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Salman Khan Latest News: सलमान खान ने एनसीडीआरसी में दावा किया कि जयपुर उपभोक्ता आयोग ने उनके साथ अन्याय किया है. ‘राजश्री इलायची’ विज्ञापन विवाद में उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी हुआ जबकि उन्हें आदेश की प्रमाणित कॉपी तक नहीं दी गई. मामला अब उपभोक्ता कानून और सेलिब्रिटी जिम्मेदारी पर बड़ी बहस बन गई है.
राजस्थान के कंज्यूमर कोर्ट में क्या है सलमान खान का केस (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं. इस बार मामला किसी फिल्म या आपराधिक केस का नहीं बल्कि भ्रामक विज्ञापन से जुड़ा है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान सलमान खान ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में दलील दी कि उनके साथ ‘अन्याय’हो रहा है और निचली उपभोक्ता अदालत की कार्यवाही प्रक्रिया के खिलाफ है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद ‘राजश्री इलायची’ के विज्ञापन से जुड़ा है जिसमें सलमान खान ब्रांड एंबेसडर हैं. जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग में अधिवक्ता योगेंद्र बडियाल ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि यह विज्ञापन वास्तव में पान मसाला को प्रमोट करता है.यह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भ्रामक विज्ञापन है. इसके बाद जिला आयोग ने 6 जनवरी 2026 को एक अंतरिम आदेश पारित करते हुए कि सलमान खान समेत अन्य प्रतिवादियों को ऐसे विज्ञापन न चलाने का निर्देश दिया.
जमानती वारंट क्यों जारी हुआ?
शिकायतकर्ता ने बाद में आरोप लगाया कि इस आदेश के बावजूद सलमान खान से जुड़ा एक होर्डिंग प्रदर्शित किया गया. यह आदेश का उल्लंघन है और इस पर 15 जनवरी 2026 को जिला आयोग ने सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया.
सलमान खान ने दी क्या दलील?
सलमान खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि उन्हें इस आदेश की कोई जानकारी नहीं दी गई. आदेश की तामील नहीं हुई और प्रमाणित कॉपी मांगने के बावजूद उन्हें नहीं दी गई. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि जब आदेश की आधिकारिक कॉपी ही नहीं दी गई तो उसके उल्लंघन का आरोप कैसे लगाया जा सकता है? याचिका में साफ कहा गया कि याचिकाकर्ता को आदेश की जानकारी नहीं थी और इसे कभी तामील नहीं किया गया.
राज्य आयोग से भी नहीं मिली राहत
सलमान खान ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए राजस्थान स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रसल कमीशन का दरवाजा खटखटाया लेकिन 16 मार्च 2026 को राज्य आयोग ने उनकी अपील खारिज कर दी. जिला आयोग के आदेश को सही ठहराया.


