ये कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका जो सोचकर उतरा था, उसका उल्टा हो रहा है. अमेरिका ने इसे आसान समझा था लेकिन ये उतना ही मुश्किल साबित हो रहा है. माना जा रहा है कि अमेरिका को इस युद्ध में झटके लग रहे हैं. वह इससे बाहर निकलना चाहता है और निकलने के लिए कोई बहाना या मुफीद तार्किक रास्ता देख रहा है. क्या आपको मालूम है कि अमेरिका के लिए ये पहला युद्ध नहीं है, जिसने उसे मुश्किल में डाला है. अमेरिका इससे पहले भी कम से कम पांच बार इसी तरह से तगड़ा झटका खा चुका है. दुनिया मानती है कि अमेरिका इसमें हार गया और वापस निकल गया.
तकनीक तौर पर कहा जा सकता है कि किसी भी देश ने अमेरिका को किसी पूर्ण युद्ध में निर्णायक रूप से नहीं हराया है, लेकिन अमेरिका को पांच बार लंबी लड़ाई के बाद रणनीतिक असफलताएं हाथ लीं और पीछे हटकर युद्ध छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा.
इतिहासकार अक्सर वियतनाम युद्ध (1955-1975) का ज़िक्र करते हैं, जिसमें उत्तरी वियतनाम और वियत कांग जैसे उसके सहयोगियों ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. इसके चलते वियतनाम की जीत हुई और पूरा देश कम्युनिज़्म सरकार और व्यवस्था के तहत एक हो पाया. इसकी चर्चा आगे करेंगे कि ये युद्ध कैसा था. अमेरिका ने इसे क्यों लड़ा और क्यों अमेरिका ने इसमें अपनी हार जैसी मान ली.
अमेरिका ने 20वीं सदी में अमेरिका ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध को छोड़कर करीब 20-25 बड़े युद्ध लड़े या सैन्य हस्तक्षेप किये. 21वीं सदी यानि मौजूदा सदी में ये संख्या भी 10 से ज्यादा पहुंच चुकी है.
अमेरिका ने वियतनाम को साम्यवादी देश बनने से रोकने के लिए उसे युद्ध की आग में झोंक दिया. 20 सालों तक अमेरिका ने उसे तहस नहस करने की कोशिश की लेकिन फिर हार मानकर वहां से निकलना पड़ा. (AI News18 Image)
वियतनाम में मिली मात
अब आइए सबसे सबसे उस युद्ध की बात करते हैं, जिसको अमेरिका ने बहुत लंबा लड़ा. ये 20 सालों तक 1955 से लेकर 1975 तक वियतनाम में उसके खिलाफ चला. इसमें अमेरिका ने अपनी सारी ताकत झोंक दी. बस परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को छोड़कर सबकुछ कर लिया. क्रूरता, अमानवीयता और ताकत दिखाई लेकिन इसके बाद भी हर मोर्चे पर उसे विफलता ही मिलती रही.
अमेरिका ने ये युद्ध केवल इसलिए शुरू किया था क्योंकि वो वियतनाम को एक कम्युनिस्ट सरकार के तहत नहीं देख सकता था. ये युद्ध मुख्य रूप से साम्यवाद के प्रसार को रोकने के लिए शुरू किया था, जो डोमिनो थ्योरी पर आधारित था यानी अगर दक्षिण वियतनाम गिर गया तो पूरा दक्षिण-पूर्व एशिया साम्यवादी हो जाएगा. इस युद्ध का विस्तार राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने किया.
इस युद्ध में अमेरिका ने करीब 58,000 सैनिक खोए, जिनमें अधिकारी भी शामिल थे. करीब 11 जनरल मारे गए. 1965-73 के बीच युद्ध पर $120 अरब से अधिक खर्च हुआ, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बढ़ी. ये लागत आज के मूल्य में $1 ट्रिलियन से ऊपर आंकी जाती है. यहां से अमेरिका को खाली हाथ निकलना पड़ा. पूरी दुनिया मानती है कि इस युद्ध में अमेरिका ने बुरी तरह पटखनी खाई थी. उसका घमंड चूर चूर हो गया.
अफगानिस्तान में अमेरिकी फौजों को आखिरकर 2021 में वहां से निकलना पड़ा. (AI News18 Image)
यही हाल अफगानिस्तान में हुआ
अमेरिका का यही हाल अफगानिस्तान में हुआ. अफ़गानिस्तान युद्ध 2001 से शुरू हुआ तो 2021 तक चलता रहा. अमेरिकी सेनाओं को आखिरकार ये देश छोड़कर निकलना पड़ा. शुरुआती सैन्य सफलताओं के बावजूद इसे अमेरिका की बड़ी रणनीतिक हार माना जाता है.
