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US Iran War News: ईरान में गिराए गए अमेरिकी F-15 जेट के क्रू मेंबर को बचाने के दौरान अमेरिका को शक था कि ईरान जाल बिछा रहा है. घायल पायलट 24 घंटे तक पहाड़ों में छिपा रहा, जिसके बाद करीब 200 स्पेशल फोर्सेज के जवानों ने हाई-रिस्क ऑपरेशन में उसे सुरक्षित निकाला.
वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान में गिराए गए अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के क्रू मेंबर को बचाने के ऑपरेशन को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस पूरे मिशन के दौरान अमेरिका को डर था कि ईरान जाल बिछाकर अमेरिकी सेना को फंसाने की कोशिश कर रहा है. यह ऑपरेशन सिर्फ एक सामान्य रेस्क्यू मिशन नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध के सबसे जोखिम भरे और जटिल अभियानों में से एक था, जिसमें तकनीक, खुफिया जानकारी और जमीनी लड़ाई तीनों का बड़ा रोल रहा.
रेडियो मैसेज ने बढ़ाया शक
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि जेट गिरने के बाद पायलट ने रेडियो पर सबसे पहला मैसेज भेजा- ‘God is good’. यह सुनकर शुरुआत में तो अमेरिकी अधिकारियों को इस पर शक हुआ. उन्हें लगा कि कहीं यह संदेश ईरान की ओर से भेजा गया फर्जी सिग्नल तो नहीं, जिससे अमेरिकी रेस्क्यू टीम को जाल में फंसाया जा सके. कुछ समय तक यह आशंका बनी रही कि पायलट शायद ईरानी कब्जे में है और उसकी लोकेशन के नाम पर गलत जानकारी भेजी जा रही है. हालांकि बाद में पुष्टि हुई कि पायलट जिंदा है और उसने यह संदेश अपनी धार्मिक आस्था के चलते भेजा था.
अमेरिकी पायलट ने खुद को कैसे बचाया?
इस बीच पायलट ने ईरान के पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाकर रखा. रिपोर्ट्स के मुताबिक वह घायल था और उसने एक संकरी चट्टानी दरार में छिपकर अपनी जान बचाई. ट्रंप ने दावा किया कि उसे पकड़ने के लिए ईरानी सैनिकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी लगाया गया था और इनाम की घोषणा की गई थी. ऐसे में पायलट के लिए हर पल खतरा बना हुआ था. अमेरिकी सेना ने सैटेलाइट, सर्विलांस सिस्टम और ‘बीपिंग सिग्नल’ के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की, लेकिन जमीन पर स्थिति बेहद जटिल थी क्योंकि इलाके में सैकड़ों IRGC सैनिक सक्रिय थे.
दो ऑपरेशन से बचाए पायलट
रेस्क्यू मिशन को दो हिस्सों में अंजाम दिया गया. पहले चरण में एक पायलट को दिन के उजाले में भारी गोलीबारी के बीच निकाल लिया गया. इसे अमेरिकी अधिकारी ने ‘बोल्ड एंड क्विक स्नैच’ ऑपरेशन बताया. दूसरा और ज्यादा खतरनाक ऑपरेशन रात में किया गया. इसके लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने ईरान के अंदर ही एक अस्थायी बेस बनाया. करीब 200 कमांडो इस मिशन में शामिल थे. दोनों क्रू मेंबर अलग-अलग जगह गिरे थे, जिससे ऑपरेशन और मुश्किल हो गया.
ईरान की रणनीति और अमेरिका की जवाबी चाल
इजरायल ने क्या मदद दी?
ट्रंप के मुताबिक इस ऑपरेशन में इजरायल ने ‘थोड़ी मदद’ की. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इजरायल ने पायलट की सटीक लोकेशन नहीं दी, लेकिन इलाके की स्थिति को लेकर खुफिया जानकारी साझा की. इसके अलावा इजरायली वायुसेना ने एक स्ट्राइक कर ईरानी बलों को उस क्षेत्र तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की, जिससे अमेरिकी ऑपरेशन को समय मिला.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें


