अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ जंग रोकने को बेताब नजर आ रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को एक ‘बहुत बड़ा तोहफा’ दिया है, जिसकी वजह से हालात अचानक बदलते नजर आ रहे हैं. ट्रंप के इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या इसी ‘सीक्रेट डील’ की वजह से युद्धविराम की दिशा में तेजी आई है.
क्या होर्मुज पर हुई डील?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘गिफ्ट’ दरअसल कोई बड़ी ऊर्जा डील या सप्लाई से जुड़ा समझौता हो सकता है. मुमकिन है कि ईरान ने अमेरिका या उसके सहयोगियों को तेल-गैस के क्षेत्र में कोई विशेष रियायत दी हो, या फिर होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी हो.
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यह कदम उन्हें यह भरोसा दिलाता है कि वे ‘सही लोगों’ से बातचीत कर रहे हैं. इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत जारी है.
ट्रंप ने किया जंग जीतने का दावा
इस सबके बीच ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले ही इस संघर्ष को ‘जीत’ चुका है और अब इसे आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इस जंग को लंबा खींचना चाहते थे, लेकिन हालात तेजी से बदल गए.
ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर युद्धविराम के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि जमीनी स्तर पर अब भी हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती.
बातचीत पर भी बना सस्पेंस
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और तेहरान के नेता समझौते के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी ‘सही लोगों’ के संपर्क में हैं. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत किस स्तर पर हो रही है या इसमें कौन-कौन शामिल है.
दूसरी तरफ, ईरान की ओर से पहले ऐसे दावों से इनकार किया गया था कि कोई औपचारिक बातचीत हुई है. ऐसे में यह साफ है कि दोनों देशों के बयान अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं.
इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ‘तोहफा’ दरअसल कूटनीतिक दबाव और लाभ का एक मिश्रण हो सकता है. यानी ईरान ने आर्थिक या रणनीतिक रियायत देकर अमेरिका को अपने पक्ष में झुकाने की कोशिश की.
हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन ट्रंप का बार-बार ‘महंगे तोहफे’ का जिक्र करना इस डील को और रहस्यमय बना रहा है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह ‘सीक्रेट तोहफा’ क्या है, जिसने अमेरिका को जंग रोकने की दिशा में इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया? इस सवाल का जवाब आने वाले एक दो दिनों में मिल सकता है.


