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कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर पैसा कमाती हैं, बल्कि कल्ट बनकर भी उभरती हैं. 1994 में रिलीज हुई ‘दिलवाले’ ऐसी ही एक धमाकेदार फिल्म थी, जिसने अजय देवगन को एक सीरियस एक्टर के तौर पर स्थापित किया और सुनील शेट्टी को एक वफादार दोस्त के तौर पर नई ग्लोबल पहचान दी. हैरी बावेजा के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म इतनी जबरदस्त सफल रही कि थिएटर 25 हफ्ते या 175 दिनों तक हाउसफुल रहे.
नई दिल्ली. 90 का दशक बॉलीवुड के लिए एक बदलाव का दौर था, जहां एक्शन का दौर खत्म हो रहा था और रोमांस शुरू हो रहा था. लेकिन 4 फरवरी, 1994 को एक ऐसी फिल्म स्क्रीन पर आई, जिसमें इन दोनों जॉनर का ऐसा धमाकेदार मिश्रण था कि दर्शक इसके दीवाने हो गए. हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘दिलवाले’ की. अजय देवगन और सुनील शेट्टी की ऑन-स्क्रीन जोड़ी का जादू आज 32 साल बाद भी वैसा ही है.

आज के समय में फिल्में अक्सर 100 करोड़ क्लब में शामिल हो जाती हैं, लेकिन अक्सर दो हफ्ते के अंदर थिएटर से हट जाती हैं. ‘दिलवाले’ के साथ ऐसा नहीं था. यह फिल्म देश भर के सिंगल-स्क्रीन थिएटर में 25 हफ्ते (175 दिन) तक चली थी. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय छोटे शहरों में फिल्म का 100 दिन का सफर इतना ज्यादा था कि जश्न मनाया गया था. विकिपीडिया के आंकड़ों के अनुसार, यह फिल्म उस साल की 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी और इसने अजय और सुनील को रातोंरात डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच पसंदीदा बना दिया.

‘दिलवाले’ को अजय देवगन के करियर की सबसे मुश्किल फिल्मों में से एक माना जाता है. फिल्म के पहले हाफ में एक पागल प्रेमी (अरुण) के रूप में उनकी परफॉर्मेंस रोंगटे खड़े कर देने वाली थी. जिस तरह से उन्होंने हॉस्पिटल के सीन में अपनी बेबसी और फिर अचानक गुस्से के उभार को दिखाया, उससे साबित हो गया कि ‘फूल और कांटे’ का हीरो सिर्फ स्टंट के लिए नहीं, बल्कि अपनी आंखों से एक्टिंग करने के लिए बना था. ‘जीते जी मर गया’ जैसे डायलॉग ने उन्हें युवाओं के बीच एक नई इमेज दी.
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वहीं, ‘दिलवाले’ सुनील शेट्टी के लिए भी एक इमेज बदलने वाली फिल्म थी. फिल्म में उन्होंने इंस्पेक्टर विक्रम सिंह का रोल किया, जो अपने पागल दोस्त की इज्जत बचाने के लिए अपनी यूनिफॉर्म और यहां तक कि अपनी जान भी जोखिम में डाल देता है. माना जाता है कि ‘दिलवाले’ के म्यूजिक ने इसकी सफलता में 50% से ज्यादा का योगदान दिया.

नदीम-श्रवण की जोड़ी ने एक के बाद एक चार्टबस्टर गाने दिए. ‘कितना हसीन चेहरा’ गाना उस समय हर रेडियो स्टेशन और शादी की खास बात बन गया था. कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाजों ने ‘मौका मिलेगा तो हम’ गाने को अमर बना दिया और ‘जीता था जिसके लिए’ आज भी इसे टूटे दिलों का एंथम माना जाता है. कहा जाता है कि गानों की पॉपुलैरिटी इतनी ज्यादा थी कि लोग इन्हें सुनने के लिए बार-बार थिएटर जाते थे.

किसी भी फिल्म की सफलता उसके विलेन पर भी निर्भर करती है. ‘मामा ठाकुर’ के रोल में परेश रावल ने जो क्रूरता दिखाई, उससे दर्शकों में उनके लिए नफरत भर गई. उनके डायलॉग और बॉडी लैंग्वेज ने फिल्म में टेंशन बनाए रखा, जिससे ‘दिलवाले’ एक सिंपल मसाला फिल्म से इमोशनल थ्रिलर बन गई.

इस फिल्म ने उस समय के मिडिल क्लास समाज की नब्ज पकड़ी. इसने परिवार, त्याग, धोखे और आखिर में इंसाफ की कहानी बताई, जिसे भारतीय दर्शकों ने हमेशा पसंद किया है. कहा तो ये भी जाता है कि इसके 175 दिनों तक थिएटर में चलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि इसे मेल और फीमेल दोनों दर्शकों ने बराबर पसंद किया. महिलाओं को फिल्म का इमोशनल ड्रामा और गाने पसंद आए, जबकि पुरुषों को अजय और सुनील का जबरदस्त एक्शन पसंद आया.


