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होर्मुज के मुद्दे पर टूट जाएगा NATO, दगाबाजी से भड़के ट्रंप ने कहा- ‘कागज के शेरों के साथ क्या रहना?’

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Published On: April 1, 2026

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Donald Trump Planning to Leave NATO: अमेरिका-ईरान जंग के बीच कई ऐसे पल आए, जब डोनाल्ड ट्रंप को नाटो की जरूरत पड़ी. ऐसी परिस्थिति में सभी देशों ने ये कहकर किनारे कर लिया कि ये उनकी लड़ाई नहीं है. अब ट्रंप ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में साफ कर दिया है कि वे इस संगठन से बाहर निकलने वाले हैं.

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डोनाल्ड ट्रंप. (Credit- Reuters)

Iran-US War News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ को सीधे बताया है कि वे NATO से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप का इस संगठन से गुस्सा वाजिब है क्योंकि हाल में ईरान युद्ध के दौरान इसके सदस्यों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया. कुछ देशों ने इसे अपनी लड़ाई नहीं बताकर किनारा कर लिया तो कुछ ने अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल तक अमेरिका को नहीं करने दिया.

ट्रंप ने नाटो के सदस्य देशों – ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, यूरोपीय संघ के देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसेना भेजकर मदद मांगी थी. आपको बता दें कि यह रणनीतिक जलमार्ग ईरान युद्ध के दौरान बंद हो गया है, जिससे वैश्विक तेल संकट पैदा हो रहा है. जब ट्रंप इसे खुलवाने के लिए नाटो देशों की मदद मांगी थी, तो जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों ने भी उन्हें मदद देने से इनकार कर दिया. इससे नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी लिखा था कि अब अमेरिका उनकी मदद नहीं करेगा, जिन्होंने उसकी मदद नहीं की है.

ईरान युद्ध पर मिला NATO से दगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए नाटो को पेपर टाइगर यानी कमजोर गठबंधन बताया है. उन्होंने कहा कि अब अमेरिका का इस रक्षा संधि से बाहर होने से पहले सोचना भी नहीं चाहिए. उनके इस फैसले से अमेरिका से नाराजगी वाला बताया जा रहा है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से ही नाटो पर भरोसा नहीं था और अब यह साफ हो गया है कि यूरोप एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी नाटो की कमजोरी को समझते हैं. उन्होंने यूक्रेन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहा, लेकिन बदले में उसे वैसा समर्थन नहीं मिला.
ट्रंप ने अखबार को बताया कि नाटो ने इस परीक्षा में फेल होकर उन्हें बहुत निराश किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब नाटो में रहने का फायदा नहीं देख रहा, क्योंकि सहयोगी देश कायर की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

अमेरिका NATO से निकला, तो क्या होगा?

यह ट्रंप का सबसे तीखा हमला है, वे इससे पहले ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी नाटो को लपेट चुके हैं लेकिन इस बार उनके तेवर ज्यादा गंभीर हैं. अगर वे सच में नाटो से बाहर निकलते हैं तो इसके कुछ गंभीर परिणाम होंगे –

  • यूरोप की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराएगा क्योंकि रूस के खिलाफ अमेरिकी छाता हट जाएगा.
  • नाटो का Article 5 कमजोर होगा, जिसमें सामूहिक रक्षा की बात है.
  • हालांकि कानूनी रूप से इसे करना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए कांग्रेस और सीनेट की मंजूरी लग सकती है, लेकिन ट्रंप इसे अपनी कार्यकारी शक्ति मानते हैं.

क्यों नाटो से चिढ़े हैं डोनाल्ड ट्रंप?

दरअसल ट्रंप ने ईरान युद्ध के दौरान नाटो से साथ मांगा था. पहले तो स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों ने उसे एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया. उसके बाद जब होर्मुज पर ईरान ने कब्जा किया, तो नाटो देश इसे खुलवाने के लिए अमेरिका के साथ नहीं आए. गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है और इसके बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल-गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आर्थिक संकट का खतरा भी बढ़ गया है. ये संकट यूरोप तक भी पहुंच चुका है और कई देशों में सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. बावजूद इसके ट्रंप का साथ देने कोई देश आगे नहीं आया, जिसके बाद अमेरिका ने घोषणा कर दी कि वो होर्मुज को उसी हाल पर छोड़कर ईरान से निकल आएगा. ऐसे में जिन देशों का तेल वहां फंसा है, वो अपना इंतजाम खुद कर लें.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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