Last Updated:
Revenge Based Bollywood Movies : बदले की कहानी पर बनी फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाए हुए है. मूवी अब तक ₹1,492 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर चुकी है. बॉलीवुड में रिवेंज बेस्ड कहानी पर फिल्में बनाने का चलन बहुत पुराना है. 70 के दशक में तीन ऐसी फिल्में आई जिनकी कहानी बदले की थी.दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही फिल्मों में मोहम्मद रफी के कालजयी गाने थे. एक गाने के लिए तो रफी साहब को इकलौता नेशनल अवॉर्ड भी मिला. तीनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया. दो फिल्मों में धर्मेंद्र नजर आए थे तो एक में अमिताभ बच्चन को पहचान मिली.
70 के दशक में सिर्फ दो साल के अंतराल में तीन ऐसी फिल्में आई जिनकी कहानी बदले पर आधारित थी. तीनों ही फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. दो फिल्मों में धर्मेंद्र थे. एक मूवी अमिताभ बच्चन की थी. यही फिल्म उनके करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट बन गई. सबसे दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही फिल्मों में मोहम्मद रफी के कालजयी गाने थे. एक गाने के लिए तो उन्हें नेशनल-फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. ये फिल्में थीं : यादों की बारात, जंजीर और प्रतिज्ञा.

सबसे पहले बात ‘यादों की बारात’ की कर लेते हैं जिसका निर्देशन-प्रोडक्शन आमिर खान के पिता नासिर हुसैन ने किया था. फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा, तारिक खान, जीनत अमान, नीतू सिंह, अजीत और कैप्टन राजू लीड रोल में थे. आरडी बर्मन का म्यूजिक था. मजरूह सुल्तानपुरी गीतकार थे. ‘यादों की बारात’ में कुल 6 गाने थे. फिल्म के टाइटल ट्रैक ‘यादों की बारात निकली है दिल के द्वारे’ के दो वर्जन थे. एक वर्जन मोहम्मद रफी-किशोर कुमार ने गाया था. दूसरा वर्जन लता मंगेशकर, पद्मिनी कोल्हापुरे और सुष्मा श्रेष्ठ (पूर्णिमा) ने गाया था. फिल्म का पॉप्युलर गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ मूवी की पहचान बन गया. आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने इस कालजयी गीत को गाया था. यह गाना ‘इफ इट्स ट्यूजडे, दिस मस्ट बी बेल्जियम’ से इंस्पायर्ड था.

सलीम-जावेद की जोड़ी ने ‘यादों की बारात’ की स्क्रिप्ट-स्क्रीनप्ले लिखा था. फिल्म की कहानी बीआर चोपड़ा की ‘वक्त’ फिल्म से इंस्पायर्ड थी. दोनों फिल्मों में कई समानताए हैं. फिल्म में ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया गया था. फिल्म में आमिर खान ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था. मूवी ने करीब 4.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
Add News18 as
Preferred Source on Google

‘यादों की बारात’ फिल्म में बदले की कहानी थी. कहानी तीन बच्चों की थी. धर्मेंद्र अपने पिता के कातिल का चेहरा नहीं देख पाते हैं. कातिल को ढूंढते रहते हैं और अंत में बदला भी लेते हैं. फिल्म में एक्शन-रोमांस, ड्रामा, म्यूजिक, क्राइम-थ्रिल हर फॉर्मूला आजमाया गया था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘यादों की बारात निकली है दिल के द्वारे’ दो लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने गाया था.

मई 1973 को ही सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म आई जिसने बॉलीवुड को अमिताभ बच्चन जैसा महानायक दिया. ‘एंगी यंग मैन’ की छवि बनाई. प्रकाश मेहरा ने ही फिल्म के डायरेक्ट-प्रोड्यूसर थे. वैसे जंजीर फिल्म धर्मेंद्र के लिए बनाई जा रही थी. स्क्रिप्ट देवानंद-राजकुमार के पास पहुंची लेकिन सबने इनकार कर दिया. सलीम-जावेद के कहने पर प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन को फिल्म जंजीर में लिया. सलीम-जावेद ने ही ‘जंजीर’ फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी थी. यह कहानी भी बदले की थी. यादों की बारात और जंजीर की कहानी में फर्क सिर्फ इतना था कि ‘यादों की बारात में’ तीन बच्चे थे जबकि जंजीर में सिर्फ एक बच्चा था जो बड़ा होकर इंस्पेक्टर बनता है और जंजीर से अपने पिता के कातिल की पहचान करता है.

दरअसल, फिल्म समाधि और जंजीर की स्क्रिप्ट एक्सचेंज हुई थी. धर्मेंद्र ने समाधि की स्किप्ट के बदले जंजीर की कहानी देने को कहा था. धर्मेंद्र ने फीस लेने से इनकार कर दिया था. इसके बदले प्रॉफिट आधा-आधा तय हुआ था. उसी दौरान धर्मेंद्र के भाई ‘प्रतिज्ञा’ बना रहे थे. धर्मेंद्र ने छह माह का समय मांगा लेकिन ऐसा ना हो सका. एक्टर प्राण के बेटे ने प्रकाश मेहरा को बॉम्बे टू गोवा देखने के की सलाह दी. उसमें अमिताभ बच्चन की शत्रुघ्न सिन्हा से फाइट का एक सीन था. उस फाइट सीन को देखकर अमिताभ को फिल्म में लिया गया. जया भादुड़ी को अमिताभ के कहने पर लिया.

