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साउथ कोरिया के सिनेमा से ‘जेन जी’ वाकिफ हैं, लेकिन क्या आपने नॉर्थ कोरिया का सिनेमा देखा है जो 1978 में एक मशहूर हीरोइन की किडनैपिंग के बाद दुनिया भर की नजर में छाया था. दरअसल, नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग 2 सिनेमा के बड़े फैन थे, जिनके कहने पर साउथ कोरियाई हीरोइन चॉय इउन-ही को किडनैप किया और उन्हें अपनी फिल्मों में काम करने को मजबूर किया. आज जब हम नॉर्थ कोरिया का सिनेमा देखते हैं, तो उसमें भारतीय सिनेमा की छाप दिखती है, मगर कहते हैं कि वहां की लीडरशिप ने सिनेमा का इस्तेमाल अपने प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने के लिए भी खूब किया और राजनीति में अपनी जगह मजबूत की. आज अगर किम जोंग 2 के बेटे किम जोंग उन नॉर्थ कोरिया की गद्दी पर विराजमान है, तो इसमें सिनेमा का भी बड़ा रोल है.
नई दिल्ली: साउथ कोरिया के पॉप कल्चर और सितारों से भारतीय युवा वाबस्ता हैं, लेकिन नॉर्थ कोरिया के सिनेमा को लेकर आपका क्या ख्याल है, जिनके लीडर किम जोंग उन बड़े सिनेमा प्रेमी हैं. आप सिनेमा को लेकर उनके लगाव का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने ’72 सिगन’ (72 ऑवर्स) नाम की फिल्म लिखी है, जिसे ‘दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में दिखाया जाएगा. दरअसल, रूस के साथ नॉर्थ कोरिया फिल्म फेस्टिवल के 15वें एडिशन में ‘कंट्री पार्टनर’ हैं. चूंकि नॉर्थ कोरिया में किम जोंग उन की तानाशाही है, इसलिए उनके सिनेमा पर प्रोपेगैंडा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. फिल्म फेस्टिवल में ‘इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स’ एक सहयोगी है.(फोटो साभार: IMDb)

नॉर्थ कोरिया में सिनेमा के शुरुआत की कहानी बड़ी दिलचस्प है. अमेरिकी फिल्ममेकर और यूट्यूबर जॉनी हैरिस के अनुसार, साल 1978 की गर्मी में जब साउथ कोरिया की मशहूर एक्ट्रेस चॉय इउन-ही (Choi Eun Hee) होंग-कोंग के वीरान समुद्री तट पर टहल रही थीं, तब उन्हें कुछ लोग किडनैप करके नॉर्थ कोरिया ले गए. वहां उन्हें नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग 2 की फिल्म में काम करने के लिए मजबूर किया गया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

किम जोंग 2 ने सिनेमा का इस्तेमाल न सिर्फ अपनी क्रिएटिविटी दिखाने के लिए किया, बल्कि वह प्रोपेगैंडा टूल की तरह भी किया, ताकि लाखों-करोड़ों लोगों के दिमाग में अपनी बातों-विचारों को बैठा सकें. उन्होंने सिनेमा के जरिये अपनी और अपने परिवार की राजनीति में जगह मजबूत बनाई. कह सकते हैं कि आज सिनेमा की ताकत के बलबूते नॉर्थ कोरिया में उनके परिवार का एकछत्र राज है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
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नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग-इल (किम जोंग 2) की तरह उनके पिता किम इल-सुंग को भी फिल्मों का जबरदस्त शौक था और शायद यही वजह है कि वहां का सिनेमा सीधे सरकार और ‘कोरियन वर्कर्स पार्टी’ के कंट्रोल में रहता है. प्योंगयांग का ‘कोरियन आर्ट फिल्म स्टूडियो’ देश का सबसे बड़ा प्रोडक्शन हाउस है. इस बार दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में कुछ खास नॉर्थ कोरियाई फिल्में दिखाने की तैयारी है. इनमें ‘डेज एंड नाइट्स ऑफ कॉन्फ्रंटेशन’ सबसे खास है, जो एक असल धमाके की घटना पर आधारित है. साथ ही, बच्चों का मशहूर कार्टून ‘बॉय जनरल’ भी दिखाया जा सकता है, जो एक नन्हे वॉरियर की कहानी है.(फोटो साभार: IMDb)

दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल करीब 5 दिन चलेगा, जिसमें 60 देशों की करीब 175 फिल्में दिखाई जाएंगी, उन पर चर्चा होगी. इवेंट में फिल्ममेकर्स, आर्टिस्ट और दर्शक हिस्सा लेंगे, जिसका आयोजन नई दिल्ली के आईजीएनसीए और डॉक्टर आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में होगा. फिल्म ’72 सिगन’ नॉर्थ कोरिया की नजर से कोरियाई वॉर के तीन दिनों को बयां करता है और बताता है कि साउथ कोरिया ने युद्ध शुरू किया था. कोरियाई युद्ध के इतिहासकार बताते हैं कि लड़ाई तब शुरू हुई थी, जब किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग ने सोवियत की मदद से साउथ कोरिया में हमला किया था. रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, ’72 सिगन’ रिलीज के तुरंत बाद करीब 5 महीने तक बैन रही थी. इसे नॉर्थ कोरिया स्टेट टीवी पर जनवरी 2025 में दोबारा रिलीज किया गया.(फोटो साभार: IMDb)

दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक चाहते हैं कि भारतीय दर्शक पहली बार नॉर्थ कोरियाई सिनेमा का स्वाद चखें. हालांकि, नॉर्थ कोरिया को इस फेस्टिवल का ‘कंट्री पार्टनर’ बनाने का फैसला अभी सरकार की मंजूरी के इंतजार में है. अधिकारियों का कहना है कि चूंकि भारत के प्योंगयांग के साथ पुराने संबंध हैं, इसलिए यह एक अच्छा मौका हो सकता है. रूस और चीन जैसे देशों को तो पहले ही पार्टनर बनने की हरी झंडी मिल चुकी है. ऑर्गेनाइजर का मानना है कि फिल्में दो देशों के बीच रिश्तों को जोड़ने का सबसे अच्छा जरिया होती हैं. (फोटो साभार: IMDb)

साल का फिल्म फेस्टिवल काफी धमाकेदार होने वाला है, जिसका उद्घाटन मशहूर फिल्मकार अदूर गोपालकृष्णन करेंगे. इस बार बंगाली सिनेमा के दिग्गज उत्तम कुमार की 100वीं जयंती पर एक खास ट्रिब्यूट दिया जाएगा. बंगाली फिल्मों के शौकीनों के लिए एक और अच्छी खबर है कि 2025 की फिल्म ‘पुरातन’ भी यहां दिखाई जाएगी, जिसमें शर्मिला टैगोर और रितुपर्णा सेनगुप्ता जैसी बड़ी कलाकार नजर आएंगी. यह फेस्टिवल पुराने और नए सिनेमा का एक बेहतरीन संगम साबित होने वाला है. (फोटो साभार: IMDb)

फेस्टिवल में सिर्फ फिल्में ही नहीं, बल्कि कलाकारों का सम्मान भी खास होगा. मोरक्को के डायरेक्टर मोहम्मद अहद बेंसौदा को उनकी फिल्म के लिए सम्मानित किया जाएगा. साथ ही, सुरों की दुनिया से बांग्लादेश की रूना लैला को ‘मीनार-ए-दिल्ली’ अवॉर्ड और भारत की मशहूर गायिका उषा उत्थुप को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ अवॉर्ड दिया जाएगा. कुल मिलाकर, यह इवेंट दिल्ली में पूरी दुनिया के सिनेमा और संस्कृति का एक शानदार मेला बनने जा रहा है, जहां हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास होगा. (फोटो साभार: IMDb)


