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Mohammed Rafi Timeless Song : लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे. वो हर कलाकार की बहुत रिस्पेक्ट करते थे. बोलते तो बहुत ही कम थे. मखमली आवाज में जब गीत गाते तो हर कोई भाव-विभोर हो जाता है. कहा जाता है कि वो दिल से गाते थे. दर्द को गानों में घोल देते थे. बहुत ही शांत स्वभाव के मोहम्मद रफी एक बार शम्मी कपूर के लिए मशहूर संगीतकार से भिड़ गए थे. संगीतकार को उनकी बात माननी पड़ी. फिर उन्होंने गाने को अमर कर दिया. गाना आज भी इस फिल्म की पहचान है. आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा………
60 के दशक में शम्मू कपूर का स्टारडम पीक पर था. उन्हें उस जमाने का ‘रॉक स्टार’ कहा जाता था. फिल्मों में उनका डांस देखने लायक होता था. एक बार शम्मी कपूर के लिए मोहम्मद रफी संगीतकार ओपी नैयर से भी भिड़ गए थे. फिर अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि गाने को अमर कर दिया. यह किस्सा 1964 की फिल्म ‘कश्मीर की कली’ से जुड़ा हुआ है. शम्मी कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया था.

‘कश्मीर की कली’ एक रोमांटिक फिल्म थी जिसका निर्देशन शक्ति सामंत ने किया था. फिल्म में शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर, प्राण, धूमल, नाजिर हुसैन और अनूप कुमार जैसे सितारे थे. म्यूजिक ओपी नैयर ने कंपोज किया था. गाने एसएच बिहारी ने लिखे थे. शर्मिला टैगोर की यह डेब्यू फिल्म थी. वो उस समय महज 14 साल की थीं जब फिल्म साइन की थी.

फिल्म का म्यूजिक ओपी नैयर ने कंपोज किया था. फिल्म के एल्बम में कुल 9 गाने थे. इसमें से ‘तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुझे बनाया’ गाना कालजयी साबित हुआ. यह गाना आज भी प्रेमी अपनी प्रेमिका की तारीफ में गाते हैं. यह गाना महफिलों, शादी-पार्टी फंक्शन में आज भी सुनने को मिल जाता है.
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इस गाने को लेकर शम्मी कपूर और संगीतकार ओपी नैयर में झगड़ा हो गया था. दरअसल, जब गाना समाप्त होता है तो शम्मी कपूर चाहते थे कि ‘तारीफ करूं क्या उसकी’ लाइन को बार-बार रिपीट किया जाए. ओपी नैयर इसके लिए तैयार नहीं थे. उनका कहना था कि लाइन रिपीट होगी तो गाना अच्छा नहीं लगेगा.

शम्मी कपूर ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में पूरा किस्से के बारे में कहा था, ‘मैंने ओपी नैयर से कहा कि मुझे साइन लाइन के साथ एंड में रिपीटेशन चाहिए. मैंने कुछ सोचा हुआ था. वो बोले कि बोर करेगा, रिपीटेशन हो जाएगा. गाना लंबा हो जाएगा. मैंने कहा कि मैं कुछ खास एक्ट इस पर करने वाला हूं लेकिन वो नहीं माने. बोले बकवास है. फिर मैंने रफी साहब को यह बात बताई. मैंने कहा कि मैं कुछ करने वाला हूं और मुझे रिपीटेशन चाहिए. क्रूसेंडो बिल्ट अप होगा. गाना पिच पर जाएगा. रफी साहब मान गए.’

शम्मी कपूर ने किस्से के बारे में आगे बताया, ‘रफी साहब पंजाबी बोलते थे. वो दिल से पंजाबी थे. उन्होंने कहा कि वो नैयर से बात करेंगे. वो नैयर से बोले – कि तैनू क्या तकलीफ हो रही है. एक्ट करने वाला शम्मी कपूर है, गाने वाला मैं हूं, तैनूं की तकलीफ हो रही है? अगर ना अच्छा लगे तो काटकर फेंक देना. जब फिल्म रिलीज हुई और हम लोग ट्रायल देख रहे थे, तो आशा भोसले मेरे पास बैठी थीं. गाने का वो सीन देखकर उछल पड़ीं और मुझे खुशी से गले लगा लिया.’

फिल्म का यही गाना, शम्मी कपूर की अदा दर्शकों के दिल में उतर गई. फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा यह है कि कश्मीर में भारी बारिश के कारण मूवी की शूटिंग पूरे 21 दिन रुकी रही थी. जब मौसम साफ हुआ तो अगले 25 दिन तक बारिश नहीं हुई और शूटिंग पूरी हुई.

फिल्म का म्यूजिक पहले शंकर-जयकिशन तैयार कर रहे थे. ओपी नैयर ने एक दिन प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शक्ति सामंत को घर पर बुलाया और कुछ ट्यून सुनाईं. शक्ति सामंत ने उसी समय 12 ट्यून सिलेक्ट कर लीं. इस तरह से ‘कश्मीर की कली’ में ओपी नैयर की एंट्री हुई. फिल्म ने शानदार बिजनेस किया. यह 1964 की 6वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. इस फिल्म ने शर्मिला टैगोर को डेब्यू करते ही स्टार बना दिया.


