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बॉलीवुड की फर्स्ट लेडी, पहले पति संग फिल्मों पर किया राज, एक्टिंग-इंडस्ट्री से छूटा मोह, रूसी से की दूसरी शादी

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Published On: March 30, 2026

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‘मैं बनके चिड़िया…’ की मधुर धुन के साथ देविका रानी की छवि आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर को जीवंत कर देती है. ‘अछूत कन्या’ से मिली पहचान ने उन्हें पहली लेडी सुपरस्टार बनाया, लेकिन उनकी असली ताकत उनकी साहसिक यात्रा में छिपी थी. टेक्सटाइल इंजीनियर की सुरक्षित नौकरी छोड़कर फिल्मों की अनिश्चित दुनिया में कदम रखना. हिमांशु राय के साथ उनकी रचनात्मक साझेदारी और बॉम्बे टॉकीज की स्थापना ने हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी. अभिनय, डिजाइन और फिल्म निर्माण, हर क्षेत्र में उनकी बहुमुखी प्रतिभा झलकी. सामाजिक मुद्दों को पर्दे पर उतारने का उनका साहस उन्हें अपने समय से आगे खड़ा करता है. देविका रानी सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक युग की पहचान हैं, जिनकी विरासत आज भी प्रेरणा देती है.

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देविका रानी को पहला दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिला था.

नई दिल्ली. फिल्म जगत की ‘अछूत कन्या’ ने भारतीय सिनेमा की पहली लेडी सुपरस्टार के रूप में जानी जाने वाली देविका रानी ने उस दौर में बॉलीवुड में महिलाओं के लिए नया रास्ता दिखाया. फिल्म ‘अछूत कन्या’ ने न सिर्फ शानदार कमाई की थी बल्कि समाज की सोच पर गहरा प्रहार करने में भी सफल रही थी. इस फिल्म में लीड रोल में नजर आईं एक्ट्रेस देविका रानी का आज 30 मार्च को जन्मदिन है. देविका रानी को फिल्म इंडस्ट्री की फर्स्ट लेडी भी कहा जाता है. उन्होंने न सिर्फ फिल्मों में कदम रखा बल्कि अपना एक तरफा दबदबा भी कायम किया. ‘बॉम्बे टॉकीज’ के जरिए उन्होंने अपने पति हिमांशु राय के साथ मिलकर फिल्में बनाई और इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी.

30 मार्च 1908 को मद्रास प्रेसिडेंसी के वाल्टियर में जन्मीं देविका रानी एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार से थीं. उनके पिता कर्नल मनमथ नाथ चौधरी सर्जन जनरल थे. महज 9 साल की उम्र में देविका को पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया, जहां उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने ‘रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट’ और ‘रॉयल अकादमी ऑफ म्यूजिक’ से अभिनय और संगीत की शिक्षा ली. इसके अलावा उन्होंने आर्किटेक्चर, टेक्सटाइल और डेकोर डिजाइन में भी महारत हासिल की और टेक्सटाइल इंजीनियर के रूप में काम करना शुरू किया.

देविका रानी

बॉलीवुड की फर्स्ट लेडी बनीं देविका रानी

देविका की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उनकी किस्मत ने उनके लिए सिनेमा की दुनिया का रास्ता खोला. साल 1928 में उनकी मुलाकात फिल्मकार हिमांशु राय से हुई, जो एक फिल्म प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर हिमांशु राय ने उन्हें अपनी फिल्म ‘अ थ्रो ऑफ डायस’ से जुड़ने के लिए इनवाइट किया. देविका रानी ने अपनी स्थिर नौकरी छोड़ दी और फिल्मी दुनिया में कदम रखा. वो हिमांशु राय की फिल्म से एक्ट्रेस के तौर पर नहीं बल्कि बतौर कॉस्ट्यूम डिजाइनर और सहायक आर्ट डायरेक्टर के रूप में जुड़ीं.

पति हिमांशु राय के साथ फिल्मों में रखा कदम

फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखने के लिए दोनों जर्मनी गए, जहां देविका रानी ने बर्लिन के प्रसिद्ध UFA स्टूडियो में ट्रेनिंग ली. इसी दौरान उनकी और हिमांशु राय की नजदीकियां बढ़ीं और दोनों ने विवाह कर लिया. 1933 में भारत लौटने के बाद फिल्म कर्म में देविका रानी ने पहली बार लीड एक्ट्रेस के रूप में काम किया. यही उनके अभिनय करियर की असली शुरुआत थी.

देविका रानी

पति संग की बॉम्बे टॉकीज की स्थापना

इसके बाद दोनों ने मिलकर ‘बॉम्बे टॉकीज’ की स्थापना की, जो उस दौर का एक प्रमुख फिल्म स्टूडियो बना. बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘जीवन नैया’ में अशोक कुमार के साथ उनकी जोड़ी बनी, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया. लेकिन असली सफलता उन्हें ‘अछूत कन्या’ से मिली, जिसने सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दे को बड़े संवेदनशील तरीके से पेश किया.

देविका रानी ने छोड़ दी थी बॉम्बे टॉकीज

इसके बाद ‘जीवन प्रभात’, ‘इज्जत’, ‘प्रेम कहानी’ और ‘वचन’ जैसी फिल्मों ने देविका रानी लोकप्रियता को और मजबूत किया. हालांकि, 1940 के दशक में परिस्थितियां बदलने लगीं. हिमांशु राय के निधन के बाद ‘बॉम्बे टॉकीज’ स्टूडियो में मतभेद और कलह बढ़ने लगे और आखिरकार एक्ट्रेस ने फिल्मों से दूरी बना ली.

रूसी पेंटर से की दूसरी शादी

फिल्मी दुनिया से दूर होने के बाद देविका रानी ने रूसी पेंटर स्वेतोस्लाव रोरिच से दूसरी शादी की और वो अपने दूसरे पति के साथ बेंगलुरु और मनाली में लाइमलाइट से दूर जिंदगी जीने लगीं. फिल्मों में अतुलनीय योगदान के लिए देविका रानी को दादा साहब फाल्के अवॉर्ड मिला था. ये सम्मान हासिल करने वाली वो पहली कलाकार थीं. इसके अलावा देविका को पद्मश्री और सोवियतलैंड नेहरू अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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Pranjul Singh

प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें

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