गुमला जिले में बड़े उद्योग धंधे नहीं है ऐसे में महुआ ग्रामीण लोगों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है. गुमला जिले के घाघरा प्रखण्ड के चूल्हा माटी गांव के ग्रामीण सुबह होते ही टोकरी लेकर जंगलों की ओर महुआ चुनने के लिए निकल पड़ते हैं और फिर उसे चुनकर, सुखाकर बाजार में 50-60 रु प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं. जिससे परिवार की आजीविका चलाने में भी सहायता हो रही है.
गुमला जिले में बड़े उद्योग धंधे नहीं है ऐसे में महुआ ग्रामीण लोगों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है. गुमला जिले के घाघरा प्रखण्ड के चूल्हा माटी गांव के ग्रामीण सुबह होते ही टोकरी लेकर जंगलों की ओर महुआ चुनने के लिए निकल पड़ते हैं और फिर उसे चुनकर, सुखाकर बाजार में 50-60 रु प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं. जिससे परिवार की आजीविका चलाने में भी सहायता हो रही है.