जंजीर फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी-आनंद जी ने कंपोज किया था. एक्शन मूवी में कुल 5 गाने रखे गए थे. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘दीवाने हैं दीवानों को ना घर चाहिए’ मोहम्मद रफी-लता मंगेशंकर ने गाया था. जब यह गाना रिकॉर्ड हो रहा था तो रफी साहब रोजे में थे. संगीतकार कल्याणजी आनंदजी भी रिकॉर्डिंग से संतुष्ट थे. हालांकि, लता मंगेशकर को अपने परफॉर्मेंस पर कुछ नजर कमी नजर आ रही थी. जब रफी साहब स्टूडियो से बाहर निकल रहे थे तो गीतकार गुलशन बावरा दौड़कर पास पहुंचे. उन्होंने रफी साहब को बताया कि यह यह गाना पर्दे पर उन पर फिल्माया जाना है. यह सुनकर रफी साहब ने कहा कि मैंने तो गाना अमिताभ बच्चन की स्टाइ ल में गाया. वो स्टूडियो में दोबारा लौटे और गुलशन बावरा को ध्यान में रखते हुए गाना गाया और लता जी के साथ गाने को फिर से रिकॉर्ड किया और गाना सुपर-डुपर हिट साबित हुआ.

1974 में धर्मेंद्र की ‘दोस्त’ फिल्म हिट हुई तो उन्होंने डायरेक्टर दुलाल गुहा से पहले तो माफी मांगी, फिर 50 हजार रुपये साइनिंग अमाउंट देकर अपनी अगली फिल्म प्लान की. यह धर्मेंद्र के होम प्रोडक्शन की फिल्म थी. कहानी उनके भाई अजीत सिंह ने ही लिखी थी. नाबेंदु घोष ने स्क्रीनप्ले जबकि डायलॉग सफीक अंसारी ने लिखे थे. फिल्म का नाम ‘प्रतिज्ञा’ था जो कि 27 जून 1975 को रिलीज हुई थी. प्रोड्यूसर विक्रम सिंह देवल और कंवरजीत सिंह थे. फिल्म में धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अजीत लीड रोल में थे. सत्येन कप्पू, अभि भट्टाचार्य, जोनी वॉकर, जगदीप, कैस्टो मुखर्जी, राममोहन, नाजिर हुसैन, लीला मिश्रा और इम्तियाज खान जैसे सितारे अहम भूमिकाओं में थे.

इसी फिल्म ने धर्मेंद्र की इमेज ‘धरम-गरम’ की बनाई. फिल्म में धर्मेंद्र के कैरेक्टर का नाम ‘अजीत’ था. इसे धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की बेस्ट फिल्म माना जाता है. दोनों के बीच फिल्म की शूटिंग के दौरान नजदीकियां भी बढ़ीं. प्रतिज्ञा फिल्म में म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बक्शी थे. फिल्म में कुल चार गाने थे. फिल्म के एक गाने’मैं जट यमला पगला दीवाना’ ने इतिहास रच दिया. इस गाने में एक मस्ती-चुलबुलापन था. इस गाना को धर्मेंद्र के पूरे करियर का सबसे यादगार गाना माना जाता है. इसकी रिकॉर्डिंग के दौरान खुद ही थिरकने लगे थे. मोहम्मद रफी ने गाने की रिकॉर्डिंग पूरी की और धर्मेंद्र से कहा कि मैं तो बहुत ही आराम से मस्ती भरे अंदाज में गाना रिकॉर्ड किया है. अब आपकी बारी है. देखते हैं कि आप कैसा डांस करते हैं. धर्मेंद्र ने हिम्मत जुटाई और अपने टिपिकल अंदाज में नाचना शुरू कर दिया. धर्मेन्द्र ने अपने ही अंदाज में ऐसा मस्त डांस किया कि आज तक यह गाना-डांस मशहूर है.

प्रतिज्ञा फिल्म की कहानी भी रिवेंज पर बेस्ड थी. धर्मेन्द्र का किरदार ट्रक ड्राइवर का था. फिर उसे पता चलता कि जिसे वो मां समझता है, वो उसकी मां नहीं है. उसके पिता को एक डाकू ने मार डाला था. धर्मेंद्र उस डाकू से बदला लेने के लिए निकल पड़ते हैं. प्रतिज्ञा फिल्म में धर्मेन्द्र चार अलग-अलग लुक में नजर आए थे. ट्रक ड्राइवर के लिए धर्मेंद्र वो बड़ी दाढ़ी-मूछों और लंबे बालों वाले लुक में थे तो इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह के रोल में बड़ी मूछे रखे थे. थानेदार इंद्रसिंह के रोल में धर्मेंद्र बिलकुल क्लीन शेव लुक में थे. एक बार पंजाबी लुक में दिखे थे. फिल्म के बजट की बात करें तो यह मूवी 80 लाख रुपये के बजट में बनी थे. मूवी ने कुल 3.5 करोड़ कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. प्रतिज्ञा फिल्म 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में पांचवे नंबर पर रही थी.


