नासा 1 अप्रैल को आर्टेमिस 2 मिशन लांच कर रहा है. इसमें चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर रवाना होंगे. ये पूरा मिशन 10 दिनों का होगा. वर्ष 1972 के अपोलो के बाद पहला ऐसा मिशन होगा जब मानव सबसे लंबे अंतरिक्ष उड़ान पर होंगे. क्या है ये मिशन क्या है, क्या उद्देश्य. क्या करेंगे अंतरिक्ष यात्री वहां.
इस मिशन के तहत विशालकाय एसएलएस रॉकेट को फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से छोड़ा जाएगा, जो ओरियन शटल यान को लेकर जाएगा.
इसके लिए चालक दल के सदस्य वर्षों से ट्रेनिंग ले रहे हैं. ये मुश्किल मिशन होगा. ऐसा मिशन अब तक हुआ नहीं है. इस मिशन में क्रू में जो चार लोग होंगे, उसमें एक महिला और तीन पुरुष हैं, उनके नाम वाइजमैन, नासा के विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन हैं.
दल का नेतृत्व वाइजमैन करेंगे, जो नौसेना के सेवानिवृत्त पायलट हैं. वह नासा के अंतरिक्ष यात्री दल में शामिल होने से पहले सैन्य अभियानों में भाग ले चुके हैं. उन्होंने 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की थी.
आर्टेमिस II का लक्ष्य क्या है, ये क्यों डिफरेंट है?
– इसकी सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि ये दस दिनों के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की ओर ले जा रहा है और वापस लाएगा, ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ है. इसमें विशालकाय रॉकेट ओरियन नामक यान को अंतरिक्ष में स्थापित करके चंद्रमा की ओर ले जाने का काम करेगा. ओरियन को चंद्रमा के चारों ओर घुमाने और वापस लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यान पर मौजूद जीवन रक्षक प्रणाली, संचार प्रणाली और नेविगेशन जैसी असंख्य प्रणालियों का परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों की मौजूदगी में किया जाएगा. पहला आर्टेमिस मिशन वर्ष 2022 में हुआ था, तब नासा ने मानवरहित यान को चांद की ओर भेजा था.
आर्टेमिस नासा का लंबे समय का प्रोग्राम है, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव की संभावनाओं का पता लगाना, वैज्ञानिक खोज करना, आर्थिक लाभ उठाना और आखिरकार मंगल पर इंसान भेजना है.
ये मिशन किस प्रकार चांद की ओर आगे बढ़ेगा?
– आर्टेमिस II की शुरुआत तब होगी जब एसएलएस रॉकेट फ्लोरिडा के एक लांचपैड से ओरियन को अपने टॉप पर रखकर उड़ान भरेगा. एसएलएस अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ओरियन से जुड़े रॉकेट के मुख्य भाग से अलग हो जाएगा. फिर ओरियन का इंजन इसे चंद्रमा तक ले जाएगा.
ओरियन जब विशालकाय रॉकेट से अलग होगा तो ये एक ट्रांसलूनर इंजेक्शन प्रक्रिया से गुजरेगा. ये इंजन को सक्रिय करके ओरियन को चंद्रमा की ओर उड़ान भरने के लिए तैयार करेगा. यह कुछ दिनों में चंद्रमा तक पहुंचेगा. उसके दूर के हिस्से की परिक्रमा करेगा.
इस मिशन में दस दिनों में क्या क्या होगा
-इसमें यान को पृथ्वी के आर्बिट से बाहर निकलने में एक दिन लगेंगे. उसके बाद चांद की ओर पहुंचने में 3-4 दिन लगेंगे. फिर ये करीब एक दिन तक चांद के चारों पर घूमता रहेगा. उसके बाद वापसी फिर चार दिन का समय लेगी.
तो क्या आर्टेमिस 2 चांद के आसपास तो घूमेगा लेकिन उस पर लैंडिंग नहीं करेगा.
– हां, ऐसा ही होगा. एस्ट्रोनॉट्स ओरियन पर सवार होकर चंद्रमा के चारों ओर घूमेंगे, लेकिन चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं करेंगे. यह 10 दिन का टेस्ट फ्लाइट है, जो भविष्य के चंद्रमा लैंडिंग मिशन्स की तैयारी करेगा.
