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ईरान में फंसे एयरमैन की धड़कने सुन रहा था अमेरिका, CIA का दुर्लभ उपकरण ‘घोस्ट मर्मर’ बना कवच

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Published On: April 8, 2026

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होमदुनियाअमेरिका

ईरान में फंसे एयरमैन की धड़कने सुन रहा था US, दुर्लभ टेक ‘घोस्ट मर्मर’ बना कवच

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American Airman Rescue Operation In Iran Story: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के बावजूद शिया मुल्क से अपने एयरमैन को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका द्वारा चलाए गए ऑपरेशन से जुड़ी कहानियां थम नहीं रही हैं. इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपनी बड़ी ताकत झोंक दी थी. उसके करीब 170 एयरक्राफ्ट इस ऑपरेशन में जुटे रहे. लेकिन, इन सबके बीच सीआईए का एक बेहद एडवांस टेक डिवाइस घोस्ट मर्मर सबसे बड़ा रक्षा कवच साबित हुआ. इस डिवाइस से अमेरिका करीब 40 मील दूर से पहाड़ियों में फंसे अपने एयरमैन की दिल की धड़कने सुन ली थी.

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इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अमेरिकी नेवी के सील कमांडों ने अंजाम दिया. फाइल फोटो-रायटर

American Airman Rescue Operation In Iran Story:  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की घोषणा हो गई है. लेकिन, इस जंग से जुड़ी कथाएं और कहानियां खत्म नहीं हो रही हैं. बीते दिनों अमेरिका ने ईरान की पहाड़ियों में फंसे अपने एयरमैन को बचाने के लिए जिस तरह से ऑपरेशन चलाया उसको देखकर दुनिया हैरान रह गई. इस ऑपरेशन में अमेरिका ने बॉम्बर, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर सहित करीब 170 विमानों का इस्तेमाल किया. इस ऑपरेशन में उसने अपना ठीक-ठाक नुकसान भी करवाया. हालांकि इस ऑपरेशन का बैक बोन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की जानकारी और अपने एयरमैन को लोकेट करने की उसकी क्षमता थी.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के दुश्मन इलाके में 48 घंटे तक छिपे अपने एयरमैन की दिल की धड़कन सुनकर उसे बचाया. सीआईए का अत्याधुनिक और अत्यंत गोपनीय उपकरण ‘घोस्ट मर्मर’ पहली बार किसी वार जोन में इस्तेमाल हुआ और उसने लगभग गायब हो चुके अमेरिकी एयरमैन की जान बचा ली. यह उपकरण इंसान की हार्टबीट से निकलने वाले बेहद कमजोर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को दूर से पहचानने में सक्षम है. ‘घोस्ट’ शब्द गायब हो चुके व्यक्ति को ढूंढने की क्षमता को दर्शाता है, जबकि ‘मर्मर’ हृदय की धड़कन की लय को. इस उपकरण का नाम ही इसकी अनोखी ताकत बयान कर रहा है.

क्या थी पूरी घटना

बीते तीन अप्रैल को ईरान के दक्षिणी इलाके में अमेरिकी वायु सेना का F-15E स्ट्राइक ईगल विमान ईरानी मिसाइल की चपेट में आकर गिर गया. विमान में सवार दोनों क्रू मेंबर्स में से पायलट को कुछ घंटों में ही रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन वीपन्स सिस्टम ऑफिसर (कर्नल रैंक) ‘ड्यूड 44 ब्रावो’ क्रैश साइट से दूर पहाड़ियों के बीच घायल हालत में दो दिन तक छिपे रहे. ईरानी सुरक्षा बल उनकी तलाश में जुटे हुए थे. एयरमैन ने अपना इमरजेंसी बेकन चालू किया था, लेकिन सटीक लोकेशन नहीं मिल रही थी. ठीक इसी वक्त सीआईए ने अपना दुर्लभ उपकरण ‘घोस्ट मर्मर’ एक्टिवेट किया.

रिपोर्ट्स के अनुसार यह उपकरण 40 मील यानी करीब 64 किलोमीटर दूर से एयरमैन की हार्टबीट को पकड़ने में सफल रहा. इससे अमेरिकी खुफिया एजेंसी को पुष्टि हो गई कि ‘ड्यूड 44 ब्रावो’ अभी जिंदा हैं. इसी जानकारी के आधार पर अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और उन्हें सुरक्षित निकाल लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में कहा कि पायलट को 40 मील दूर से डिटेक्ट किया गया था. सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने भी पुष्टि की कि एजेंसी ने एयरमैन के सर्वाइवल की वेरिफिकेशन कर ली थी.

‘घोस्ट मर्मर’ तकनीक

यह उपकरण क्वांटम मैग्नेटोमेट्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल है. सिंथेटिक डायमंड में बने सूक्ष्म सेंसर्स इंसान के दिल की धड़कन से पैदा होने वाले बेहद कमजोर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को पकड़ सकते हैं. एआई सॉफ्टवेयर इन सिग्नलों को पर्यावरणीय नॉइज से अलग करके एक व्यक्ति की यूनिक हार्टबीट सिग्नेचर को पहचान लेता है. सूत्रों ने इसे स्टेडियम में किसी एक की आवाज सुनने जैसा बताया, लेकिन सैकड़ों वर्ग मील के रेगिस्तानी इलाके में. ईरान के रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाके में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस बहुत कम था, जिससे उपकरण को क्लीन एनवायरनमेंट मिला. रात के समय थर्मल कंट्रास्ट भी मजबूत था, जिसने सिग्नल को और साफ करने में मदद की.

इस ‘घोस्ट मर्मर’ को लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है. इसे पहले ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर पर टेस्ट किया गया था. भविष्य में इसे F-35 फाइटर जेट्स पर भी लगाने की योजना है. यह तकनीक अभी भी कुछ सीमाओं से बंधी है. यह सबसे अच्छा कम भीड़भाड़ वाले इलाकों में काम करती है और सिग्नल एनालिसिस में समय लेती है. फिर भी, दुश्मन क्षेत्र में फंसे सैनिकों को ढूंढने के लिए यह एक राम बाड़ साबित हो सकती है.

About the Author

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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