सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास धार्मिक प्रथाओं में ‘अंधविश्वास’ निर्धारित करने का अधिकार है. केंद्र की इस दलील को खारिज करते हुए कि अदालतें धर्म की विशेषज्ञ नहीं हैं, पीठ ने कहा कि विधायिका की चुप्पी पर न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती. नौ जजों की पीठ अब यह तय करेगी कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है और क्या स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर परंपराओं में सुधार किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास धार्मिक प्रथाओं में ‘अंधविश्वास’ निर्धारित करने का अधिकार है. केंद्र की इस दलील को खारिज करते हुए कि अदालतें धर्म की विशेषज्ञ नहीं हैं, पीठ ने कहा कि विधायिका की चुप्पी पर न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती. नौ जजों की पीठ अब यह तय करेगी कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है और क्या स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर परंपराओं में सुधार किया जा सकता है.












