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Amitabh Bachchan 1978 Superhit Movies : जिस हीरो के बॉलीवुड इंडस्ट्री की कोई हीरोइन काम नहीं करना चाहती थी, जिसे मजबूरी में अरुणा ईरानी के साथ काम करना पड़ा, उसी हीरो का जब समय पलटा तो कयामत आ गई. जो प्रोड्यूसर-डायरेक्टर इस हीरो को देखकर मुंह फेर लेते थे, वहीं हाथ जोड़े दरवाजे पर खड़े रहते थे. इस हीरो को स्टारडम तक पहुंचाने का श्रेय किशोर कुमार की बुलंद आवाज, उनके गानों को भी जाता है. इस एक्शन हीरो ने करियर में वो मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. एक मौका तो ऐसा भी आया जब एक साल में इस हीरो ने चार सुपरहिट फिल्में दीं. इन चारों फिल्मों में किशोर कुमार के ब्लॉकबस्टर गाने थे. वो हीरो कौन था और वो चार फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं……..
जिस हीरो के साथ कोई हीरोइन काम नहीं करना चाहती थी, जिसकी लगातार 7 फिल्में फ्लॉप हुई, मनहूस का टैग मिला, उसकी किस्मत यूपी के बिजनौर से ताल्लुक रखने वाले डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने बदली. बस एक फिल्म और रातोंरात जिंदगी बदल गई. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की. 1973 में आई फिल्म जंजीर से वो रातोंरात सुपर स्टार बने थे. एंग्रीमैन का नाम मिला. 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ और ‘दीवार’ से उन्होंने अपना स्टारडम स्थापित किया. तीन साल बाद 1978 में अमिताभ बच्चन की एकसाथ चार फिल्में आईं और चारों ही सुपरहिट रही. ये फिल्में थीं : मुकद्दर का सिकंदर, कसमे वादे, त्रिशूल और डॉन. चारों फिल्मों में किशोर कुमार के कालजयी गाने थे.

अमिताभ बच्चन ने अपना स्टारडम 1978 में स्थापित किया. साल की शुरुआत में उनकी एक फिल्म ‘गंगा की सौगंध’ आई थी. यह मूवी 10 फरवरी 1978 को रिलीज हुई थी. अमिताभ और रेखा की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इस फिल्म का एक गाना ‘मानो तू मैं गंगा मां हूं, ना मानो तो बहता पानी’ आज भी धार्मिक स्थलों में सुनाई दे जाता है. यह गाना गीतकार अनजान ने लिखा था. फिल्म औसत ही रही. फिर क्या था, अप्रैल माह में अमिताभ की बॉक्स ऑफिस पर ऐसी आंधी कि बड़े-बड़े स्टार सहम गए. ‘कसमे वादे’ मूवी अप्रैल 1978 में रिलीज हुई थी. रमेश बहल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ‘अमिताभ-राखी’ की जोड़ी थी. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी. फिल्म में रणधीर कपूर-नीतू सिंह, अमजद खान, प्राण, बिंदु अहम भूमिकाओं में थे.

‘कसमे वादे’ मूवी के गाने गुलशन बावरा ने लिखे थे. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘कसमे वादे निभाएंगे हम’ खूब पॉप्युलर हुआ था. इस गाने के दो वर्शन फिल्म में रखे गए थे. दोनों ही वर्शन में किशोर कुमार-लता मंगेशकर की आवाज थी. इस गाने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. आरडी बर्मन गीतकार गुलशन बावरा के घर गए थे. आरडी बर्मन ने हांडी उठाई और बजाते हुए कहा गुलशन बावरा की पत्नी अंजू से कहा – ‘सरसों दा साग बना दे अंजू, मक्की दी रोटी बना दे अंजू’ इसी गाने को बदलकर ‘कसमें वादे निभाएंगे हम, मिलते रहेंगे जनम जनम’ किया गया. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘याद’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘कसमे वादे’ किया गया. राखी को इस फिल्म में अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा फीस मिली थी. बॉक्स ऑफिस पर यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.
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अगले ही महीने में यानी मई 1978 में अमिताभ बच्चन की एक और एक्शन फिल्म आई जिसका नाम ‘त्रिशूल’ था. इस फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. यश चोपड़ा ने ही इससे पहले ‘दीवार’ बनाई थी. दोनों फिल्मों के प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. राइटर सलीम-जावेद ही थे. त्रिशूल फिल्म का बेसिक आइडिया 1968 में आई धर्मेंद्र-तनूजा-जयललिता की फिल्म ‘इज्जत’ से ही लिया गया था. सलीम-जावेद ने स्टोरी सबसे पहले जीतेंद्र को सुनाई थी. फिर स्क्रिप्ट राजेंद्र कुमार के पास पहुंची. इस स्क्रिप्ट पर राजेंद्र कुमार-जीतेंद्र दोनों ही फिल्म बनाना चाहते थे. अंत में इसे गुलशन राय ने प्रोड्यूस किया. संजीव कुमार ने इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के बराबर पैसे लिए थे.