ओरियन फिर वापस पृथ्वी की ओर कैसे लौटेगा
– अंतरिक्ष में तेज गति से यात्रा करने के बाद ओरियन को घर वापसी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा तो ओरियन की गति 25,000 मील प्रति घंटा होगी. जब वो अपनी गति धीमी करेगा तो उसको 5,000 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना करना पड़ेगा. कैप्सूल को सैन डिएगो के निकट प्रशांत महासागर में पैराशूट की मदद से उतरने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
आर्टेमिस II पर उड़ान भरने वाले अंतरिक्ष यात्री कौन हैं?
– इस मिशन के दौरान नासा का प्रतिनिधित्व दो अन्य अंतरिक्ष यात्री करेंगे: अनुभवी नौसेना पायलट ग्लोवर और कोच, जिन्होंने एजेंसी में एक विद्युत अभियंता के रूप में अपना करियर शुरू किया था और एक बार दक्षिणी ध्रुव पर एक अनुसंधान केंद्र में एक वर्ष बिताया था। दोनों पहले भी अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं.
अंतरिक्ष यात्री उड़ान के दौरान क्या करेंगे?
– अंतरिक्ष यात्री ओरियन के उड़ान भरने के तरीके का मूल्यांकन करेंगे, आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे. वैज्ञानिक और रिसर्च संबंधी रिसर्च करेंगे. आगे के जरूरी शोधों के लिए चंद्रमा के दूर के हिस्से की तस्वीरें लेंगे. वो चंद्रमा की सतह के दूर के कुछ हिस्सों को देखने वाले पहले मानव बन सकते हैं. इसके दौरान उनके स्वास्थ्य की भी जांच पर नजर रखी जाएगी.
मिशन के दौरान खानपान, सोना कैसे होगा
– ये सभी प्रयास ओरियन के क्रू मॉड्यूल में किए जाएंगे, जिसका रहने की जगह दो मिनीवैन के बराबर है. मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्री रोज करीब लगभग 30 मिनट व्यायाम करेंगे, जिसके लिए वे एक ऐसे उपकरण का उपयोग करेंगे जो उन्हें डेड लिफ्ट, रोइंग और अन्य व्यायाम करने की सुविधा देता है. वे झूलों में आठ-आठ घंटे की नींद लेंगे.
इसमें खाना गर्म करने के लिए एक विशेष रूप से निर्मित वार्मर है. प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री को रोज दो फ्लेवर्ड पेय पीने की अनुमति है, जिसमें कॉफी शामिल है. चालक दल रोज एक घंटे का साझा भोजन करेगा. इसके शौचालय खास तरह के हैं जो तरल और ठोस अपशिष्ट को कंटेनरों में खींच लेती है.
आर्टेमिस II के बाद क्या होगा?
– यदि सब कुछ ठीक रहा तो नासा अगले साल होने वाले आर्टेमिस III मिशन की ओर आगे बढ़ेगा. इस मिशन के दौरान नासा की योजना ओरियन को चालक दल के साथ चांद पर लैंड कराने की है. ये मिशन वर्ष 2028 में संभव है. साथ ही एलन मस्क की स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन द्वारा विकसित किए जा रहे चंद्र-लैंडर यानों के साथ डॉकिंग का अभ्यास कराने की भी.
आमतौर जब भी कोई रॉकेट स्पेस मिशन की ओर लांच किया जाता है तो ये पूर्व दिशा में ही क्यों होता है
– रॉकेट आमतौर पर पूर्व दिशा में लांच किए जाते हैं क्योंकि पृथ्वी उसी दिशा में घूमती है. पृथ्वी के घूमने से रॉकेट को थोड़ी अतिरिक्त गति मिलती है, लगभग एक तरह की शुरुआती बढ़त. इससे ईंधन की बचत होती है. कक्षा में पहुंचना आसान हो जाता है.
कक्षा में बने रहने के लिए, एक अंतरिक्ष यान को 17,500 मील प्रति घंटे की गति प्राप्त करनी होती है. पूर्व दिशा में प्रक्षेपण करने से पृथ्वी के घूमने की गति का उपयोग उस गति तक पहुंचने में सहायता के लिए किया जाता है.
कभी-कभी रॉकेट उत्तर या दक्षिण दिशा में लॉन्च किए जाते हैं। इसे ध्रुवीय कक्षा कहा जाता है और इससे अंतरिक्ष यान पूरी पृथ्वी को देख पाता है, लेकिन इन्हें पृथ्वी के घूर्णन से कोई गति नहीं मिलती.


