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4 बॉम्बर, 64 फाइटर, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर, 13 रेस्क्यू… ईरान से पायलट निकालने की कहानी डोनाल्ड ट्रंप की जुबानी

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Published On: April 7, 2026

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America Airmen Rescue Operation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में गिराए गए एफ 15ई जेट के पायलट और डब्ल्यूएसओ की हाई रिस्क रेस्क्यू डिटेल बताई है. उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में 170 से ज्यादा विमान लगे थे. इसमें बॉम्बर और फाइटर जेट शामिल थे. दो अलग-अलग ऑपरेशन चलाए गए और फिर दोनों एयरमेन को रेस्क्यू कर लिया गया.

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प्रेस कांफ्रेस में ऑपरेशन की जानकारी देते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- रायटर

America Airmen Rescue Operation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान में गिराए गए F-15E फाइटर जेट के क्रू मेंबर्स को वहां से निकालने की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा दिया. उन्होंने बताया कि इस हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 170 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य विमान शामिल थे. ट्रंप ने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे साहसी बचाव कार्रवाइयों में से एक बताया. घटना की शुरुआत पिछले शुक्रवार को हुई जब ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में अमेरिकी वायुसेना का F-15E स्ट्राइक ईगल जेट को दुश्मन ने गिर गया. जेट में सवार पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) दोनों ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई, लेकिन वे ईरानी क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर लैंड कर गए. पायलट को जल्दी ही रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन WSO लगभग 48 घंटे तक दुश्मन की नजरों से बचते हुए पहाड़ी इलाके में छिपे रहे.

ट्रंप ने बताया कि पहले रेस्क्यू मिशन में पायलट को निकालने के लिए 21 विमानों का इस्तेमाल किया गया. इस ऑपरेशन में HH-60W जॉली ग्रीन II हेलिकॉप्टर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पायलट को उसी वक्त निकाल लिया गया, जो खुद में एक असामान्य और जोखिम भरा कदम था. हेलिकॉप्टर पर ईरानी सेना ने छोटे हथियारों से हमला किया, जिसमें एक हेलिकॉप्टर को कई हिट्स लगीं, लेकिन क्रू सुरक्षित बाहर निकल आए.

दूसरा ऑपरेशन

दूसरे और ज्यादा जटिल मिशन में WSO को रेस्क्यू करने के लिए करीब 155 विमान शामिल किए गए. इनमें 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट्स, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू एयरक्राफ्ट शामिल थे. ट्रंप ने कहा कि WSO काफी दूरी पर लैंड हुए थे. वे घायल अवस्था में खून बहाते हुए पहाड़ी पर चढ़ाई करते रहे. उन्होंने खुद अपने घावों का इलाज किया और ऊंचाई पर एक माउंटेन क्रेविस दरार में छिप गए. उन्होंने लगभग 48 घंटे तक ईरानी बलों से बचते हुए खुद को जिंदा रखा.

ट्रंप ने भावुक होकर कहा- यह हीरो वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ईरान की जमीन पर लगभग 48 घंटे तक कैप्चर होने से बचते रहे. जब आप घायल हों और खून बह रहा हो, तो यह बहुत लंबा समय होता है. सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने ब्रीफिंग के बाद एजेंसी की भूमिका बताई. उन्होंने इसे ‘नो-फेल मिशन’ करार दिया. रैटक्लिफ ने कहा कि सीआईए ने ह्यूमन एसेट्स और ऐसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, जो दुनिया की किसी भी अन्य खुफिया एजेंसी के पास नहीं है. उन्होंने ईरानी बलों को गुमराह करने के लिए एक डिसेप्शन कैंपेन यानी अफवाह फैलाई, जिससे ईरानी सैनिक भटक गए जबकि WSO जिंदा और छिपे हुए थे.

क्या थी डिसेप्शन कैंपेन

रैटक्लिफ ने कहा कि सीआईए ने ईरानियों को कन्फ्यूज करने के लिए डिसेप्शन कैंपेन चलाई, जो हमारे एयरमैन की तलाश में शिद्दत से लगे हुए थे. लेकिन हमारे एयरमैन माउंटेन क्रेविस में छिपे रहे जब तक कि उन्हें रेस्क्यू नहीं कर लिया गया. शनिवार रात सफल एक्सफिल्ट्रेशन के बाद हमारी इंटेलिजेंस बताती है कि ईरानी इस ऑपरेशन की सफलता से शर्मिंदा और अपमानित महसूस कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर सीआईए और मिलिट्री ने मिलकर इस मिशन को अंजाम दिया. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना कभी भी अपने सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ती. उन्होंने मिशन में जोखिम की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें भारी गोलीबारी हुई और कुछ अमेरिकी विमान रेत में फंस गए, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.

डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन की सफलता को अमेरिकी सैन्य शक्ति और समन्वय का नमूना बताया. WSO एक कर्नल रैंक के अधिका हैं. वह घायल अवस्था में थे लेकिन अब सुरक्षित हैं और रिकवर कर रहे हैं. इस ऑपरेशन ने दुनिया को दिखाया कि अमेरिका अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए कितनी बड़ी ताकत झोंक सकता है. ट्रंप ने कहा- हमने जो किया, वह इतिहास में दुर्लभ है. ईरान को हमारी क्षमता का अहसास हो गया होगा.

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संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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