‘त्रिशूल’ फिल्म में अमिताभ बच्चन-राखी, शशि कपूर-हेमा मालिनी लीड रोल में थे. सबके आकर्षण का केंद्र संजीव कुमार थे. फिल्म का प्रीमियर देखकर प्रोड्यूसर गुलशन राय बहुत निराश हुए थे. वो समझ गए कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. उन्होंने यश चोपड़ा से फिल्म को बचाने का उपाय पूछा. यश चोपड़ा ने सलीम-जावेद के साथ मिलकर फिल्म की 45 दिन की शूटिंग फिर से की. कमियों को दूर किया और फिल्म में अमिताभ बच्चन के एंबुलेंस सीन डाले गए. ये सीन्स फिल्म के लिए टर्निंग प्वॉइंट बन गए. फिल्म में म्यूजिक खय्याम का था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. फिल्म के ज्यादातर गानों में किशोर कुमार-लता मंगेशकर की आवाज थी. किशोर कुमार के गाने ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है’, ‘जानेमन तुम कमाल करती हो’ आज भी हिट है. रिवेंज की कहानी पर बनी यह मूवी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी.

डायरेक्टर-प्रोड्यूसर प्रकाश मेहरा दिलीप कुमार की देवदास और राज कपूर की ‘संगम’ फिल्म से बहुत इंस्प्यार्ड थे. इन दोनों फिल्मों की कहानी को मिलाकर कहानी तैयार की गई. फिल्म के सदाबहार गानों ने मूवी में चार चांद लगा दिए. रेखा पर ‘सलाम-ए-इश्क मेरी जां, जरा कबूल कर लो, तुम हमसे प्यार करने की जरा सी भूल कर लो’ आइकॉनिक सॉन्ग फिल्माया गया था. सच्चा प्यार किसी को नहीं मिलता, फिल्म का बेसिक आइडिया इसी पर बेस्ड था. फिल्म में दिखाया गया है कि अमजद खान रेखा को एकतरफा प्यार करते हैं. रेखा अमिताभ को प्यार करती है. अमिताभ बचपन की फ्रेंड राखी को प्यार करते हैं और राखी विनोद खन्ना को प्यार करती हैं. फिल्म में अमिताभ का डेथ सीन दर्शकों की आंखों में आंसू ला देता है. फिल्म का बजट 1 करोड़ था और मूवी ने 8.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह मूवी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.

डॉन फिल्म में अमिताभ का डबल रोल था. कल्याण जी -आनंद जी का सदाबहार म्यूजिक था. गीतकार अनजान थे. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ किशोर कुमार ने ही गाया था. इस गाने के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. उन्होंने अपना अवॉर्ड प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी को समर्पित किया था. डॉन फिल्म का कहानी शम्मी कपूर की 1962 की फिल्म ‘चाइना टाउन’ से इंस्पायर्ड थी. फिल्म का क्लाइमैक्स एक पार्क में नकली कब्रगाह बनाकर किया गया था. बिना प्रमोशन के रिलीज हुई इस फिल्म ने अमिताभ को बॉलीवुड इंडस्ट्री का ‘डॉन’ बना दिया.

फिर आया अक्टूबर का महीना. अक्टूबर 1978 में एक ऐसी फिल्म आई जिसने हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया. ‘संगम’ और ‘देवदास’ फिल्मों की कहानी को मिलाकर प्रकाश मेहरा ने कहानी तैयार करवाई. इस फिल्म का नाम था : मुकद्दर का सिंकदर. फिल्म का बेसिक आइडिया था कि सच्चा प्यार कई बार नसीब नहीं होता. फिल्म में अमजद खान रेखा को एकतरफा प्यार करते हैं. रेखा अमिताभ को प्यार करती है. अमिताभ बचपन की फ्रेंड राखी को प्यार करते हैं और राखी विनोद खन्ना को प्यार करती हैं.

फिल्म के सदाबहार गानों का म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी ने ही कंपोज किया था. फिल्म का सबसे आइकॉनिक सॉन्ग ‘रोते हुए आते हैं सब, वो मुकद्दर का सिकंदर’ किशोर कुमार ने गाया था. इसका सैड वर्शन मोहम्मद रफी ने गाया था. 1 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 8.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर मूवी साबित हुई थी. यह इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. 70 के दशक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म में शुमार है. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म प्रकाश मेहरा के पोरी करियर की सबसे कमाऊ फिल्म है.


