उनका कहना है कि 70% नमी बरकरार रखकर और कीट प्रबंधन के साथ इस फसल से 20 बार तक तोड़ाई की जा सकती है. आज वे अपनी इस मेहनत से क्षेत्र के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं.

​Cucumber Cultivation Profit Tips: बोकारो के जरीडीह प्रखंड के बालीडीह टांड़ गांव में एक प्रगतिशील किसान ने युवाओं को स्वरोजगार की नई राह दिखाई है. सरकारी नौकरी की पारंपरिक दौड़ को छोड़ शंकर सोरेन ने खेती को व्यवसाय बनाया. आज वे 3 एकड़ में खीरे की उन्नत खेती से लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं. शंकर सोरेन के मुताबिक खीरा एक शॉर्ट टर्म फसल है जो बुवाई के महज 45 दिनों में कमाई देना शुरू कर देती है. 3 एकड़ की खेती में करीब 2 लाख रुपये की लागत आती है. जबकि इससे लगभग 500 क्विंटल तक की उपज प्राप्त होती है. 10 रुपये प्रति किलो के औसत भाव पर भी वे एक सीजन में 4 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. जिससे लागत काटकर 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिल रहा है. शंकर खेती में कीटों से बचाव के लिए ट्रैप तकनीक का सहारा लेते हैं. उनका कहना है कि 70% नमी बरकरार रखकर और कीट प्रबंधन के साथ इस फसल से 20 बार तक तोड़ाई की जा सकती है. आज वे अपनी इस मेहनत से क्षेत्र के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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