तीन और झटका देने वाले युद्ध
तीन युद्ध और इसी तरह के थे, जिसमें अमेरिका ने हार जैसा स्वाद चखा था. ये 1961 में क्यूबा के खिलाफ़ ‘बे ऑफ़ पिग्स’ आक्रमण था, जो फिदेल कास्त्रो को सत्ता से हटाने में विफल रहा. अमेरिका ने एक लड़ाई 1812 में ब्रिटेन के खिलाफ़ भी लड़ा, जिसे उसके लिए बड़ा झटका माना गया. इसमें कनाडा पर आक्रमण विफल रहा और वाशिंगटन, D.C. को जला दिया गया था, इस युद्ध का अंत एक गतिरोध संधि के साथ हुआ. अमेरिका ने कोरिया को एक करने के लिए 1950 में ताकत झोंक दी लेकिन उसमें भी वो नाकाम रहा. उत्तर और दक्षिण कोरिया दो देश बने. अमेरिका को युद्धविराम करना पड़ा.
17 अप्रैल 1961 में अमेरिका ने क्यूबा के “बे ऑफ पिग्स” पर आक्रमण कर दिया. ये अभियान बुरी तरह फ्लॉप रहा. (AI News18 Image)
क्यूबा में अमेरिका को पटखनी
17 अप्रैल 1961 में अमेरिका ने क्यूबा के “बे ऑफ पिग्स” पर आक्रमण कर दिया. सीआईए ने फिदेल कास्त्रो को सत्ता से हटाने के लिए करीब 1,400 क्यूबाई निर्वासितों को प्रशिक्षित कर क्यूबा के दक्षिणी तट पर उतारा. क्योंकि 1959 में कास्त्रो ने अमेरिका परस्त बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंका और कम्युनिस्ट शासन स्थापित किया. आक्रमणकारियों को कास्त्रो की सेना ने 72 घंटों में हराया. 100 से अधिक अमेरिकी-समर्थित विद्रोही मारे गए. 1,200 कैद हो गए.
इसने कास्त्रो को मजबूत किया और कैनेडी की छवि को नुकसान पहुंचाया. इस वजह से आजतक क्यूबा और अमेरिका के बीच तनातनी रहती है. इस समय भी ट्रंप प्रशासन तेल रोककर क्यूबा को परेशान करने में लगा हुआ है.
1812 में ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जाता है.तब ब्रिटेन की फौजें वाशिंगटन में घुस आईं (AI News18 Image)
जब ब्रिटेन से भिड़ा और हारा
1812 में ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जाता है. ये 18 जून 1812 से 24 दिसंबर 1814 तक चला. अमेरिका ने ब्रिटेन पर जबरन नाविक भर्ती और कनाडा सीमा पर ब्रिटिश समर्थन वाले मूल निवासियों के खतरों का आरोप लगाया. अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स मैडिसन ने युद्ध घोषित किया.
अमेरिका ने कनाडा पर कब्जे की योजना बनाई, जो तब ब्रिटिश उपनिवेश था. लेकिन डेट्रॉइट, क्वीनस्टन हाइट्स जैसे अभियानों में ब्रिटिश, कनाडाई मिलिशिया और मूल निवासियों ने उसे हराया. रसद कमजोरी और खराब योजना मुख्य कारण बने. 24 अगस्त 1814 को ब्रिटिश सेना ने चेसापीक खाड़ी से हमला कर वाशिंगटन पर कब्जा किया. उन्होंने व्हाइट हाउस, कैपिटल और अन्य इमारतें जला दीं, यह अमेरिकी राजधानी पर दुर्लभ हमला था.अमेरिका को अपमानजनक युद्धविराम करना पड़ा.
तब अमेरिका को उत्तर कोरिया से मुंह की खानी पड़ी
1950 में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया का समर्थन किया ताकि उत्तर कोरिया के आक्रमण को रोका जा सके. लेकिन उत्तर कोरिया कहां मानने वाला था. अमेरिका ने अपनी फौजें भेजीं. वहीं उत्तर कोरिया को सोवियत संघ और चीन का समर्थन था.
अमेरिका ने जनरल मैकआर्थर के नेतृत्व में उत्तर की ओर बढ़कर एकीकरण की कोशिश की, लेकिन चीन के हस्तक्षेप से उसका अभियान असफल रहा. 27 जुलाई 1953 को युद्धविराम हुआ. कोरिया अब भी विभाजित है, ये भी अमेरिका के लिए एक रणनीतिक झटका था. इस युद्ध में अमेरिका ने 36,000 से अधिक सैनिक खोए; कुल लाखों मौतें हुईं.


