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Laxmikant Pyarelal Superhit Songs : संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने बॉलीवुड में पूरे तीन दशक राज किया. दोनों का म्यूजिक बहुत ही कर्णप्रिय था. अपने जमाने के संगीतकारों की तुलना में ज्यादा मेलोडियस म्यूजिक बनाते थे. और फीस भी कम लेते थे. एक बार दोनों ने गुस्से में एक आइकॉनिक सॉन्ग बनाया. यह गाना आज भी बॉलीवुड का सबसे हिट गाना है. मूवी भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. म्यूजिक डायरेक्टर अमर हल्दीपुर ने एक इंटरव्यू में इस सुपरहिट गाने का दिलचस्प किस्सा शेयर किया. वो मेलोडियस हिट गाना कौन सा है, वो ब्लॉकबस्टर फिल्म कौन सी थी थी, आइये जानते हैं…….
संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर नगमें दिए. 1963 में आई फिल्म ‘पारसमणि’ का गाने ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ इस संगीतकार जोड़ी का पहला हिट गाना था. फिर तो दोनों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. ‘मन क्यों बहका रे बहका आधी रात को’ ‘धीरे धीरे बोल कोई सुन ना ले’ ‘छुप गए सारे नजारे’, ‘ये रेश्मी जुल्फें’ ‘बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा’ ‘एक दो तीन’ जैसे कई सुपरहिट गाने दिए. एक बार इस संगीतकार जोड़ी ने गुस्से में एक गाना बनाया. यही गाना आज बॉलीवुड का सबसे हिट गाना है. इस गाने के बोल थे : चोली के पीछे क्या है. फिल्म का नाम ‘खलनायक’ था जो कि 1993 में रिलीज हुई थी.

संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को एलपी के नाम से जाना जाता है. दोनों का असल नाम लक्ष्मीकांत शांताराम कुदलकर और प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा था. असाधारण प्रतिभा, अपने मुश्किल हालातों को अपनी ताकत बनाकर दोनों ने बॉलीवुड में तीन दशक तक राज किया. स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने की वजह से दोनों की जोड़ी बनी. लक्ष्मीकांत मैंडोलिन बजाते थे. शंकर-जयकिशन के लिए म्यूजिक अरेंजर के तौर पर काम किया. दोनों ने 700 से ज्यादा फिल्मों में म्यूजिक दिया.

90 के दशक में लक्ष्मीकांत-प्यारेला को नदीम-श्रवण और आनंद-मिलिंद से तगड़ी चुनौती मिली. फिर भी दोनों ने 90 के दशक में एक ऐसा आइकॉनिक दिया जो आज भी शादी-पार्टी, फंक्शन में सुनाई देता है. इस गाने के बोल ‘चोली के पीछे क्या है’ थे. यह गाना संजय दत्त की ‘खलनायक’ फिल्म में माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था. इस गाने को इस संगीतकार जोड़ी ने गुस्से में बनाया था. म्यूजिक डायरेक्टर अमर हल्दीपुर ने इस गाने से जुड़ा दिलचस्प किस्सा शेयर किया था. म्यूजिक डायरेक्टर अमर हल्दीपुर ने वायलिन बजाया करते थे. उन्होंने करीब 150 फिल्मों के लिए बैकग्राउंड म्यूजिक अरेंजर के तौर पर काम किया है.
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हल्दीपुर ने बताया, ‘लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल गाना शुरू होने से पहले बांसुरी-मेंडोलिन-पियानों-सुंदरी पर कोई स्ट्रोक पीस बजाते थे. वो पीस ट्रेड मार्क बन जाता था. सिंगर अपनी जगह गाना गाता था लेकिन वो पीस अपनी जगह ट्रेड मार्क बन जाता था. ‘चोली के पीछे क्या है’ में सुंदरी (शहनाई का छोटा पोर्शन) से बजाई गई ट्यून सबको याद है. इस पीस को बनाते समय प्यारेलाल खासे नाराज हो गए थे.’

संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ कई फिल्मों का हिस्सा रहे अमर हल्दीपुर ने अपने इंटरव्यू में आगे बताया, ‘दरअसल, शहनाई बजाने वाला इस पीस को बजा नहीं पा रहा था. प्यारेलाल जी ने कई तरह से ट्यून को बजाया लेकिन शहनाई वाला वादक उसे बजा नहीं पाया. ऐसे में वो नाराज हो गए और फिर छोटा सा पोर्शन बजवाया. गाने में जो स्ट्रोक पीस सुनाई देता है, उसे प्यारेलाल ने गुस्से में बनाया था, ट्यून को बहुत ही सिंपल करके शहनाई वाले को दिया था, वो सबसे बड़ा हिट गाना साबित हुआ. इस पीस के बजते ही पता चल जाता है कि ‘चोली के पीछे’ गाना आ गया.’

हल्दीपुर ने कहा, ‘किसी भी पॉप्युलर गाने के एक-दो पीस ही शानदार होते हैं. तेजाब फिल्म के आइकॉनिक सॉन्ग ‘एक दो तीन’ की शुरुआत में जो स्ट्रोक पीस बजता है, वो उसकी पहचान है. ये पीस ही गाने की रूह होते हैं. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ काम करने के दौरान कभी ऐसा नहीं लगा कि हम वहां नौकरी कर रहे हैं. वो चाय पिलाने वाले कर्मचारी को भी पास में बिठाकर गाने सुनाते थे. रिएक्शन सुनते थे. वो नौकर से भी मार्केट में चल रहे नए गाने का नाम जाना करते थे.’

‘चोली के पीछे क्या है’ गाने को गीतकार आनंद बख्शी ने लिखा था. यह गाना इतना पॉप्युलर हुआ कि 1 करोड़ ऑडियो कैसेट तो एक हफ्ते के भीतर ही बिक गए थे. सॉन्ग को मेल वर्जन में भी रखा गया था. इस गाने पर संजय दत्त ने डांस किया था. प्लेबैक सिंगर अल्का याज्ञनिक ने ‘चोली के पीछे क्या है’ सॉन्ग के बारे में मजाकिया अंदाज में कहा था कि इसमें मेरी कोई गलती नहीं है. इला अरुण की गलती है. उन्होंने गाने को शुरू किया, मैंने तो चोली में दिल है मेरा, इस दिल को मैं दूंगी अपने यार को, प्यार को गाया है. बहुत ही निर्दोष भाव से गाया है. इसके पीछे अजीब तरह की आवाजें इला अरुण ने डाली हैं.

खलनायक फिल्म 6 अगस्त 1993 को रिलीज हुई थी. संजय दत्त निगेटिव किरदार में थे. उन्हीं पर ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाना भी फिल्माया गया था. फिल्म कंप्लीट करते ही 1993 के मुंबई बम बलास्ट केस के सिलसिले में संजय दत्त को जेल जाना पड़ा था. फिल्म को बैन किए जाने की भी मांग की गई थी. कई जगह पर प्रदर्शन हुए. खलनायक फिल्म ने 1992 में 24 करोड़ का बिजनेस किया था और यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. 1993 में बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली यह दूसरी फिल्म थी.


